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खंडेला का रण: 1959 में बनी प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में क्या फिर चलेगा महादेव सिंह परिवार का दबदबा?

सीकर की खंडेला पंचायत समिति में 28 अक्टूबर को मतदान होगा. महिला के लिए आरक्षित प्रधान पद को लेकर मुकाबला अहम है. पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला ने अपनी बहू मीनाक्षी सिंह को पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में उतारा है.

खंडेला का रण: 1959 में बनी प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में क्या फिर चलेगा महादेव सिंह परिवार का दबदबा?
Image Credit: खंडेला पंचायत समिति में सियासी विरासत की परीक्षा.

राजस्थान की सबसे बड़ी पंचायत समितियों में शामिल खंडेला में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है. इस बार पंचायत समिति के प्रधान पद की कमान महिला के हाथों में होगी. सीट महिला के लिए आरक्षित होने के कारण चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भूमिका अहम रहने वाली है. वहीं, क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला के परिवार का लंबे समय से पंचायत समिति की राजनीति में प्रभाव रहा है.

1959 में हुआ था पंचायत समिति का गठन
खंडेला पंचायत समिति का गठन वर्ष 1959 में हुआ था. चतुर्भुज गोयल यहां के पहले प्रधान बने थे. प्रशासकों को छोड़कर अब तक 10 प्रधान इस पद पर रह चुके हैं. पंचायत समिति की राजनीति में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महादेव सिंह खंडेला के परिवार का खास दबदबा रहा है. उनकी पत्नी पार्वती देवी दो बार प्रधान बनीं, जबकि उनके बेटे गिरिराज सिंह भी एक बार इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

पार्वती देवी खंडेला पंचायत समिति की पहली महिला प्रधान थीं. इनके अलावा हनुमान सिंह आर्य और पूर्व मंत्री गोपाल सिंह भी प्रधान रह चुके हैं. इस बार महिला के लिए सीट आरक्षित होने से प्रधान पद को लेकर राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गए हैं.

2 लाख 26 हजार से अधिक मतदाता करेंगे मतदान
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, खंडेला पंचायत समिति क्षेत्र में कुल 2 लाख 26 हजार 314 मतदाता हैं. पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में 28 अक्टूबर को मतदान होना है. इस चुनाव में 37 पंचायत समिति सदस्यों और 6 जिला परिषद सदस्यों के भाग्य का फैसला मतदाता करेंगे. इसके साथ ही क्षेत्र की 52 ग्राम पंचायतों में सरपंच चुने जाएंगे.

महादेव सिंह खंडेला ने बहू को बनाया उम्मीदवार
प्रधान पद की सीट महिला के लिए आरक्षित होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला ने अपनी पुत्रवधू मीनाक्षी सिंह को पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में उतारा है. ऐसे में चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक जानकारों और स्थानीय लोगों की नजर रहेगी. हालांकि, प्रधान पद तक पहुंचने का रास्ता पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव परिणाम से होकर गुजरेगा.

नौ ग्राम पंचायतों में पहली बार चुने जाएंगे सरपंच
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद खंडेला पंचायत समिति की नौ ग्राम पंचायतों में पहली बार सरपंच चुने जाएंगे. इनमें सुखपुरा, सलेदीपुरा, घसीपुरा, उदयपुरा, विजयपुरा, सौंथलिया, शाहपुरा, दादिया रामपुरा और भोजपुर शामिल हैं.

इन नई ग्राम पंचायतों में पहली बार होने वाला चुनाव स्थानीय नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वहीं, पंचायत समिति के प्रधान पद पर महिला की ताजपोशी और महादेव सिंह खंडेला के परिवार की राजनीतिक विरासत इस चुनाव के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं.

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About the Author

Ashok Singh Shekhawat

Ashok Singh Shekhawat

अशोक सिंह शेखावत सीकर (राजस्थान) निवासी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो पिछले 23 से अधिक वर्षों से प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे ज़ी राजस्थान में सीकर जिला ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं।विज्ञान, विधि (LL.B.), फार्मास्यूटिकल्स और पत्रकारिता (BJMC) में बहु-विषयक शिक्षा प्राप्त शेखावत जी ने अपने करियर की शुरुआत राजकीय अस्पताल, झुंझुनूं में 7 वर्षों तक बतौर फार्मासिस्ट की थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया क्षेत्र में कदम रखते हुए राजस्थान पत्रिका, इंडिया टुडे और ईटीवी राजस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में लंबे समय तक अपनी सेवाएँ दीं।सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR, राजस्थान) से अधिस्वीकृत पत्रकार (संख्या: 1410) के रूप में उन्हें रक्षा व शहीद परिवारों के कल्याण, स्वास्थ्य-चिकित्सा और क्षेत्रीय राजनीति की सटीक व संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। निष्पक्ष पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के लिए वे सीकर व झुंझुनूं जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित भी हो चुके हैं।
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