जोधपुर में खौफ का मंजर ! एयरपोर्ट रोड पर अचानक टूटीं मधुमक्खियां, 1 की मौत, 15 को काटा
जोधपुर के पांच बत्ती चौराहे से एयरपोर्ट रोड पर जाने वाली रोड और पोलो ग्राउंड के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक एक बड़ा घोड़ा मधुमक्खियों का छत्ता गिर गया. इस भयानक हमले में 15 से 20 लोग बुरी तरह से जख्मी हुए हैं. जिनमें से एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
जोधपुर में हुए घोड़ा मक्खियों के हमले में एक शख्स की हालत अभी भी नाजुक बतायी जा रहा है. घटना की पुष्टि एयरपोर्ट एएसआई नरपतराम ने की है और इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. घोड़ा मक्खियों के हमले का एक वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
घोड़ा मक्खी क्या होती है ?
घोड़ा मक्खी (हॉर्सफ्लाई) डिप्टेरा कुल की बड़ी और आक्रामक मक्खियां होती हैं. ये इंसानों और मवेशियों (जैसे घोड़े, गाय, भैंस) का खून चूसने के लिए जानी जाती हैं. इनकी पहचान इनकी बड़ी चमकीली आंखों और तेज उड़ान से होती है. सिर्फ मादा घोड़ा मक्खी ही काटती है क्योंकि उसे अंडे विकसित करने के लिए प्रोटीन (जो खून में होता है) की जरूरत होती है.
घोड़ा मक्खी कितनी खतरनाक होती है ?
घोड़ा मक्खी का डंक बहुत मजबूत और दर्दनाक होता है, क्योंकि ये त्वचा को चीरकर खून चूसती हैं. इनके काटने से गंभीर एलर्जी, सूजन, लालिमा और तेज खुजली हो सकती है. कई मामलों में ये मक्खियां बैक्टीरिया, वायरस या परजीवियों को एक जीव से दूसरे जीव या इंसान में फैला सकती हैं, जिससे गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है. अगर किसी को एनाफिलेक्सिस जैसी प्रतिक्रिया हो जाए, तो वक्त पर इलाज ना मिलने पर ये जानलेवा भी साबित हो सकता है.
घोड़ा मक्खी कैसे पैदा होती हैं ?
इन मक्खियों का जीवन चक्र अंडे, लार्वा, प्यूपा और वयस्क मक्खी के चरणों में पूरा होता है. मादा घोड़ा मक्खी पानी के पास की नम मिट्टी, दलदली इलाकों, या पानी के पास उगने वाले पौधों की पत्तियों पर झुंड में अंडे देती है. अंडे से निकलने वाले लार्वा नम मिट्टी या सड़ते हुए जैविक कचरे में रहते हैं और छोटे कीटों को खाकर पलते हैं. अनुकूल तापमान और नमी मिलने पर ये वयस्क मक्खी के रूप में बाहर आती हैं.
घोड़ा मक्खी कैसी जगहों पर पाई जाती हैं ?
ये खासतौर पर उन जगहों पर पाई जाती हैं जहां आसपास पानी के स्रोत, तालाब, नाले, दलदल या अत्यधिक नमी हो. गोशालाओं, डेयरी फार्म्स और ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों जहां मवेशी बंधते हैं, वहां इनका प्रकोप ज्यादा होता है. पोलो ग्राउंड जैसे बड़े खुले मैदानों, घास के मैदानों और पेड़ों की घनी छांव या झाड़ियों के पास ये छिपकर ये घोड़ा मक्खी रहती हैं.