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जयपुर में बाइक और स्कूटर की ओवरस्पीडिंग को लेकर काटे जा रहे चालानों पर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि दोपहिया वाहन चालकों के 1,000 रुपये के चालान काटने के लिए मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 183(1)(1) का हवाला दिया जा रहा है. इस प्रावधान में हल्के मोटर वाहनों (LMV) की ओवरस्पीडिंग का जिक्र है, जबकि दोपहिया वाहन अलग श्रेणी में आते हैं. इस मामले में ट्रैफिक पुलिस की ओर से नियमों की मैपिंग और परिवहन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. मुद्दा यह है कि क्या चालान काटने के लिए संबंधित नियम का सही इस्तेमाल हो रहा है या नियमों की व्याख्या में गलती की जा रही है.
एक मोटरसाइकिल के तीन बार कटे चालान
इस मामले में मोटरसाइकिल नंबर RJ14WS9852 के तीन चालानों का उदाहरण दिया गया है. जानकारी के मुताबिक, इस वाहन के 9 अप्रैल, 20 मई और 27 मई 2026 को चालान काटे गए. तीनों बार ओवरस्पीडिंग के लिए 1,000-1,000 रुपये का चालान किया गया. प्रत्येक चालान में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183(1)(1) का हवाला देते हुए निर्धारित गति से अधिक रफ्तार से वाहन चलाने का उल्लेख किया गया. इस उदाहरण के आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि दोपहिया वाहन पर चालान काटने के लिए जिस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया, क्या वह उस श्रेणी के वाहन पर लागू होता है?
धारा 183(1) में क्या है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183(1)(1) में हल्के मोटर वाहनों की ओवरस्पीडिंग का उल्लेख है. इस श्रेणी में कार और ट्रैक्टर जैसे वाहनों का जिक्र किया गया है. इनके लिए 1,000 रुपये के चालान का प्रावधान बताया गया है. वहीं, धारा 183(1)(2) में मध्यम और भारी वाहनों की ओवरस्पीडिंग का उल्लेख है. इनके लिए 2,000 रुपये के चालान की बात कही गई है. इस मामले में सवाल यह है कि दोपहिया वाहनों की ओवरस्पीडिंग के लिए किस प्रावधान के तहत चालान किया जाना चाहिए और क्या मौजूदा व्यवस्था में संबंधित नियमों का सही वर्गीकरण किया गया है?
ट्रैफिक पुलिस की मैपिंग पर सवाल
आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की ओर से दोपहिया वाहनों के चालान में भी LMV श्रेणी का उल्लेख किया जा रहा है. जबकि खबर में दावा किया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम में दोपहिया और हल्के मोटर वाहन अलग-अलग श्रेणियां हैं. ऐसे में नियमों की मैपिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. हालांकि, इस मामले में संबंधित नियमों की आधिकारिक व्याख्या और चालान प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
परिवहन विभाग की भूमिका भी सवालों में
चालान प्रक्रिया में परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों की भूमिका को देखते हुए उसकी नियम शाखा पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद मामले में स्पष्टता नहीं दी गई है. अब मुख्य सवाल यह है कि दोपहिया वाहनों की ओवरस्पीडिंग के चालान किस नियम के तहत किए जाने चाहिए और क्या नियमों की मैपिंग में सुधार की जरूरत है. संबंधित विभाग की स्पष्ट व्याख्या से ही इस विवाद की स्थिति साफ हो सकेगी.