SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

एक महल बनाने के लिए सैनिकों ने जिंदा काट दिए थे 363 लोग, पढ़ें राजस्थान की वो कहानी

जोधपुर के खेजड़ली गांव में हर साल भादवे की दशमी को खेजड़ली शहीदी मेले का आयोजन होता है. यह मेला 21 सितंबर 1730 को खेजड़ी के पेड़ों की रक्षा के लिए अमृता देवी सहित 363 महिला-पुरुषों के बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है. इतिहास के अनुसार, महाराजा अभय सिंह के आदेश पर सैनिक पेड़ काटने पहुंचे थे, जिसका अमृता देवी और ग्रामीणों ने पेड़ों से चिपककर विरोध किया. अमृता देवी, उनकी तीन बेटियों समेत 363 लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए जान दे दी.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Sep 22, 2026, 02:18 PM IST | Updated: Sep 22, 2026, 02:24 PM IST
Image Credit: खेजड़ली शहीदी मेला
Join

Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर जिले के खेजड़ली गांव में हर साल भादवे महीने की दशमी को खेजड़ली शहीदी मेला पर्यावरण संरक्षण के इतिहास से जुड़ा एक मेला लगता है.  21 सितंबर 1730 को अमृता देवी के नेतृत्व में 363 महिला-पुरुषों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दी थी. उन्हीं बलिदानियों की स्मृति में हर साल खेजड़ली में शहीदी मेला लगता है.

रविंद्र सिंह भाटी पहुंचे थे खेजड़ली धाम 
रविंद्र सिंह भाटी खेजड़ली धाम पहुंचे और उन्होंने सोशल मीडिया X पर शेयर करते हुए लिखा कि जोधपुर में विश्व प्रसिद्ध खेजड़ली मेले में शामिल होकर पर्यावरण एवं प्रकृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले 363 वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की.

इस पावन अवसर पर गुरु श्री जंभेश्वर भगवान के मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला. खेजड़ली धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति समर्पण, त्याग और संरक्षण की अमर प्रेरणा का प्रतीक है. यहां की पवित्र धरा आज भी उन वीर-वीरांगनाओं के अद्वितीय बलिदान की गौरवगाथा सुनाती है, जिन्होंने वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. यह पवित्र स्थल हमें सिखाता है 'सिर सांठे रुंख रहे तो भी सस्तो जान' अर्थात, वृक्षों की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान भी सस्ता है.

इस पावन मेले में आप सभी परिवारजनों द्वारा मिले आत्मीय स्नेह, सम्मान और अपनत्व के लिए हृदयतल से कोटि-कोटि आभार. आप सभी का यह स्नेह और विश्वास सदैव सेवा एवं जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा.

महाराजा अभय सिंह के आदेश पर पेड़ काटने पहुंचे थे सैनिक
इतिहास की कहानियों के मुताबिक, मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह के समय एक नए महल का निर्माण कराया जा रहा था. निर्माण के लिए लकड़ी की जरूरत थी, जिसके लिए महल से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित खेजड़ली गांव से खेजड़ी के पेड़ काटकर लकड़ी लाने का आदेश दिया गया था. इसके बाद सैनिक खेजड़ली गांव पहुंचे थे.

अमृता देवी ने पेड़ से चिपककर किया विरोध
वहीं, सैनिक जब रामू खोड़ के घर के बाहर लगे खेजड़ी के पेड़ को काटने लगे, तब उनकी पत्नी अमृता देवी ने इसका विरोध किया. अमृता देवी पेड़ से चिपक गईं और पेड़ काटने का विरोध करते हुए अपनी जान की परवाह नहीं की. ऐसे में सैनिकों ने उनको कुल्हाड़ी से काट दिया.

तीनों बेटियों ने भी दिया बलिदान
मां अमृता देवी के बलिदान के बाद उनकी तीन बेटियां आसू, रत्नी और भागू बाई भी एक-एक खेजड़ी के पेड़ से लिपट गईं. सैनिकों ने उन्हें भी पेड़ों से अलग करने के बजाय काट दिया. इस मामले की जानकारी गांव में फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग पेड़ों को बचाने के लिए उनके साथ खड़े हो गए.

363 लोगों ने पेड़ों की रक्षा में दी जान
पेड़ों की कटाई रोकने के लिए ग्रामीण एक-एक कर खेजड़ी के पेड़ों से चिपकते गए. इतिहास की कहानियों के अनुसार, सैनिकों की कार्रवाई में 71 महिलाओं और 292 पुरुषों के साथ कुल 363 लोगों की जान चली गई. यह घटना पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए बड़े सामूहिक बलिदानों में गिनी जाती है.

महाराजा ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक
जब इस घटना की जानकारी महाराजा अभय सिंह को मिली तो उन्होंने खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आदेश दिया. साथ ही बिश्नोई समाज को लिखित आश्वासन दिया गया कि मारवाड़ क्षेत्र में खेजड़ी के पेड़ नहीं काटे जाएंगे. इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में खेजड़ली में हर साल शहीदी मेले का आयोजन किया जाता है.

वन्यजीव संरक्षण में भी बिश्नोई समाज की भूमिका
बिश्नोई समाज की परंपरा में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाता है. हिरणों और अन्य वन्यजीवों की रक्षा के लिए भी समाज के लोगों द्वारा लंबे समय से प्रयास किए जाते रहे हैं. वन्यजीवों को बचाने के दौरान कई लोगों के शिकारियों की गोली का शिकार होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. 
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES