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Blue City Jodhpur: जोधपुर की तंग गलियों में फिर बिखरा नीला रंग,स्पेन से आए टूरिस्ट बोले-'बनना चाहिए वर्ल्ड हेरिटेज'

ब्लू सिटी के नाम से मशहूर जोधपुर की गलियां अब फिर नीली दिखने लगी है. मेहरानगढ़ किले की तलहटी में बसे भीतरी शहर की तंग गलियों को सहेजने की जिम्मेदारी यहां के युवाओं ने ली है और अभी तक 70 से ज्यादा मकान नीले हो चुके हैं.

Blue City Jodhpur: जोधपुर की तंग गलियों में फिर बिखरा नीला रंग,स्पेन से आए टूरिस्ट बोले-'बनना चाहिए वर्ल्ड हेरिटेज'
Image Credit: jodhpur blue city youth initiative heritage walk restoration tourism

जोधपुर की पहचान नीला रंग है. जो वक्त के साथ फीका पड़ने लगा है. ऐसे में स्थानीय युवाओं ने इस पुरानी पहचान को फिर से सहेजने का बीड़ा उठा लिया है. जोधपुर की ये नीली गलियां देशी ही नहीं बल्कि विदेशी सैलानियों के लिए भी किसी जादू से कम नहीं है. जोधपुर आने वाला हर सैलानी यहां फोटो क्लिक जरूर कराता है और इन यादों को हमेशा के लिए अपने कैमरे में कैद कर ले जाता है.

जोधपुर में अमेरिका, यूरोप, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की और स्पेन से ज्यादातर सैलानी आते हैं और इन पुराने मकानों और नीले रंग को निहारते हैं. 

रवि पुरोहित ,स्थानीय  कहते हैं कि - जोधपुर की पांरपरिक पहचान सूर्य नगरी और नील नगरी के रूप में है, इसे बचाने के लिए हम नील और लाइमस्टोन का इस्तेमाल करते हैं. हमारे पूर्वजों ने हमको इसके बारे में बताया था. ये रंग ना सिर्फ खूबसूरत है बल्कि गर्मी में घरों को ठंडा और ठंड में गर्म रखने में मददगार है. साथ ही मच्छर भी इस रंग के चलते दूर ही रहते हैं.अभी तक हम 70-80 घरों को रंग किया जा चुका है.

शिकागो के नहर-नेल बताते हैं कि ये शहर उन्हे बहुत सुंदर लगता है. हम दूसरे सैलानियों को भी यहां आने को कहेंगे. यहां हम बहुत कुछ सीख रहे हैं. नीले रंग को कोई इतनी खूबसूरती से कैसे दिखा सकता है  ?

वेलेंसिया स्पेन से आए पाको कहते हैं कि मैं पहले भी कई बार भारत आ चुका हूं, मैं आध्रप्रदेश तक गया हूं, जोधपुर बहुत संदुर है. इसको वर्ल्ड हैरिटेज बनाना चाहिए, इसके लिए किसकी सफाई पर ध्यान देना चाहिए और इन तंग गलियों में मोटर साइकिल नहीं चलाने देनी चाहिए ,ताकि सैलानी  बिना डर के यहां घूम सकें.यहां के लोग बहुत अच्छे हैं. हम बहुत सारी फोटो खींचते हैं उनके साथ और वो भी हमारे साथ.

जोधपुर को ब्लू सिटी क्यों कहते हैं?
मेहरानगढ़ किले से देखने पर पूरा भीतरी शहर नीला दिखायी देता है. ये नीला रंग तपती गर्मी में मकान को ठंडा रखने, दीमक से बचाने और पुराने जमाने में तो एक खास पहचान के लिए इस्तेमाल हुआ था.

जोधपुर में किस देश से सबसे ज्यादा सैलानी आते हैं ?
अमेरिका, स्पेन, तुर्की, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों से सैलानी जोधपुर की इन नीली गलियों को देखने और यहां फोटो क्लिक कराने आते हैं. जिससे होमस्टे, हैंडीक्राफ्ट, लोकल फूड कैफे और गाइड-हेरिटेज वॉक के जरिए यहां के युवाओं को रोजगार मिलता है.

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