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राजस्थान में बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत: अब घर बैठे मिलेगी देखभाल, 3 लाख से ज्यादा को फायदा

Rajasthan News: राजस्थान में गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को घर पर ही उपचार, दवाइयां, फिजियोथेरेपी और मानसिक सहयोग मिल रहा है. अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक पेलिएटिव केयर ओपीडी में 2.51 लाख मरीजों को सेवाएं मिलीं, जबकि 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड केयर दी गई.

Reported By Babulal Dhayal Edited By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 09, 2026, 03:55 PM IST | Updated: Oct 09, 2026, 03:58 PM IST
Image Credit: Rajasthan Palliative Healthcare (AI IMAGE)
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Free Healthcare: राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सेवा ही संकल्प’ के विजन को धरातल पर साकार कर रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, बल्कि मानवीय एवं संवेदनशील पहल के तहत गंभीर एवं असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों को घर बैठे उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है. गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों, बेड-रिडन बुजुर्गों और ऐसे रोगियों, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना कठिन है, उनके लिए होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है. इस पहल से करीब सवा साल के समय में ही तीन लाख से अधिक रोगियों को लाभान्वित किया गया है.

इसी सोच के तहत कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर सहित अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक पेलिएटिव केयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

’2.51 लाख मरीजों को ओपीडी एवं 41 हजार को आईपीडी में सेवाएं’
राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी न उठानी पड़े. जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवा मरीज के घर तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को व्यापक रूप दिया जा रहा है. पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत राज्य में 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों एवं सेटेलाइट चिकित्सालयों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए जा चुके हैं. बड़ी संख्या में रोगियों को इनका लाभ मिल रहा है. अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक पेलिएटिव केयर ओपीडी में करीब 2 लाख 51 हजार मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं. इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार एवं देखभाल प्रदान की गई. विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को मरीजों तक पहुंचाने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गंभीर रोगियों को आवश्यक विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती.

’4 माह में 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर’
राज्य सरकार बुजुर्गों को परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर मानते हुए उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दे रही है. इसी भावना के अनुरूप जुलाई 2025 से प्रदेश में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को उनके घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. घर पर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां तथा मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परामर्श शामिल हैं. इससे मरीजों को अस्पताल आने-जाने की कठिनाई से राहत मिल रही है और परिवार के सदस्यों को भी अपने प्रियजनों की देखभाल में आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्राप्त हो रहा है. होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त माह तक करीब 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान की जा चुकी है. इनमें करीब 20 हजार बुजुर्ग मरीज शामिल हैं.

’मरीजों के द्वार ‘राहत की किरण’’
मुख्यमंत्री की पहल पर स्वास्थ्य सेवा को मरीज के करीब ले जाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन के माध्यम से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को और प्रभावी बनाया है. इस वाहन में आवश्यक दवाइयों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर पहुंचते हैं. टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं. टीम द्वारा घर पर ही मरीज को आवश्यक पेलिएटिव केयर प्रदान की जाती है. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.

’57 हजार केयर गिवर्स प्रशिक्षित, एएनएम, आशा एवं सीएचओ को भी प्रशिक्षण’
सरकार ने केवल सेवा का विस्तार ही नहीं किया है, बल्कि इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया है. अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है. इसके अलावा 10 हजार एएनएम, 21 हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार सीएचओ को भी होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षण दिया गया है. चरणबद्ध रूप से सभी आशा, एएनएम और सीएचओ को प्रशिक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इस संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचाया जा सके.

’बड़े अस्पतालों से गांव के स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार’
राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है. सरकार का संकल्प है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उसकी स्थिति के अनुरूप समय पर उपचार, राहत और देखभाल मिले तथा उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो.

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About the Author

बाबूलाल धायल ज़ी राजस्थान में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं. पिछले 25 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और सीएमओ और मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों की खबरें प्रमुखता से कवर करते हैं. पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में उनकी मजबूत पहचान है और वे बीजेपी - कांग्रेस दोनों से जुड़ी खबरों को कवर करते रहे हैं. विधानसभा, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों और ग्रामीण विषयों पर उनकी पकड़ खास मानी जाती है. बाबूलाल धायल,  राजस्थान पत्रिका, ईटीवी और न्यूज़18 जैसे संस्थानों में भी कार्य कर चुके हैं.
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