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राजस्थान पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है. IAS शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी और वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया है. प्रशाखा माथुर पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), पुलिस कल्याण के पद पर तैनात थीं.
कौन हैं शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर ?
शिखर अग्रवाल, राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं. जो अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर कार्यरत थे और उद्योग विभाग, रीको (RIICO) के अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वहीं, प्रशाखा माथुर 1995 बैच की IPS अधिकारी हैं और राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात हैं. जो मूल रूप से राजस्थान से हीं है और उन्होंने यूपीएससी से पहले मेडिकल की पढ़ाई की थी.
क्या होता है APO ?
प्रशासनिक भाषा में APO का पूरा नाम Awaiting Posting Orders होता है, जिसका अर्थ है 'पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा'. जब किसी सरकारी अधिकारी, जैसे IAS, IPS या RAS अधिकारी को APO किया जाता है, तो इसका मतलब होता है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान पद और जिम्मेदारी से हटा दिया गया है.
APO होने के बाद अधिकारी को फिलहाल कोई नई पोस्टिंग या विभागीय जिम्मेदारी नहीं दी जाती. उन्हें कार्मिक विभाग (DOP – Department of Personnel) में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है. इसके बाद अधिकारी नई तैनाती के आदेश जारी होने तक प्रतीक्षा में रहते हैं यानी APO की स्थिति में अधिकारी के पास फिलहाल कोई नियमित पदस्थापन नहीं होता और सरकार के अगले आदेश तक वे प्रशासनिक प्रतीक्षा में रहते हैं.
आपकों बता दें कि बीते दिन IAS शिखर अग्रवाल को APO किया जा चुका है, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पद के दुरुपयोग, निजी कंपनी को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों में विस्तृत जांच की तैयारी शुरू कर दी है.
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत मामले में विस्तृत जांच की अनुमति दे दी है. ACB डीजी गोविंद गुप्ता के मुताबिक, उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गुप्त सूत्रों से प्राप्त सूचनाओं का परीक्षण करने के बाद प्राथमिक जांच दर्ज की गई. जांच एजेंसी को प्रथम दृष्टया मामले में विस्तृत पड़ताल की आवश्यकता महसूस हुई है.
'पावर कपल' पर दोहरा प्रशासनिक प्रहार : CM की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक्शन
ACB की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शिखर अग्रवाल ने उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कथित तौर पर अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया. आरोप है कि उन्होंने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ मिलीभगत कर कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में अनुचित छूट दिलवाई. इसके अलावा, आवश्यक प्रमाण पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलाकर कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप भी है. कंपनी अनंता ब्रांड के नाम से होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है.
अनंता रिसॉर्ट में विला खरीद का मामला भी जांच के दायरे में
ACB की जांच में उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में विला खरीद का मामला भी सामने आया था. आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने अपने और परिजनों के नाम पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर विला खरीदे. उदयपुर के बुझड़ा रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई थी.
प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई थी. वहीं, अलवर के अजबगढ़ रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 8-8 विला, दोनों बेटों के नाम पर 4 विला और सास-ससुर के नाम पर 4 विला खरीदे जाने की बात सामने आई. यहां विला की कीमत करीब 15 से 16.5 लाख रुपये के बीच बताई गई है.
27 मार्च को आर्थिक पैकेज और 20 विला की रजिस्ट्री
इस पूरे मामले में 27 मार्च 2026 की तारीख भी जांच एजेंसी के लिए अहम मानी जा रही है. ACB के अनुसार, इसी दिन वित्त विभाग की ओर से गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया गया था. वहीं, इसी तारीख को शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री करवाए जाने की जानकारी भी सामने आई. ACB अब दोनों घटनाक्रमों के बीच संभावित संबंधों की जांच करेगी.
सरकारी खजाने को नुकसान और आय से अधिक संपत्ति के आरोप
ACB को प्रारंभिक जांच में आशंका है कि निजी कंपनी को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ हो सकता है. इसके साथ ही शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर कथित आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के पहलू की भी पड़ताल की जाएगी.
धारा 17-A के तहत सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब ACB शिखर अग्रवाल, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी. इसमें रिसॉर्ट निर्माण की मंजूरियों, सरकारी रियायतों, आर्थिक पैकेज, विला की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री और संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी. जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.