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'चाबी उठाई और खुल गया काल का दरवाजा', नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 6 कैमरे बंद थे या बंद किए गए?

Jaipur News: जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर अटैक से महिला सफाईकर्मी सुगना देवी की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं. केंद्रीय जू प्राधिकरण ने 7 महीने पहले ही कई खामियां बताई थीं, जबकि हमले वाले एनक्लोजर के 6 CCTV कैमरे भी खराब थे.

'चाबी उठाई और खुल गया काल का दरवाजा', नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 6 कैमरे बंद थे या बंद किए गए?
Image Credit: नाहरगढ़ टाइगर अटैक.

Jaipur News: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से सामने आई महिला सफाईकर्मी की मौत ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. टाइगर ‘शिवाजी’ के हमले में महिला सफाईकर्मी सुगना देवी की मौत के बाद अब केंद्रीय जू प्राधिकरण की वह रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें करीब सात महीने पहले ही पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी.

रिपोर्ट में सुरक्षा प्रोटोकॉल, स्टाफ की ट्रेनिंग और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों में कई कमियां बताई गई थीं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर समय रहते कार्रवाई होती तो क्या यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था.

सुरक्षा प्रोटोकॉल में मिली थीं कई खामियां
केंद्रीय जू प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट के मुताबिक नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में दुर्घटनाओं से बचाव के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान लागू नहीं था. स्टाफ को जरूरी प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल भी नहीं कराई जा रही थी.

जांच दल को पार्क में पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और फायर अलार्म जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध नहीं मिलीं. आपात स्थिति में विजिटर्स और कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट करने के लिए इमरजेंसी पब्लिक अनाउंसमेंट की व्यवस्था भी नहीं थी.

रिपोर्ट में पार्क में बायोलॉजिस्ट और एजुकेशन ऑफिसर की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए गए थे. इसके अलावा सहायक पशु चिकित्सक के साथ प्रशिक्षित कंपाउंडर और एक्स-रे टेक्नीशियन की जरूरत बताई गई थी. रिपोर्ट में स्थायी क्यूरेटर और केयरटेकर नियुक्त करने की सिफारिश भी की गई थी. आरोप है कि इन सुझावों पर पार्क प्रशासन ने अमल नहीं किया.

एनक्लोजर का गेट कैसे खुला?
हादसे के पीछे नियमों के पालन को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं. नियमों के अनुसार बायोलॉजिकल पार्क में मंगलवार को छुट्टी के दिन एनक्लोजर की साफ-सफाई की जाती है. लेकिन बुधवार को टाइगर ‘शिवाजी’ का स्थायी केयरटेकर मुन्ना छुट्टी पर था.

सूत्रों के अनुसार एनक्लोजर प्रभारी सहायक वनपाल सोनू मीणा भी छुट्टी पर थीं. इससे एक दिन पहले सोनू मीणा के निर्देश पर महिला मजदूरों ने एनक्लोजर में साफ-सफाई की थी. घास कटिंग का कुछ काम बच गया था, जिसे अगले दिन पूरा करने के लिए महिला मजदूरों से कहा गया. इसी दौरान उन्हें एनक्लोजर की चाबी के बारे में भी बताया गया.

बताया जा रहा है कि महिला मजदूरों ने खुद चाबी लेकर एनक्लोजर का लॉक खोल दिया. दूसरी ओर, फॉरेस्ट गार्ड हंसा चौधरी ने वर्किंग डे होने के कारण पिंजरे का गेट खोल दिया. इसके बाद टाइगर ने महिला पर हमला कर दिया.

नियमों के मुताबिक जानवर को बाहर लाने और एनक्लोजर या पिंजरा खोलने के लिए निर्धारित एंट्री की जाती है और विशेष अनुमति के बाद ही यह प्रक्रिया होती है. ऐसे में इस घटना ने पार्क में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

छह CCTV कैमरे खराब, जांच पर भी सवाल
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एनक्लोजर के आसपास करीब 80 CCTV कैमरे लगाए गए हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकतर कैमरे लंबे समय से खराब बताए जा रहे हैं.

जिस एनक्लोजर में टाइगर ने महिला पर हमला किया, वहां लगे सभी छह CCTV कैमरे खराब थे. ऐसे में हादसे की वास्तविक परिस्थितियों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. यह भी सवाल है कि कैमरे वास्तव में खराब थे या घटना का वीडियो सामने आने से रोकने के लिए इन्हें बंद रखा गया था. प्रशासन ने समय रहते खराब कैमरों को ठीक कराने की कोशिश क्यों नहीं की, यह भी जांच का विषय है.

वन्यजीवों को समय पर पिंजरे में शिफ्ट करने के नियम पर भी सवाल
नियमों के अनुसार सूर्यास्त से पहले सभी वन्यजीवों को डिस्प्ले एनक्लोजर से वापस पिंजरे में शिफ्ट करना होता है. इस नियम का पालन भी कभी-कभार ही किए जाने की बात सामने आई है. जानकारों के अनुसार ‘शिवाजी’ टाइगर अन्य टाइगर्स की तुलना में कम एग्रेसिव माना जाता है. उनका कहना है कि यदि इसी जगह कोई दूसरा टाइगर होता तो घटना के परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे. हादसे के समय एनक्लोजर में सात महिलाएं मौजूद थीं. इनमें से सुगना देवी पर टाइगर ने हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई.

कार्रवाई हुई, लेकिन जांच पर उठे सवाल
सुगना देवी की मौत के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए फॉरेस्ट गार्ड हंसा चौधरी को सस्पेंड कर दिया. वहीं रेंजर गौरव चौधरी, सहायक वनपाल प्रदीप कुमार और एनक्लोजर प्रभारी सोनू मीणा को एपीओ कर दिया गया.

मामले की उच्चस्तरीय जांच सहायक वन संरक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है. हालांकि, इसी फैसले को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि जब पार्क के प्रशासनिक प्रबंधन की जिम्मेदारी एसीएफ के पास थी तो उन्हें जांच से अलग रखने के बजाय जांच अधिकारी क्यों बनाया गया. अब निगाहें इस जांच पर हैं कि हादसे के लिए जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहती है या सुरक्षा व्यवस्था में सामने आई पुरानी खामियों की भी जवाबदेही तय होती है.

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Sandhya Yadav

Sandhya Yadav

लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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