पाकिस्तान में वोट डाल चुके शख्स ने भारत में कैसे किया मतदान ?
राजस्थान के जोधपुर में पंचायत चुनाव में एक ऐसे शख्स ने वोट डाला, जो पाकिस्तान में 4 बार वोट डाल चुका है. 51 साल के हो चुके डॉ .दलजी राम भील ने मुताबिक आज वोट देने के बाद जो खुशी उन्हे हुई है. उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.
डॉ. दलजी राम अकेले नहीं थे जिन्होने राजस्थान पंचायत चुनाव के दौरान पहली बार वोट के अधिकार का प्रयोग किया. उनके जैसे रमेश कुमार और प्रीतम जयपाल जैन जैसे कई वोटर भी वोट डालने के बाद अपनी खुशी के आंसुओं को रोक नहीं पाए. दरअसल ये सभी पाकिस्तान विस्थापित परिवार हैं जो जोधपुर में आकर बस गये हैं,
वोट के साथ सवाल पूछने का भी अधिकार
इन पाक विस्थापितों का कहना है कि पाकिस्तान में उन्हें दोयम दर्जे की जिदंगी जीनी पड़ती थी. वहां वोट तो था, लेकिन कोई अधिकार नहीं. लेकिन CAA के जरिए अब वो मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं. अब इनके लिए वोट का मतलब सिर्फ एक बटन दबाना या स्याही लगना ही नहीं है, बल्कि सिस्टम से सवाल पूछना है. इन्हें उम्मीद है कि अब इनकी बस्तियों में पक्के पट्टे, पानी, बिजली और सड़कें आ सकेंगी.
51 का उम्र में पहली बार किया वोट
वोट देने के बाद डॉ. दलजी राम ने बताया कि वो साल 2013 में जब भारत आए, तब वो 36 साल के थे. आज 51 के हो चुके हैं. पाकिस्तान में उन्होंने 4 बार वोट डाला था, लेकिन वो वोट एक खानापूर्ति थी. आज जब वो अपनी कर्मभूमि, अपने असली देश भारत में वोट डाल रहे हैं, तो उनके पास शब्द कम पड़ गए हैं. वो आगे कहते हैं कि "मैं बता नहीं सकता... शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है कि आज कैसा लग रहा है. पाकिस्तान में भी मैंने 4 बार वोट दिया था, लेकिन आज 51 साल की उम्र में पहली बार लग रहा है कि अपनी जमीन, अपने देश में वोट डाल रहा हूं. बहुत खुश हूं. मेरे परिवार में चार लोगों के वोटर आईडी कार्ड बन गए हैं, 3 के अभी बाकी हैं. बस एक सुकून है कि अब हम इस देश के नागरिक हैं.
आधा परिवार आज भी पाकिस्तान में
खुशी के इस माहौल में एक कसक भी है. बंटवारे का वो दर्द जो 1947 से चला आ रहा है. वो इन परिवारों के लिए आज भी जिंदा है. डॉ. दिल जी राम बताते हैं कि उनका आधा परिवार पाकिस्तान में रह गया है और आधा भारत में है. दोनों मुल्कों के बीच हवाई और रेल सफर बंद है, आना-जाना इतना महंगा हो गया है कि परिवार आपस में मिल नहीं पाते.
जोधपुर में करीब 35 हजार प्रवासी रह रहे हैं. 31 दिसंबर 2014 तक जो लोग आए, उन्हें CAA के तहत नागरिकता मिल गई. लेकिन जो 2014 के बाद और 2025 तक भारत आए हैं, वो आज भी नागरिकता की आस में बैठे हैं. डॉ. दिलजी राम की सरकार से यही गुजारिश है, कि CAA की प्रक्रिया को थोड़ा और सरल किया जाए, ताकि बचे हुए लोगों का वनवास भी खत्म हो सके.
डॉ. दिलजी राम बताते हैं कि नागरिकता मिलने के बाद डॉक्युमेंटेशन में आज भी बड़ी दिक्कत आती है. आधार कार्ड बना पाना बहुत मुश्किल है. आधार कार्ड नहीं बनने के चलते छोटे बच्चों के एजुकेशन के लिए परेशानी होती है. जिसको लेकर हम राजस्थान हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी डाल चुके थे. जिसमें कोर्ट ने कहा था कि किसी भी विस्थापित बच्चे को आधार कार्ड के चलते शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाए.
जोधपुर में जेडीए की तरफ से एक आवासीय योजना भी है. जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर विस्थापित परिवार प्लॉट की कीमत एक मुश्त जमा नहीं करा पा रहे थे, तो कोर्ट में आवेदन किया गया था और फिर हाईकोर्ट ने मंथली किश्तों पर विस्थापन को आवंटित करने के आदेश दिए थे.
आपको बता दें कि जोधपुर के अलग-अलग क्षेत्र में पाक विस्थापित रहते हैं, करीब जोधपुर में 27 बस्तियां पाक विस्थापितों की है. जिसमें 10000 से ज्यादा परिवार हैं. ग्रामीण क्षेत्र के अलग-अलग वार्ड और पंचायत समितियां की बात करें तो लगभग हर पंचायत समिति स्तर के बूथ पर मतदान कर रहे हैं. लेकिन सैकड़ों वाटर ऐसे हैं जो पहली बार का कानून के तहत भारतीय नागरिकता मिलने के बाद वोट कर रहे हैं और उसमें जोधपुर की तीन बस्तियों के लोग चोखा क्षेत्र में रहते है, जो करीब 500 से ज्यादा हैं.