कोटा में BJP का मुस्लिम कार्ड क्यों नहीं चला ? 5 मुस्लिम चेहरों को टिकट, पांचों हारे
Kota Nikay Chunav : कोटा नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने बहुमत का अपना लक्ष्य तो हासिल कर लिया, लेकिन मुस्लिम चेहरों को आगे बढ़ाने का उसका चुनावी प्रयोग उम्मीद के मुताबिक कामयाब नहीं हो सका. पार्टी ने 100 वार्डों में पांच मुस्लिम उम्मीदवारों को बीजेपी के सिंबल पर मैदान में उतारा था. पांचों उम्मीदवार चुनाव हार गए. खास बात यह है कि कई वार्डों में बीजेपी प्रत्याशियों को कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों से भी कड़ी चुनौती मिली.
Kota Nikay Chunav : कोटा के ये नतीजे महज पांच सीटों की हार नहीं हैं, बल्कि बीजेपी की उस रणनीति पर सवाल खड़े करते हैं, जिसके तहत पार्टी ने मुस्लिम चेहरों को टिकट देकर अल्पसंख्यक समाज में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश की थी.
वार्ड 6 : कांग्रेस की आइना महक ने 1800 वोटों से हराया
वार्ड 6 में बीजेपी के मोहम्मद निजाम के सामने कांग्रेस की आइना महक थीं. चुनाव परिणाम में आइना महक ने निजाम को करीब 1800 वोटों के अंतर से शिकस्त दी. यानी इस वार्ड में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा मतदाताओं को जीत तक नहीं पहुंचा सका और कांग्रेस उम्मीदवार ने स्पष्ट बढ़त बनाई.
वार्ड 45: BJP प्रत्याशी तीसरे पायदान तक पहुंचे
वार्ड 45 का परिणाम बीजेपी के लिए और ज्यादा राजनीतिक संदेश देने वाला रहा. यहां बीजेपी के मुस्तकीम को कांग्रेस के फरीदुद्दीन ने हराया. खास बात यह रही कि निर्दलीय समीउल्लाह दूसरे नंबर पर रहे, यानी बीजेपी उम्मीदवार को कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशी से भी मुकाबला करना पड़ा और वे जीत हासिल नहीं कर सके.जो बताता है कि केवल बीजेपी का सिंबल और मुस्लिम प्रत्याशी होना जीत की गारंटी नहीं बना.
वार्ड 48: 2486 वोटों की बड़ी हार
वार्ड 48 में कांग्रेस के इनायत हुसैन ने बीजेपी के यूसुफ कक्कड़ को 2486 वोटों के बड़े अंतर से हराया. पांच मुस्लिम उम्मीदवारों में ये नतीजा बीजेपी के लिए सबसे स्पष्ट राजनीतिक झटकों में से एक माना जा सकता है. यहां कांग्रेस ने बीजेपी के मुस्लिम प्रत्याशी के मुकाबले मजबूत जनसमर्थन हासिल किया.
वार्ड 60: साबिर भाटी के गढ़ में बड़ा झटका
सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा वार्ड 60 के परिणाम को लेकर है. यहां कांग्रेस की तरन्नुम ने बीजेपी की अदा खान भाटी को 2170 वोटों से शिकस्त दी. अदा खान भाटी की उम्मीदवारी इसलिए भी अहम थी क्योंकि उनके पति साबिर भाटी बीजेपी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं. ऐसे में इस वार्ड का परिणाम सिर्फ एक उम्मीदवार की हार नहीं, बल्कि बीजेपी के एक चर्चित मुस्लिम राजनीतिक चेहरे के प्रभाव और स्थानीय चुनावी समीकरणों को लेकर भी सवाल खड़े करता है.
वार्ड 82 में भी नहीं खुला खाता
वार्ड 82 से बीजेपी ने अमरीन अंसारी को मैदान में उतारा था. यहां भी बीजेपी का मुस्लिम चेहरा जीत हासिल नहीं कर सका. कांग्रेस की रेहाना अंसारी ने इन्हें 1350 मतों से हराया. यानी पांच में से किसी भी वार्ड में बीजेपी का यह प्रयोग सीट में तब्दील नहीं हो पाया। अब सबसे बड़ा सवाल-रणनीति में बदलाव होगा ?
इन नतीजों का राजनीतिक विश्लेषण कई स्तरों पर किया जा सकता है. एक तरफ बीजेपी ने कोटा नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर अपनी व्यापक चुनावी ताकत साबित की है. दूसरी तरफ मुस्लिम उम्मीदवारों के स्तर पर पार्टी को पांचों वार्डों में निराशा हाथ लगी.
हालांकि, इसे सीधे तौर पर पूरे मुस्लिम समाज के बीजेपी के खिलाफ मतदान के रूप में देखना भी सही नहीं होगा. नगर निगम चुनाव में वार्ड स्तर के समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दे, जातीय-सामाजिक समीकरण और संगठन की सक्रियता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन, इतना जरूर है कि बीजेपी का मुस्लिम चेहरों को टिकट देकर अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाने और राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयोग फिलहाल चुनावी सफलता में नहीं बदल सका. ब असली सवाल ये है कि बीजेपी इन नतीजों को किस तरह पढ़ती है. क्या पार्टी मुस्लिम प्रतिनिधित्व की अपनी रणनीति को और मजबूत करेगी, उम्मीदवार चयन के तरीके पर मंथन करेगी या फिर कोटा के इन नतीजों के बाद अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करेगी ?
कोटा नगर निगम का चुनाव बीजेपी के लिए बहुमत की जीत जरूर है, लेकिन मुस्लिम उम्मीदवारों के नतीजे पार्टी के लिए एक अलग राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड लेकर आए हैं और आने वाले समय में इसी रिपोर्ट कार्ड पर सबसे ज्यादा सियासी मंथन होना तय माना जा रहा है.