वोट की जंग में बुजुर्गों का 'बाहुबली' अवतार : 60 पार वालों ने युवाओं को पछाड़ा, सांगानेर में रिकॉर्ड वोटिंग तो कोटखावदा रहा फिसड्डी !
जयपुर में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण ने मतदान के कई दिलचस्प रिकॉर्ड सामने रख दिए. युवाओं पर बुजुर्गों का जोश भारी पड़ा. तो कोटखावदा में महिलाओं ने पुरुषों को पछाड़ दिया. सांगानेर मतदान में अव्वल रहा, जबकि कोटखावदा सबसे पीछे. कहीं 85 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई, तो कहीं आधे मतदाता भी बूथ तक नहीं पहुंचे. तीसरे चरण में 72.85 फीसदी मतदान के साथ पहले दोनों चरणों का रिकॉर्ड टूट गया.
पंचायतीराज चुनाव के तीसरे चरण में जयपुर जिले के ग्रामीण मतदाताओं ने मतदान के प्रति उत्साह दिखाया. चाकसू, कोटखावदा, माधोराजपुरा, फागी और सांगानेर पंचायत समितियों में कुल 72.85 प्रतिशत मतदान हुआ. पांच पंचायत समितियों के 77 वार्डों में 3 लाख 74 हजार 816 मतदाताओं में से 2 लाख 73 हजार 61 ने वोट डाले. खास बात ये रही कि तीसरे चरण में मतदान का प्रतिशत पहले दोनों चरणों से अधिक रहा. पहले चरण में 68.29 प्रतिशत और दूसरे चरण में 69.41 प्रतिशत मतदान हुआ था. इस तरह पहले चरण के मुकाबले तीसरे चरण में 4.56 प्रतिशत अंक और दूसरे चरण के मुकाबले 3.44 प्रतिशत अंक अधिक मतदान हुआ. मतदान के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पंचायत समितियों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. सांगानेर पंचायत समिति 79.88 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रही, जबकि कोटखावदा में सबसे कम 63.79 प्रतिशत मतदान हुआ. दोनों के बीच 16.09 प्रतिशत अंक का अंतर रहा. माधोराजपुरा में 75.88 प्रतिशत, चाकसू में 72.99 प्रतिशत और फागी में 70.29 प्रतिशत मतदान हुआ. पांच में से तीन पंचायत समितियों में मतदान का प्रतिशत 70 से ऊपर रहा, जबकि दो पंचायत समितियों में जिले के तीसरे चरण के औसत 72.85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ.
महिलाओं से 1.69 प्रतिशत अंक आगे रहे पुरुष, कोटखावदा में उलटी तस्वीर
-तीसरे चरण में पुरुष मतदाताओं की भागीदारी महिलाओं से ज्यादा
-कुल 1 लाख 93 हजार 206 पुरुष मतदाताओं में से 1 लाख 42 हजार 332 ने वोट डाले. पुरुषों का मतदान प्रतिशत 73.67 रहा.
-1 लाख 81 हजार 609 महिला मतदाताओं में से 1 लाख 30 हजार 729 ने मतदान किया. महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.98 रहा.
-कोटखावदा पंचायत समिति में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया
-कोटखावदा में 64.59 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 63.06 रहा.
-यानी यहां महिलाएं मतदान करने में 1.53 प्रतिशत अंक आगे रहीं.
-बाकी चारों पंचायत समितियों में पुरुषों की भागीदारी महिलाओं से ज्यादा रही
-सांगानेर में पुरुषों का मतदान प्रतिशत सर्वाधिक 81.54 रहा, जबकि महिलाओं का सर्वाधिक मतदान भी सांगानेर में 78.18 प्रतिशत दर्ज किया गया
जिला परिषद में वार्ड 30 अव्वल, वार्ड 36 फिसड्डी
-जिला परिषद के 11 वार्डों के मतदान आंकड़ों में भी बड़ा अंतर सामने आया
-वार्ड संख्या 30 में सर्वाधिक 81.64 प्रतिशत मतदान हुआ. जबकि वार्ड संख्या 36 में सबसे कम 63.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
-दिलचस्प तथ्य जिला परिषद के वार्ड 37 में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया.
-यहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत 66.34 और पुरुषों का 61.67 रहा.
-यानी महिलाएं 4.67 प्रतिशत अंक आगे रहीं। शेष 10 वार्डों में पुरुषों का मतदान प्रतिशत अधिक रहा.
तीसरे चरण में जयपुर में 442 में से 57 बूथों पर 85% से ज्यादा मतदान
-तीसरे चरण में मतदान केंद्रों के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर सामने आया.
-कुल 442 मतदान केंद्रों में से 57 पर 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ.
-सबसे ज्यादा ऐसे बूथ सांगानेर में रहे, जहां 84 में से 26 बूथों पर 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ.
-माधोराजपुरा में 17, चाकसू में 8 और फागी में 6 बूथों पर 85 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई.
-इसके विपरीत 10 बूथ ऐसे रहे, जहां मतदान 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका.
-इनमें कोटखावदा और फागी के चार-चार तथा चाकसू के दो बूथ शामिल
तीसरे चरण में वोटर आईडी से ज्यादा दूसरे पहचान पत्रों का इस्तेमाल
-कुल 2 लाख 73 हजार 61 मतदाताओं में से सिर्फ 77 हजार 785 ने मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) का इस्तेमाल किया
-वहीं 1 लाख 95 हजार 276 मतदाताओं ने अन्य मान्य पहचान दस्तावेजों के जरिए वोट डाले.
-इस तरह 71.51 प्रतिशत मतदाताओं ने अन्य पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया.
मतदाता फोटो पहचान पत्र का इस्तेमाल करने वालों की हिस्सेदारी 28.49 प्रतिशत रही.
-सांगानेर में सबसे अधिक 26 हजार 499 मतदाताओं ने EPIC का उपयोग किया.
बहरहाल, पंचायत चुनाव के आंकड़ों ने लोकतंत्र की दो तस्वीरें सामने रख दीं. एक तरफ उम्र की बाधाएं तोड़कर बुजुर्ग मतदान केंद्रों तक पहुंचे. दूसरी तरफ युवा मतदाताओं की भागीदारी सवालों के घेरे में रही. कहीं महिलाओं ने बाजी मारी, तो कहीं आधे मतदाता भी घरों से नहीं निकले. सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, सवाल ये है कि जब गांव की सरकार चुनने का मौका मिलता है, तो हर वोटर बूथ तक क्यों नहीं पहुंचता ? क्योंकि लोकतंत्र की असली जीत किसी प्रत्याशी की नहीं, बल्कि हर मतदाता की भागीदारी में छिपी है.