SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: शादीशुदा महिला से लिव-इन एग्रीमेंट अवैध, राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने शादीशुदा महिला के साथ लिव-इन एग्रीमेंट के आधार पर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने तथ्य छिपाने और न्यायिक समय बर्बाद करने पर याचिकाकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया.

Written By Ansh Raj
Published: Oct 19, 2026, 06:45 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 06:46 AM IST
Image Credit: Rajasthan High Court
Join

राजस्थान हाईकोर्ट ने शादीशुदा महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप के एग्रीमेंट के आधार पर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है. जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि पहले से विवाहित महिला का विवाह कानूनी रूप से समाप्त हुए बिना किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह जैसी स्थिति का दर्जा नहीं दिया जा सकता. अदालत ने याचिकाकर्ता पर तथ्य छिपाने और न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया.

युवक ने महिला को पत्नी बताकर दाखिल की थी याचिका
मामले में एक युवक ने अदालत में याचिका दायर कर बीकानेर निवासी महिला को अपनी पत्नी बताया था. उसने आरोप लगाया कि महिला निजी प्रत्यर्थियों के अवैध कब्जे में है. याचिकाकर्ता ने महिला को उनके कथित अवैध निरोध से मुक्त कराने और अदालत में पेश करने की मांग की थी. उसने अपनी मांग के समर्थन में लिव-इन रिलेशनशिप के एक एग्रीमेंट का आधार लिया था.

सुनवाई में सामने आया महिला की शादी का तथ्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि संबंधित महिला पहले से विवाहित है. उसका पति जीवित है और दोनों की तीन महीने की संतान भी है. इन तथ्यों के सामने आने के बाद अदालत ने याचिका के आधार और महिला को अवैध रूप से रोके जाने के दावे पर विचार किया.
खंडपीठ ने पाया कि महिला अपने परिजनों के पास रह रही थी. उसे अवैध रूप से बंधक बनाए जाने या उसकी स्वतंत्रता पर गैरकानूनी रोक लगाए जाने के संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया था.

भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 का उल्लेख
न्यायाधीश मुन्नुरी लक्ष्मण और न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह जैसी स्थिति का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

अदालत ने भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में प्रस्तुत लिव-इन एग्रीमेंट शून्य और लोक नीति के विरुद्ध है. इसी आधार पर अदालत ने एग्रीमेंट के सहारे मांगी गई राहत को स्वीकार नहीं किया.

याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना
अदालत ने मामले में तथ्यों को छिपाने और न्यायिक समय बर्बाद करने पर नाराजगी जताई. इसके बाद युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी गई. साथ ही, याचिकाकर्ता को 25,000 रुपये चार सप्ताह के भीतर चाइल्ड सेक्रेटेरिएट्स के खाते में जमा कराने का निर्देश दिया गया.

ये भी पढ़ें- राजस्थान के 7 जिलों को भिगोने आ रहे हैं काले बादल: IMD ने इन शहरों के लिए जारी किया येलो अलर्ट
 

फैसले का क्या है महत्व?
इस मामले में अदालत ने लिव-इन एग्रीमेंट के आधार पर महिला को पेश कराने की मांग और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की पोषणीयता पर विचार किया. फैसले में महिला के पहले से विवाहित होने, उसके पति के जीवित होने और अवैध निरोध के ठोस सबूत नहीं मिलने को महत्वपूर्ण माना गया. यह आदेश संबंधित मामले के तथ्यों और अदालत की टिप्पणियों पर आधारित है. इसे हर लिव-इन रिलेशनशिप या बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर लागू होने वाला सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES