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कभी अपनी शाही चाल और रौब से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली देश की सबसे उम्रदराज बाघिन महक अब उम्र के ऐसे पड़ाव पर पहुंच चुकी है, जहां उसके कदम लड़खड़ाने लगे हैं. कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही महक 22 साल से अधिक उम्र पूरी कर चुकी है और 23वें वर्ष में चल रही है. आमतौर पर बाघों की उम्र 14 से 17 साल के बीच होती है, लेकिन महक इस औसत उम्र से कई साल आगे निकल चुकी है. उम्र के इस पड़ाव पर उसके शरीर का पिछला हिस्सा कमजोर हो गया है. चलने और शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी होने के कारण अब उसे पर्यटकों के सामने ओपन डिस्प्ले एरिया में नहीं छोड़ा जा रहा है. गिरने और चोट लगने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने उसे नाइट शेल्टर और कराल क्षेत्र में ही रखने का निर्णय लिया है. यहां पशु चिकित्सकों की विशेष निगरानी में उसकी देखभाल की जा रही है.
महक की कहानी भी बेहद खास है. उसका जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में हुआ था. उसकी जन्मतिथि का रिकॉर्ड उपलब्ध है. महक की एक जुड़वां बहन रंभा भी थी. दोनों ने एक साथ जीवन की शुरुआत की, लेकिन अब रंभा इस दुनिया में नहीं है. महक का साथी बाघ नाहर भी अगस्त 2024 में करीब 18 साल की उम्र में दम तोड़ चुका है. इसके बाद से महक अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में अकेली रह गई है. पिछले दो वर्षों से अभेड़ा पार्क में महक का जन्मदिन भी विशेष रूप से मनाया जा रहा है. उसकी लंबी उम्र और पार्क में उसके विशेष महत्व के चलते जन्मदिन के मौके पर वन्यजीव प्रेमियों और पार्क प्रबंधन के बीच खास उत्साह रहता है.
उम्र के साथ महक के पिछले हिस्से में कमजोरी आई है. उसे चलने-फिरने में परेशानी होती है और पहले की तुलना में भोजन लेने की मात्रा में भी कमी हुई है. ऐसे में वन विभाग ने उसका ओपन डिस्प्ले बंद कर दिया है. अब उसे नाइट शेल्टर और कराल यानी होल्डिंग एरिया में रखा जा रहा है. उसके आराम के लिए फर्श पर गद्दों की व्यवस्था की गई है. सफाई और डिसइंफेक्शन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. मक्खी-मच्छरों से बचाव के इंतजाम भी किए गए हैं. सर्दी बढ़ने पर उसके लिए हीटर की व्यवस्था की जाएगी.
महक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए सीसीएफ की ओर से विशेष कमेटी बनाई गई है. इसमें सहायक वन संरक्षक पंकज कुमार मीणा, वरिष्ठ पशु चिकित्सक अखिलेश कुमार पांडे और डॉ. त्रिलोक गोचर शामिल हैं. कमेटी सप्ताह में दो बार महक का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है, जबकि रोजाना भी उसकी निगरानी की जाती है. डॉक्टरों के अनुसार हालिया जांच में उसका तापमान और सांस संबंधी स्थिति सामान्य मिली है. यूरिन और फीकल टेस्ट की रिपोर्ट भी उसकी उम्र के हिसाब से सामान्य रही है.

महक की उम्र को देखते हुए उसके खानपान में भी विशेष बदलाव किए गए हैं. अब उसे एक बार में ज्यादा भोजन देने के बजाय दिन में तीन बार अलग-अलग आहार दिया जा रहा है. सुबह उबला हुआ चिकन, दोपहर में अंडे और सूप तथा शाम को मीट दिया जाता है. इसके साथ ही पाचन को बेहतर रखने के लिए प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स, लिवर टॉनिक और जोड़ों को सपोर्ट देने वाले सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं. सर्दियों में मौसम के अनुसार चिकन की मात्रा बढ़ाई जाएगी और मीट की मात्रा में बदलाव किया जाएगा. डॉक्टरों का प्रयास है कि महक को उसकी उम्र के मुताबिक संतुलित पोषण और आराम मिलता रहे.
लंबी उम्र के मामले में महक ने देश की चर्चित बाघिनों को भी पीछे छोड़ दिया है. रणथंभौर की मशहूर बाघिन मछली और गुवाहाटी की स्वाति करीब 20 साल तक जीवित रही थीं, जबकि महक 22 साल से अधिक उम्र पूरी कर चुकी है. वहीं पश्चिम बंगाल का बाघ राजा करीब 25 साल 10 महीने तक जीवित रहा था. विश्व स्तर पर अमेरिका की बाघिन बंगाली के नाम 25 साल 319 दिन की उम्र का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. ऐसे में महक की उम्र वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी अध्ययन का विषय बन गई है.
महक की असाधारण उम्र ने वन विभाग का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है. विभाग उसकी लंबी उम्र के पीछे के कारणों को समझने के लिए रिसर्च करने की योजना बना रहा है. इसके तहत उसके DNA, खानपान और जीवनशैली का अध्ययन किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामान्य उम्र से कई साल अधिक जीवित रहने में कौन से कारक महत्वपूर्ण रहे हैं.
फिलहाल वन विभाग की प्राथमिकता महक को पर्यटकों के सामने प्रदर्शित करने के बजाय उसके जीवन के इस पड़ाव में सुरक्षित, स्वस्थ और आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराना है. अब देखना होगा कि रिसर्च में महक की असाधारण लंबी उम्र के कौन से राज सामने आते हैं.