)
जनता को नसीहत, खुद मियां फजीहत! राजस्थान में जनता को पानी पिलाने वाला जलदाय विभाग पानी के बिलों पर जनता पर शिकंजा कसता है. नियम गिनाता है लेकिन पहले विभाग खुद के मुख्यालय की हकीकत जान ले. पानी के बकाया बिलों पर जनता के लिए रिकवरी अभियान चलाने वाले विभाग के मुख्यालय का खुद के पेयजल कनेक्शन के बिल लाखों रुपये बकाया है.
सवालो में पीएचईडी विभाग
आम जनता से पानी के बिलों की वसूली के लिए अभियान चलाने वाला जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग खुद अपने बकाया बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है. जयपुर स्थित जल भवन में चार पेयजल कनेक्शनों के बिल महीनों से बकाया हैं. मुख्यालय पर कुल 3 लाख 82 हजार रुपये का पानी का बिल बकाया है. बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख भी निकल चुकी है लेकिन जल भवन का बिल अभी तक जमा नहीं हुआ है. जयपुर में पेयजल उपभोक्ताओं के 300 करोड़ से ज्यादा के बिल बकाया है. शहर में 6 लाख पेयजल कनेक्शन है, जिसमें जलदाय मुख्यालय का भी बिल है लेकिन हैरानी की बात ये है कि जलदाय विभाग खुद ही पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा. चीफ इंजीनियर प्रशासन मुकेश बंसल का कहना है कि इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है. मैं पता करता हूं. पता करवाकर पूरे मामले में एक्शन लेता हूं.
जल भवन के चार कनेक्शन, बिल जमा नहीं
जलदाय विभाग के मुख्यालय जल भवन में चार पेयजल कनेक्शन हैं. इन सभी कनेक्शनों के बिल लंबे समय से बकाया बताए जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग खुद समय पर पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा, तो आम उपभोक्ताओं से बकाया वसूली की सख्ती किस आधार पर की जा रही है.

समय सीमा खत्म,अब पेनल्टी का सवाल
पानी के बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख निकलने के बाद अब विभाग पर पेनल्टी लगने का भी सवाल खड़ा हो गया है. आम उपभोक्ताओं से समय पर बिल जमा करवाने की अपेक्षा करने वाले विभाग को पहले अपने बकाया बिलों का भुगतान सुनिश्चित करना होगा.
जल भवन मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक इसी दफ्तर में बैठते है. चीफ इंजीनियर्स समेत जलदाय विभाग का पूरा प्रशासनिक अमला भी यहीं बैठता है. इसके बावजूद मुख्यालय के ही चार पेयजल कनेक्शनों के बिल बकाया होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है.
जनता से वसूली, खुद के बिल पर चुप्पी क्यों?
पानी के बिलों की वसूली को लेकर विभाग की सख्ती के बीच अब सवाल उठ रहा है कि जल भवन के बकाया बिलों की वसूली के लिए कौन जिम्मेदारी तय करेगा. क्या विभाग अपने ही मुख्यालय के बकाया बिल जमा करवाने के लिए भी अभियान चलाएगा या वसूली की सख्ती सिर्फ आम उपभोक्ताओं तक सीमित रहेगी?