डॉक्टर गायब, मरीज परेशान: जोधपुर के सरकारी अस्पताल में रियलिटी चेक के दौरान खुली व्यवस्था की पोल
Jodhpur News: जोधपुर के पावटा सेटेलाइट जिला अस्पताल में रियलिटी चेक के दौरान सुबह 9:30 बजे तक कई डॉक्टर अपनी सीटों पर नहीं मिले. पर्ची काउंटर भी देर से खुला. पीएमओ डॉ. कुलबीर सिंह ने स्टाफ की कमी को इसकी वजह बताया.
Jodhpur News: सरकार की ओर से आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और निशुल्क इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अस्पतालों में व्यवस्थाओं की स्थिति पर लगातार सवाल उठते रहते हैं. जोधपुर के पावटा सेटेलाइट जिला अस्पताल में जी मीडिया के रियलिटी चेक के दौरान भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई. यहां सुबह 9:30 बजे तक कई डॉक्टर अपनी सीटों पर मौजूद नहीं मिले. उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते रहे. वहीं, पर्ची काउंटर भी देरी से खुला और बुजुर्गों के लिए बनाया गया काउंटर बंद मिला.
ओपीडी का समय शुरू, लेकिन डॉक्टरों का इंतजार करते रहे मरीज
सर्दियों में पावटा सेटेलाइट जिला अस्पताल की ओपीडी का निर्धारित समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक है. इसके बावजूद सुबह ओपीडी शुरू होने के बाद भी कई मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल पाया. अस्पताल के कई कमरों पर ताले लगे हुए थे, जबकि कुछ जगह डॉक्टरों की कुर्सियां खाली नजर आईं.
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा. ग्रामीण क्षेत्रों से लंबा सफर तय करके आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और मुश्किल भरी रही. मरीज अस्पताल इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि डॉक्टर उनकी जांच करेंगे, बीमारी का पता लगाएंगे और जरूरत के अनुसार दवाइयां लिखेंगे. लेकिन चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा.
डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में कैसे मिलेगा योजनाओं का लाभ?
सरकार आम लोगों को आर्थिक राहत देने के लिए निशुल्क जांच और निशुल्क दवा जैसी योजनाएं संचालित कर रही है. इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसों की कमी के कारण किसी मरीज को उपचार से वंचित न रहना पड़े. हालांकि, इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता भी जरूरी है.
यदि ओपीडी के निर्धारित समय पर चिकित्सक मौजूद नहीं रहते, तो मरीजों को समय पर जांच और परामर्श मिलने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. मरीजों को केवल योजनाओं की जानकारी ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय उनका लाभ मिलना भी जरूरी है.
स्टाफ की कमी बता रहे अस्पताल के पीएमओ
इस मामले में अस्पताल के पीएमओ डॉ. कुलबीर सिंह ने जी मीडिया को बताया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है. उनके अनुसार, नाइट ड्यूटी करने वाला स्टाफ सुबह वापस नहीं आता, जिसके चलते कई डॉक्टर सुबह की ओपीडी में नहीं बैठ पाते हैं.
पीएमओ ने डॉक्टरों की अनुपस्थिति के पीछे स्टाफ की कमी को वजह बताया है. हालांकि, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है. इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था करना और कर्मचारियों की उपस्थिति पर नियमित निगरानी रखना जरूरी है.
मरीजों को राहत दिलाने के लिए व्यवस्था में सुधार जरूरी
पावटा सेटेलाइट जिला अस्पताल की स्थिति ने ओपीडी संचालन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं. समय पर पर्ची नहीं बनना, बुजुर्गों के लिए निर्धारित काउंटर बंद रहना और डॉक्टरों का उपलब्ध नहीं होना मरीजों की परेशानी बढ़ा सकता है.
अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है. मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श मिले और निर्धारित समय में ओपीडी सुचारु रूप से संचालित हो, इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है.