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78 का आंकड़ा दोनों बार पहुंचा 89 पर: जानें आखिर क्या है ये जयपुर मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव में 89 वोटों का खेल?

जयपुर नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में 89 वोट का आंकड़ा लगातार दूसरे दिन सामने आया. शुक्रवार यानी 25 सितंबर को सुनील कोठारी को मेयर चुनाव में 89 वोट मिले और शनिवार को सरोज कंवर भी 89 वोट लेकर डिप्टी मेयर चुनी गईं. 150 सदस्यीय सदन में भाजपा के 78 पार्षद होने के बावजूद दोनों प्रत्याशियों ने 89 वोट हासिल किए.

Written By Deepak Goyal
Published: Sep 26, 2026, 08:46 PM IST | Updated: Sep 26, 2026, 08:58 PM IST
Image Credit: Jaipur Mayor and Deputy Mayor Chunav 2026
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JaipurDeputy and Deputy Mayor Chunav 2026: 11 महीने का इंतजार खत्म, अफसरों की सरकार खत्म और अब जयपुर नगर निगम में फिर जनप्रतिनिधियों का राज लौट आया है. पहले शहर ने 150 पार्षद चुने, फिर मेयर की कुर्सी पर सुनील कोठारी बैठे और अब डिप्टी मेयर की कुर्सी पर सरोज कंवर. 

खास बात ये कि जयपुर के निगम इतिहास में पहली बार डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कोई महिला बैठी है लेकिन इस चुनाव की कहानी सिर्फ जीत की नहीं, 89 के उस आंकड़े की भी है, जो लगातार दूसरे दिन भाजपा के साथ रहा.

89 वोट पर टिका भाजपा का आंकड़ा 
भाजपा के अपने पार्षद 78 हैं लेकिन मेयर को भी 89 वोट मिले और डिप्टी मेयर को भी 89 वोट. सुबह सरोज कंवर के नाम को लेकर भाजपा खेमे में विरोध की चर्चा थी लेकिन वोटिंग तक पार्टी ने अपना गणित संभाल लिया और इधर आखिरी वोट पड़ते ही 12 सितंबर से चली आ रही पार्षदों की बाड़ाबंदी भी खत्म हो गई यानी अब किलेबंदी से निकलकर निगम की नई सरकार के सामने शहर संभालने की बारी है.

11 महीने बाद निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हाथ कमान
जयपुर नगर निगम शहरी सरकार में करीब 11 महीने बाद कमान फिर अफसरों से निकलकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हाथ में आ गई है. पहले 150 वार्डों के पार्षद चुने गए, शुक्रवार को भाजपा सुनील कोठारी मेयर बने और शनिवार को भाजपा की सरोज कंवर के डिप्टी मेयर चुने जाने के साथ नई शहरी सरकार की तस्वीर पूरी हो गई.

सरोज कंवर ने 31 वोट से जीता चुनाव
खास बात यह है कि निगम के इतिहास में पहली बार किसी महिला को डिप्टी मेयर की कुर्सी मिली है. डिप्टी मेयर चुनाव में भाजपा की सरोज कंवर को 89 और कांग्रेस के सलमान मंसूरी को 58 वोट मिले. सरोज ने 31 वोट से चुनाव जीता. 150 सदस्यीय सदन में 149 पार्षदों ने मतदान किया. इनमें एक वोट NOTA में गया और एक वोट खारिज हुआ. एक कांग्रेस की वार्ड नंबर 18 से पार्षद वंदिता शर्मा मतदान करने नहीं पहुंची.

पहली पारी में ही डिप्टी मेयर बनीं सरोज
सरोज कंवर वार्ड-90 से पहली बार पार्षद चुनी गई हैं और अपनी पहली ही पारी में डिप्टी मेयर की कुर्सी तक पहुंच गईं. इन दो चुनावों का सबसे दिलचस्प पहलू भाजपा का वोट मैनेजमेंट रहा.

78 पार्षदों के बावजूद 89 वोट
150 सदस्यीय निगम में भाजपा के अपने 78 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय हैं. इसके बावजूद शुक्रवार के मेयर चुनाव में भाजपा के सुनील कोठारी को 89 वोट मिले. कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 और एक वोट NOTA में गया था. शनिवार को प्रत्याशी बदला, मुकाबला बदला, लेकिन भाजपा का आंकड़ा नहीं बदला. भाजपा की डिप्टी मेयर प्रत्याशी सरोज कंवर को भी ठीक 89 वोट मिले.

लगातार दूसरे दिन 11 अतिरिक्त वोट
भाजपा अपने 78 पार्षदों से 11 ज्यादा वोट जुटाने में लगातार दूसरे दिन सफल रही. भाजपा की सरोज कंवर की जीत ने निगम के इतिहास में नया रिकॉर्ड भी जोड़ दिया.

पहली बार पार्षद बनीं, अब पहली महिला डिप्टी मेयर
वार्ड-90 से पहली बार चुनाव जीतकर निगम पहुंचीं सरोज अब जयपुर की पहली महिला डिप्टी मेयर हैं. सरोज कंवर भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री रणजीत सिंह सोडाला की पत्नी हैं. पार्टी ने उनके जरिए ओबीसी महिला चेहरे को निगम के दूसरे सबसे बड़े निर्वाचित पद पर मौका दिया है.

गणेश मंदिर में दर्शन के बाद संभाली कुर्सी
जीत के बाद सरोज कंवर ने भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया और शाम 6:18 बजे शुभ मुहूर्त में डिप्टी मेयर की कुर्सी संभाली. इस दौरान सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ, मेयर सुनील कोठारी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पूर्व मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर सहित भाजपा के कई नेता मौजूद रहे.

अब चुनावी गणित से शहर के कामकाज पर फोकस
मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव पूरा होने के साथ ही निगम में राजनीतिक सत्ता का ढांचा तैयार हो गया है. भाजपा के सुनील कोठारी मेयर और सरोज कंवर डिप्टी मेयर हैं. अब तक पूरा फोकस पार्षद चुनाव, बहुमत, निर्दलीयों के रुख, बाड़ाबंदी और मेयर-डिप्टी मेयर के वोटों पर था. अब नई शहरी सरकार के सामने असली परीक्षा शहर के कामकाज की होगी.

सरोज के नाम पर विरोध की चर्चा के बीच भाजपा की कवायद
भाजपा की ओर से सरोज कंवर का नाम सामने आने के बाद भाजपा खेमे में असंतोष और विरोध की चर्चा भी सामने आई थी. ऐसे में भाजपा के लिए चुनौती सिर्फ डिप्टी मेयर बनाना नहीं, बल्कि अपने वोटों को बिखरने से रोकना की भी थी. नामांकन के तुरंत बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड पार्षदों के बीच बाडाबंदी में पहुंचे और समझाइश की.

समझाइश के बाद भी 89 वोट बरकरार
वहीं, समझाइश का असर यह रहा की नतीजे में सरोज कंवर को वही 89 वोट मिले, जितने एक दिन पहले मेयर सुनील कोठारी को मिले थे. इससे इतना साफ है कि प्रत्याशी चयन को लेकर उठी शुरुआती हलचल के बावजूद भाजपा अपने मेयर चुनाव वाले वोट आंकड़े को डिप्टी मेयर चुनाव में भी बरकरार रखने में सफल रही.

कांग्रेस के वोटों में भी आया अंतर 
दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए दोनों चुनावों के वोटों में अंतर भी गौर करने वाला रहा. मेयर चुनाव में सुनीता मावर को 60 वोट मिले थे, जबकि डिप्टी मेयर प्रत्याशी सलमान मंसूरी को 58 वोट मिले. मेयर चुनाव में सभी 150 पार्षदों ने मतदान किया था और एक वोट NOTA में गया था. डिप्टी मेयर चुनाव में 149 वोट पड़े, जिनमें एक NOTA और एक वोट खारिज हुआ. इस तरह मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव ने निगम के भीतर दलों के घोषित संख्या बल से अलग मतदान का गणित भी सामने रखा है. डिप्टी मेयर चुनाव के साथ भाजपा पार्षदों की लंबी बाड़ाबंदी भी खत्म हो गई.

दो हफ्ते बाद खत्म हुई पार्षदों की बाड़ाबंदी
डिप्टी मेयर चुनाव के साथ भाजपा पार्षदों की लंबी बाड़ाबंदी भी खत्म हो गई. 12 सितंबर से साथ रखे गए पार्षद मतदान पूरा होते ही निगम मुख्यालय से अपने घरों के लिए रवाना होने लगे.

पार्षदों को लौटे मोबाइल, परिवार से मिले
कई पार्षदों के परिजन उन्हें लेने निगम मुख्यालय पहुंचे. मतदान के बाद पार्षदों को उनके मोबाइल भी वापस मिले. कोई सामान और बैग लेकर बाहर निकला तो कोई लंबे समय बाद परिवार से मिलकर घर रवाना हुआ. करीब दो सप्ताह तक चुनावी रणनीति और वोटों को एकजुट रखने के लिए चली किलेबंदी का आखिरी अध्याय डिप्टी मेयर के लिए वोट पड़ते ही खत्म हो गया.

अब सफाई से लेकर वित्तीय व्यवस्था तक बड़ी जिम्मेदारी
बहरहाल, नई व्यवस्था में निर्वाचित बोर्ड को सफाई, सीवरेज, सड़क, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, फायर सेफ्टी और निगम की वित्तीय स्थिति जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर प्रशासनिक मशीनरी के साथ काम करना होगा. निगम में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अफसरों के हाथ में रही कमान अब निर्वाचित बोर्ड के पास है, भाजपा के पास मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पद हैं और बाड़ाबंदी से निकले पार्षद अब चुनावी गणित से निकलकर शहर के कामकाज की तरफ लौटेंगे.

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