)
Khatu Shyam Ji: सीकर जिले की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी में श्याम भक्त शिरोमणि आलू सिंह महाराज की पुण्यतिथि 2 अक्टूबर यानी कल श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जाएगी. आलू सिंह महाराज बाबा श्याम के अनन्य भक्त माने जाते हैं. पुण्यतिथि के अवसर पर श्री श्याम बगीची में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. पुण्यतिथि को लेकर श्री श्याम बगीची को आकर्षक रूप से सजाया गया है. ये बाबा श्याम के वो भक्त हैं, जिनका नाम उनकी आरती में भी लिया जाता है.
पुण्यतिथि के लिए फूलों से सज रही श्री श्याम बगीची
पुण्यतिथि को लेकर श्री श्याम बगीची को आकर्षक रूप से सजाया गया है. भगवान के रंग-बिरंगे छाया चित्रों के साथ मनमोहक फूलों से आलू सिंह महाराज का दरबार सजाया जा रहा है. आयोजन को लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के खाटूधाम पहुंचने का सिलसिला जारी है. रात्रि में सुंदरकांड पाठ के साथ भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा.
महाआरती के बाद रातभर गूंजेंगे बाबा श्याम के भजन
महाराज मोहन दास सिंह चौहान के सान्निध्य में महाआरती के बाद संपूर्ण रात्रि भजन संध्या शुरू होगी, जिसमें श्रद्धालु बाबा श्याम की भक्ति में देर रात तक डूबे रहेंगे. पुण्यतिथि के अवसर पर 2 अक्टूबर को विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा. आयोजन को लेकर श्री श्याम बगीची में तैयारियां अंतिम चरण में हैं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आ रहा है.

भजन-कीर्तन के जरिए घर-घर पहुंचाया बाबा श्याम का नाम
कहा जाता है कि आलू सिंह महाराज श्याम बाबा एक वो भक्त हैं, जिन्होंने बाबा श्याम के कीर्तन और भजनों के माध्यम से खाटूश्याम जी को घर-घर पहुंचाया. इसके चलते ही श्याम बाबा की आरती और जयकारों में आलू सिंह महाराज का नाम लिया जाता है. साथ ही आलू सिंह महाराज को ही बाबा श्याम का सबसे प्रिय भक्त की उपाधि भी मिली हुई है. कहते हैं कि आलू सिंह महाराज ने अपना पूरा जीवन बाबा श्याम के चरणों में समर्पित किया था.
कहां है आलू सिंह महाराज का मंदिर?
इसके चलते ही खाटू धाम में मुख्य मंदिर परिसर के पास स्थित श्याम बगीची का आलू सिंह जी महाराज के जीवन से गहरा संबंध माना जाता है। यह स्थान उनकी भक्ति और पुष्प सेवा की परंपरा से जुड़ा है. यहां उनकी समाधि और मंदिर स्थित हैं. आज भी बाबा श्याम के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु श्याम बगीची पहुंचकर आलू सिंह जी महाराज को नमन करते हैं. कई भक्त यहां बैठकर श्याम नाम का जाप और भजन-कीर्तन करते हैं.
कब और कहां हुआ था आलू सिंह महाराज का जन्म?
मिली जानकारी के मुताबिक, आलू सिंह महाराज का जन्म सन् 1916 में खाटू धाम के एक राजपूत परिवार में हुआ था. साथ ही उनके पिता किशन सिंह भी श्याम बाबा के भक्त थे. ऐसे में बचपन से ही उनका पूरा जीवन बाबा श्याम की सेवा और ध्यान में बीता.
पत्नी के निधन के बाद भक्ति में बिताने लगे अधिक समय
कहानियों के अनुसार, आलू सिंह जी महाराज की शादी युवा अवस्था में सवाई माधोपुर के एक राजावत परिवार में हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके एक बेटे थे. कुछ वक्त बाद उनकी पत्नी का निधन हो गया. इसके बाद आलू सिंह जी महाराज ने अपना अधिकतर समय बाबा खाटू श्याम की भक्ति और सेवा में समर्पित कर दिया.
श्रृंगार और भजन-कीर्तन में बीतता था दिन
आलू सिंह जी महाराज की दिनचर्या में बाबा श्याम का श्रृंगार, पुष्प सेवा, भजन-कीर्तन और श्याम नाम का जाप प्रमुख था. बताया जाता है कि वह दूर-दूर से फूल लाकर उनकी मालाएं बनाते और बाबा श्याम को अर्पित करते थे. उनका पूरा समय पूजा-अर्चना और बाबा के स्मरण में बीतता था. धीरे-धीरे श्याम भक्तों के बीच उनकी पहचान बाबा के अनन्य भक्त के रूप में स्थापित हुई. कहा जाता है कि आलू सिंह जी महाराज के बाद भी उनके परिवार से जुड़ी बाबा श्याम की सेवा परंपरा जारी है.
डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.