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Jaipur Mayor Election: राजस्थान के जयपुर को करीब 11 महीने के इंतजार के बाद कल शुक्रवार को नया मेयर मिल जाएगा. पिछले नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद शहर की कमान प्रशासकीय व्यवस्था के हाथ में थी. इस बीच जयपुर के दो नगर निगमों को खत्म कर फिर एक नगर निगम बनाया गया. परिसीमन हुआ, चुनाव हुए और 150 पार्षद चुनकर आए. अब यही पार्षद कल एकीकृत नगर निगम जयपुर का नया मेयर चुनेंगे.
मुकाबला भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता मावर के बीच है. आंकड़ों में भाजपा 78 पार्षदों के साथ बहुमत के 76 के जादुई आंकड़े से आगे है, लेकिन गुप्त मतदान ने सियासी रोमांच बनाए रखा है. कांग्रेस के पास 57 और 15 निर्दलीय हैं. कल सिर्फ मेयर की कुर्सी का फैसला नहीं होगा. यह भी साफ होगा कि सदन का गणित मतपेटी में जस का तस रहता है या कोई नया सियासी समीकरण सामने आता है.
कल तय होगा शहर की सरकार का नया मुखिया
दो नगर निगमों में बंटे जयपुर के फिर से एक होने के बाद शहर की सरकार का नया मुखिया तय हो जाएगा. एकीकृत नगर निगम जयपुर के 150 निर्वाचित पार्षद कल मेयर चुनेंगे. मेयर पद के लिए मुकाबला भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता मावर के बीच सीधा है. रिटर्निंग अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि नगर निगम सभासद भवन में कल सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा और इसके तत्काल बाद मतगणना शुरू हो जाएगी.
कागज पर भाजपा का गणित साफ
कागज पर देखें तो भाजपा का गणित साफ है. 150 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 76 वोट चाहिए. भाजपा के अपने 78 पार्षद हैं, यानी जरूरी आंकड़े से दो ज्यादा. कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय हैं. इस हिसाब से कांग्रेस और सभी निर्दलीय एक साथ भी आएं तो संख्या 72 तक ही पहुंचती है. यानी कांग्रेस प्रत्याशी को बहुमत तक पहुंचने के लिए इसके बाद भी कम से कम 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, लेकिन मेयर का चुनाव सिर्फ सदन के अंकगणित तक सीमित नहीं है.
गुप्त मतदान ने मुकाबले को राजनीतिक रणनीति की परीक्षा बना दिया है. भाजपा के लिए सवाल यह है कि क्या वह अपने 78 पार्षदों के संख्याबल को उतने ही मजबूती से मतपेटी तक पहुंचा पाती है. वहीं कांग्रेस की उम्मीद निर्दलीयों के समर्थन के साथ भाजपा खेमे से संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिकी है. कांग्रेस की ओर से भाजपा के कुछ पार्षदों के संपर्क में होने का दावा भी किया गया है.
भाजपा ने चुनाव से पहले पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति बनाई
भाजपा के पास अपने बूते मेयर बनाने लायक संख्या होने के बावजूद पार्टी ने चुनाव से पहले पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई. यही इस चुनाव का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू है. पार्टी कोई ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहती, जिससे गुप्त मतदान में उसका तय गणित बदल जाए. कांग्रेस के लिए ठीक उलटा लक्ष्य है. अपने 57 वोटों को सुरक्षित रखते हुए निर्दलीयों और संभावित क्रॉस वोटिंग से संख्या बढ़ाना. इसलिए कल नतीजा केवल यह नहीं बताएगा कि मेयर कौन बना, बल्कि यह भी बताएगा कि दोनों पार्टियां अपने घोषित संख्याबल को वास्तविक वोटों में कितना बदल पाईं.
78-57-15 का गणित मतपेटी से किस रूप में निकलेगा बाहर
गौरतलब है कि भाजपा ने वार्ड-112 से निर्वाचित सुनील कोठारी को प्रत्याशी बनाया है. कोठारी लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष सहित विभिन्न संगठन जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. हाल ही के निगम चुनाव में उन्होंने वार्ड-112 से जीत दर्ज की. उनकी उम्मीदवारी को संगठनात्मक अनुभव के साथ शहर के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. उधर कांग्रेस ने वार्ड-118 से निर्वाचित सुनीता मावर को मैदान में उतारा है.
बहरहाल, शहर एक हुआ तो सत्ता का केंद्र भी एक हो गया. अब कल 150 पार्षद सिर्फ मेयर नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि सदन में दिखाई दे रहा 78-57-15 का गणित मतपेटी से किस रूप में बाहर निकलता है. भाजपा के सामने अपने बहुमत को वोट में बदलने की परीक्षा है, जबकि कांग्रेस के सामने अपने घोषित संख्याबल से आगे समर्थन जुटाने की चुनौती.