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Rajasthan News: हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली का बलिदान दिवस बुधवार को सीकर शहर के जयपुर रोड स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रावणा राजपूत समाज सहित सर्व समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया. शहीद स्मारक पर मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा के सामने कैंडल जलाकर और पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम के दौरान गुब्बारे छोड़कर शांति का संदेश भी दिया गया. इस दौरान भारत माता की जय और ‘हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह अमर रहें’ के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा.
मेजर दलपत सिंह की वीरता को किया याद
कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा की लड़ाई में भारतीय सैनिकों की भूमिका और मेजर दलपत सिंह देवली के नेतृत्व को याद किया. डॉ. बलवंत सिंह चिराना ने कहा कि मेजर दलपत सिंह ने हाइफा की लड़ाई में अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था. उनके नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद युद्ध में बहादुरी दिखाई और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने कहा कि मेजर दलपत सिंह की शौर्यगाथा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, नेतृत्व और देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा भी है. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मेजर दलपत सिंह के बलिदान को याद करते हुए उनकी वीरता को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया.
23 सितंबर को याद की जाती है शहादत
वक्ताओं ने बताया कि 23 सितंबर का दिन मेजर दलपत सिंह की शहादत और हाइफा की ऐतिहासिक लड़ाई की याद से जुड़ा है. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1918 को हाइफा में भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लिया था. जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद रियासतों के भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने इस लड़ाई में अपनी वीरता का परिचय दिया था. बताया गया कि भारतीय सैनिकों ने तलवार और भालों के साथ युद्ध में हिस्सा लेते हुए तुर्की और जर्मन सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी और हाइफा शहर को मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
इसी लड़ाई के दौरान मेजर दलपत सिंह देवली ने असाधारण वीरता का परिचय दिया और शहीद हो गए. उनकी वीरता के कारण उन्हें ‘हाइफा हीरो’ के नाम से याद किया जाता है. उनकी शौर्यगाथा भारत के साथ-साथ इजराइल में भी सम्मान के साथ याद की जाती है.
युवाओं से वीरों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि देश के वीरों और शहीदों की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है. मेजर दलपत सिंह का जीवन युवाओं को साहस, नेतृत्व, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है. युवाओं को इतिहास के ऐसे वीर योद्धाओं के जीवन और बलिदान के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए.
वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि भारतीय सैनिकों ने अलग-अलग युद्धों में किस तरह साहस और वीरता का परिचय दिया. हाइफा की लड़ाई में भारतीय सैनिकों की भूमिका भी इसी सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
सर्व समाज ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में रावणा राजपूत समाज के साथ सर्व समाज के लोग और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे. लोगों ने मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कैंडल जलाकर उनके बलिदान को नमन किया. गुब्बारे छोड़कर शांति का संदेश दिया गया. उपस्थित लोगों ने मेजर दलपत सिंह की शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया.
कार्यक्रम में डॉ. बलवंत सिंह चिराना, शंकर सिंह उग्रावत, हनुमान सिंह पालवास, जगदेव सिंह पंवार, नरेंद्र सिंह सोलंकी, इंद्रसिंह, राजेश शेखावत, रणजीत सिंह चिडासरा, सज्जन सिंह निर्वाण, राजेंद्र सिंह कच्छावा, अजयपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. सभी ने मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनकी वीरता को नमन किया.