App

गांव की 'हॉकी वाली सरपंच' का कमाल: एक छोटे से 'बर्तन बैंक' ने कैसे बदला पूरे राजस्थान का बजट!

राजस्थान के झुंझुनूं की लांबी अहीर पंचायत की पूर्व सरपंच नीरू यादव के 'बर्तन बैंक' नवाचार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संवाद किया. 2022 में प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए शुरू की गई इस पहल को 2025 के बजट में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया गया. नीरू यादव ने शिक्षा, खेल, जल संरक्षण, किसान और महिला रोजगार से जुड़े अपने अन्य कार्यों की जानकारी भी दी.

गांव की 'हॉकी वाली सरपंच' का कमाल: एक छोटे से 'बर्तन बैंक' ने कैसे बदला पूरे राजस्थान का बजट!
Image Credit: Jhunjhunu News

Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले की लांबी अहीर ग्राम पंचायत का ‘बर्तन बैंक’ नवाचार अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है. प्लास्टिक कचरे पर रोक और पर्यावरण संरक्षण की सोच के साथ शुरू की गई इस कोशिश को साल 2025 के बजट में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया गया. इसी नवाचार को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लांबी अहीर की पूर्व सरपंच एवं वर्तमान प्रशासक नीरू यादव से संवाद कर इसकी शुरुआत और उद्देश्य के बारे में जानकारी ली.

लांबी अहीर ग्राम पंचायत का 'बर्तन बैंक' नवाचार अब गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश स्तर पर लागू होने वाले मॉडल में बदल चुका है. साल 2022 में शादी-ब्याह और अन्य आयोजनों में प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल को साल 2025 के बजट में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लागू करने का फैसला लिया गया.

सरपंच की सैलरी से 'हॉकी बेटियों' तक
नीरू यादव का काम सिर्फ बर्तन बैंक तक सीमित नहीं रहा. सरपंच रहते हुए उन्होंने अपने मानदेय की राशि बालिकाओं को खेल के लिए प्रोत्साहित करने में खर्च की. गांव की बेटियों को हॉकी से जोड़ने के साथ छोटे बच्चों के लिए सरकारी स्कूल में प्री-प्राइमरी कक्षा की व्यवस्था कराई गई. आसपास के करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र से जरूरतमंद बच्चों को स्कूल तक लाने-ले जाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई.

बेकार पानी से सूखे बोरवेल तक, जल संरक्षण का मॉडल
जल संरक्षण के लिए भी गांव में स्थानीय जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया गया. 'गांव का पानी गांव में ही रहे' की सोच के तहत घरों के बाथरूम और रसोई से निकलने वाले पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए सूखे बोरवेल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई. इसका उद्देश्य पानी को दोबारा जमीन में पहुंचाकर जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना था. किसानों को जोड़ने के लिए एफपीओ और सहकारी समिति के गठन के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए गए.

गांव से निकला विचार, पूरे राजस्थान तक पहुंचा
आमतौर पर पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी देखी जाती है, लेकिन लांबी अहीर का 'बर्तन बैंक' इसका अलग उदाहरण पेश करता है. स्थानीय स्तर पर शुरू किया गया एक व्यावहारिक प्रयोग पहले ग्राम पंचायत में चला और बाद में इसे प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों तक विस्तार देने का फैसला हुआ. यही वजह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद नीरू यादव से संवाद कर यह समझने की कोशिश की कि आखिर इस विचार की शुरुआत कैसे हुई और इसे जमीन पर किस तरह लागू किया गया.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और नीरू यादव के बीच संवाद

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा- नीरू जी, सबसे पहले बताइए कि ग्राम पंचायत में 'बर्तन बैंक' शुरू करने का विचार आपके मन में कैसे आया?
नीरू यादव- मुख्यमंत्री जी, साल 2022 में मैंने लांबी अहीर ग्राम पंचायत में बर्तन बैंक की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य शादी-ब्याह और अन्य आयोजनों में प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल को कम करना, प्लास्टिक कचरे पर रोक लगाना और गांव में स्वच्छता को बढ़ावा देना था.

मुख्यमंत्री: आपके इस नवाचार को प्रदेश स्तर पर भी लागू किया गया है. इसे लेकर आपका अनुभव कैसा रहा?
नीरू यादव: मुख्यमंत्री जी, यह हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है कि ग्राम पंचायत स्तर पर शुरू किए गए इस प्रयास को वर्ष 2025 के बजट में पूरे राजस्थान की ग्राम पंचायतों में लागू किया गया. इससे हमें विश्वास मिला कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं.

मुख्यमंत्री: सरपंच रहते हुए आपने बर्तन बैंक के अलावा किन क्षेत्रों में काम किया?
नीरू यादव: वर्ष 2020 में सरपंच बनने के बाद मैंने शिक्षा, खेल, जल संरक्षण, किसान और महिला रोजगार जैसे क्षेत्रों पर काम किया. हमारा प्रयास रहा कि गांव की जरूरतों के हिसाब से स्थानीय स्तर पर समाधान तैयार किए जाएं.

मुख्यमंत्री: बालिकाओं के लिए आपने क्या विशेष काम किया?
नीरू यादव: गांव की बालिकाओं को हॉकी के लिए प्रोत्साहित किया. मैंने अपने सरपंच पद के मानदेय की राशि भी बालिकाओं के खेल के लिए दान की. हमारा उद्देश्य था कि गांव की बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलें.

मुख्यमंत्री: शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रयास किए गए?
नीरू यादव: छोटे बच्चों के लिए सरकारी स्कूल में प्री-प्राइमरी स्कूल तैयार करवाया गया. इसके साथ ही आसपास के करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को स्कूल तक आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की गई.

मुख्यमंत्री: किसानों और महिलाओं के लिए आपने क्या पहल की?
नीरू यादव: किसानों को संगठित करने के लिए एफपीओ और सहकारी समिति का गठन किया गया. वहीं महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए भी कोशिश की गई, ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके.

मुख्यमंत्री: जल संरक्षण को लेकर लांबी अहीर में क्या मॉडल अपनाया गया?
नीरू यादव: हमारी सोच थी कि 'गांव का पानी गांव में ही रहे' इसी के तहत घरों के बाथरूम और रसोई से निकलने वाले पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए सूखे बोरवेल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई. इससे पानी को जमीन में पहुंचाने और जल पुनर्भरण में मदद मिल सके.

मुख्यमंत्री: आपके अनुसार ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसे नवाचारों की क्या भूमिका है?
नीरू यादव: मुख्यमंत्री जी, स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर बेहतर तरीके से निकाला जा सकता है. अगर पंचायतें अपनी जरूरतों के अनुसार छोटे-छोटे नवाचार करें और उन्हें जमीन पर लागू करें, तो उनका व्यापक असर हो सकता है. हमारे ‘बर्तन बैंक’ का प्रदेश स्तर तक पहुंचना इसका एक उदाहरण है. 
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
Read More