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इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं से की सनातन संस्कृति से जुड़ने की अपील: बोले- कोरोना ने समझाया दवा के साथ दुआ का महत्व

Sikar News: सीकर में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं से अपनी जीवनशैली और जिम्मेदारियों को मिभाते हुए भगवान की भक्ति, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिकता से जुड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि भक्ति जीवन में सकारात्मकता और मानसिकता संबल दे सकती है.

Written By Aman Singh
Published: Oct 04, 2026, 02:50 PM IST | Updated: Oct 04, 2026, 02:52 PM IST
Image Credit: Zee Media
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Sikar News: राजस्थान के सीकर शहर के सालासर रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं को सनातन संस्कृति, भगवान की भक्ति और आध्यात्मिकता से जोड़ने पर जोर दिया. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को अपनी वर्तमान जीवनशैली और जिम्मेदारियों को छोड़े बिना भगवान के नाम, भगवत् भक्ति और सनातन संस्कृति से जुड़ना चाहिए. इससे जीवन में आने वाली असफलताओं के कारण उत्पन्न तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याओं से राहत पाने में मदद मिल सकती है.

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता व्यक्ति को मानसिक संबल प्रदान करती है. कोरोना काल के बाद धार्मिक आस्था बढ़ाने के सवाल पर बोलते हुए इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि कोरोना काल ने दवा के साथ दुआ का महत्व भी समझाया है. उन्होंने गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की भी मांग उठाई. इसके साथ ही देश में यूसीसी के सवाल पर बोलते हुए इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि वह संतों और वरिष्ठजनों के निर्णय का समर्थन करते हैं.

पिताजी और गुरुदेव की कृपा से मिला भक्ति मार्ग

इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि पूज्य गुरुदेव और पिताजी महाराज की कृपा से ही वे भक्ति के इस मार्ग पर आगे बढ़ पाए हैं. उनके पिताजी को कथा करते हुए 53 वर्ष हो चुके हैं. उन्हीं के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को भक्ति मार्ग से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि भारत का युवा अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को समझे तथा भगवान की भक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाए.

कोरोना काल ने समझाया दवा के साथ दुआ का महत्व

कोरोना काल के बाद युवाओं में बढ़ती धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने जीवन की वास्तविकता को करीब से महसूस किया. उस समय बड़े-बड़े धनवान लोगों ने डॉक्टरों से करोड़ों-अरबों रुपये लेने की बात कहते हुए अपने परिजनों को बचाने की गुहार लगाई, लेकिन कई परिस्थितियों में डॉक्टर भी बेबस नजर आए. उस दौर ने लोगों को यह एहसास कराया कि जीवन में दवा के साथ दुआ का भी अपना महत्व है. जब सभी रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब लोगों ने भगवान के नाम और आध्यात्मिकता में सहारा तलाशा. उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद युवाओं का धर्म और आध्यात्मिकता के प्रति जुड़ाव इस अनुभव से भी प्रभावित हुआ है.

गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की अपील

गौ सम्मान अभियान को लेकर इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि देश के सभी संत एकजुट होकर प्रेमपूर्वक गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की याचना कर रहे हैं. यह अभियान किसी धरना-प्रदर्शन के माध्यम से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से चलाया जा रहा है. गौ माता को केवल जीव-जंतु या जानवर के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था में उनके विशेष स्थान के अनुरूप सम्मान दिया जाना चाहिए.

जाति और पीढ़ियों के भेद से ऊपर मानवता को दें प्राथमिकता

समाज में जातिगत विभाजन और आधुनिक पीढ़ियों के वर्गीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि आज समाज में जातियों के अलावा मिलेनियल्स, जनरेशन GEN-जी और जनरेशन अल्फा जैसी अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा रही हैं. इस तरह के विभाजनों से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है. समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का भाव होना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति को मानवता के आधार पर देखना चाहिए.

यूसीसी पर संतों और वरिष्ठजनों के निर्णय का समर्थन

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर पूछे गए सवाल पर इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि इस विषय में पूज्य संतजन और वरिष्ठजन जैसा मार्गदर्शन और आज्ञा देंगे, उसी के अनुरूप होना चाहिए. इंद्रेश उपाध्याय ने बातचीत के दौरान युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने, समाज में मानवता और सद्भाव को बढ़ावा देने तथा गौ माता के सम्मान जैसे विषयों पर अपने विचार रखे. उन्होंने भक्ति को जीवन में सकारात्मकता और मानसिक संबल का माध्यम बताते हुए सनातन संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया.

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जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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