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Jodhpur News: फलोदी जिले में पिता के सामने 6 साल का बच्चा भोमाराम 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया. हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे बनाणीयो पूनिया की ढाणी में हुआ. घटना के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं.
जानकारी के अनुसार, खेत में लगा बोरवेल खराब हो गया था. उसे ठीक करने के लिए मशीन बुलवाई गई थी. बोरवेल से पाइप निकालने का काम चल रहा था. इसी दौरान बच्चा अचानक बोरवेल में गिर गया. घटना के समय उसके पिता पाचाराम भी मौके पर मौजूद थे.
620 फीट की गहराई पर बच्चे की मूवमेंट नजर आई
बच्चे को बचाने के लिए बोरवेल में कैमरा डाला गया है. कैमरे में करीब 620 फीट की गहराई पर बच्चे की मूवमेंट नजर आ रही है. एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है.
जिला कलेक्टर, SP मौके पर पहुंचे
हादसे की सूचना मिलने पर फलोदी कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और एसपी आदित्य काकड़े भी घटनास्थल पर पहुंचे. प्रशासन की निगरानी में बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं.
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
खेत पर परिवार की महिलाएं और ग्रामीण भारी संख्या में एकत्र हैं. बच्चे की मां बार-बार रोते हुए अपने बेटे का नाम पुकार रही है. जोधपुर से अतिरिक्त एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को बुलाया गया.घटना के करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर से भी एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीम बुलाई गई है.
मेडिकल टीमें मौके पर मौजूद
जिला अस्पताल से डॉक्टरों की टीम के साथ एम्बुलेंस भी मौके पर तैनात कर दी गई है ताकि बच्चे को बाहर निकालते ही तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा सके. बोरवेल की अत्यधिक गहराई होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
राजस्थान में पहले भी हो चुके हैं बोरवेल हादसे
राजस्थान में खुले बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. हर बार ऐसे हादसे खुले और असुरक्षित बोरवेलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
दौसा, दिसंबर 2024 मामला
दौसा जिले के कालीखाड़ गांव में 5 साल का आर्यन करीब 150 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था. बचाव दल ने कई दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन 11 दिसंबर 2024 को बच्चे की मौत हो गई.
बोरवेल से बच्चे को निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन

दौसा, सितंबर 2024 मामला
बांदीकुई क्षेत्र के जोधपुरिया गांव में 2 साल की नीरू करीब 600 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी. NDRF और SDRF की टीमों ने करीब 18 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था.
दौसा, सितंबर 2022 मामला
दौसा के अभानेरी गांव के पास 2 साल की अंकिता करीब 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी. बचाव दल ने विशेष उपकरण की मदद से करीब 7 घंटे बाद बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला.
कोटपूतली, दिसंबर 2024 मामला
दिसंबर 2024 में ही कोटपूतली-बहरोड़ जिले के किरतपुरा इलाके में 3 साल की चेतना चौधरी 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी. बच्ची करीब 150 फीट की गहराई पर फंसी थी. उसे बचाने के लिए NDRF, SDRF और प्रशासन की टीमों ने कई दिनों तक अभियान चलाया. खुदाई, कैमरे और दूसरे तकनीकी तरीकों की मदद ली गई. करीब 10 दिन तक चले अभियान के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी. फिलहाल ओसियां में भोमाराम को बाहर निकालने की कोशिश जारी है.
भारत में अब तक के सफल रेस्क्यू ऑपरेशंस में बच्चे आमतौर पर 30 से 150 फीट की गहराई पर फंसे थे लेकिन 640 फीट की गहराई देश के इतिहास में सबसे जटिल मामलों में से एक माना जा रहा है.
पैरेलल टनल की सीमा
50-60 फीट तक बगल में पैरेलल गड्ढा खोदकर हॉरिजॉन्टल टनल बनाई जा सकती है, लेकिन 640 फीट (लगभग 60 मंजिला इमारत जितना नीचे) पैरेलल खुदाई करने में कई दिन या हफ्ते लग सकते हैं.
नीचे फिसलने का बड़ा खतरा
बोरवेल की कुल गहराई 1050 फीट है, यानी बच्चे के नीचे अभी भी 430 फीट से अधिक खाली गड्ढा है. अगर ऊपर से डाली गई ग्रैबिंग डिवाइस, हुक या अंब्रेला-लूप मैकेनिज्म में जरा भी चूक हुई, तो बच्चे के और नीचे गिरने का खतरा बना हुआ है.
बच्चे के बचने की एकमात्र उम्मीद
अगर ऊपर से डाली गई ऑक्सीजन पाइपलाइन बच्चे के मुंह या नाक तक सीधी पहुंच रही है और रेस्क्यू टीम का स्पेशलाइज्ड मैकेनिकल लूप (रिमोट-ऑपरेटेड हुक/ग्रिपर) बच्चे को नीचे खिसकाए बिना सुरक्षित लॉक करके ऊपर खींच लें.
Report- Rakesh Kumar Bhardwaj