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पहले कुर्सी छोड़ो फिर चुनाव लड़ो: पंचायत चुनाव में 10,290 प्रशासकों के लिए बड़ा नियम, नामांकन से पहले इस्तीफा मंजूर होना जरूरी

Rajasthan Panchayat Chunav: राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच 10 हजार 290 ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के लिए चुनाव लड़ने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो रही है. प्रशासक पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. चुनाव मैदान में उतरने से पहले प्रशासकों को पहले इस्तीफा देना होगा और नामांकन पत्रों की संवीक्षा से पहले इस्तीफा स्वीकार होना जरूरी है.

Reported By Deepak Goyal Written By Aman Singh
Published: Sep 30, 2026, 05:36 PM IST | Updated: Sep 30, 2026, 05:40 PM IST
Image Credit: Zee Media
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Rajasthan Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव लड़ना है, तो पहले कुर्सी छोड़नी होगी. प्रदेश की 10 हजार 290 ग्राम पंचायतों में लगे प्रशासकों के लिए चुनावी मैदान का रास्ता उनके मौजूदा पद से होकर निकलेगा. यानी प्रशासक रहते नामांकन नहीं किया जा सकेगा. चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रशासकों पहले इस्तीफा देना होगा और उसके स्वीकार होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता साफ होगा.

हालांकि, असली पेंच इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर है. अगर प्रशासक एक-एक कर इस्तीफा देते हैं, तो पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है. ऐसे में सरकार के स्तर पर इस बात पर मंथन चल रहा है कि पंचायत चुनाव से पहले सभी प्रशासकों को हटाया जाए या ग्राम पंचायतों में कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए. पंचायत चुनाव की तारीखों से पहले अब प्रदेश की 10 हजार 290 ग्राम पंचायतों की मौजूदा प्रशासकीय व्यवस्था पर फैसले का इंतजार है.

निवर्तमान सरपंचों के सामने दो विकल्प

प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच ग्राम पंचायतों में लगाए गए प्रशासकों (निवर्तमान सरपंच) के सामने अब 'कुर्सी या चुनाव' दोनों में से एक चुनने की स्थिति होगी. प्रशासक पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता नहीं खुलेगा. चुनाव मैदान में उतरने के इच्छुक प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) को पहले पद से त्यागपत्र देना होगा और सिर्फ इस्तीफा सौंपना पर्याप्त नहीं होगा.

नामांकन की संवीक्षा से पहले इस्तीफा मंजूर होना जरूरी

नामांकन पत्रों की संवीक्षा की तारीख से पहले त्यागपत्र स्वीकार होकर पदमुक्त होना भी जरूरी होगा. चुनाव संबंधी पूर्व मार्गदर्शन में भी संवीक्षा से पहले त्यागपत्र स्वीकार होने की शर्त सामने आई है. इस व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यही है. यदि कोई प्रशासक चुनाव लड़ने के लिए त्यागपत्र देता है, लेकिन नामांकन की जांच तक उसका त्यागपत्र स्वीकार नहीं होता और वह पदमुक्त नहीं होता है, तो उसकी चुनावी पात्रता पर सवाल खड़ा हो सकता है. इसलिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रशासकों को नामांकन के अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय त्यागपत्र स्वीकार कराने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी.

चुनाव की तैयारियों के बीच बढ़ी हलचल

प्रदेश की 10,290 ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त हैं. पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और समय पर चुनाव नहीं हो पाने के कारण प्रशासकीय व्यवस्था की गई थी. पंचायती राज अधिनियम की धारा 95 के तहत कार्यकाल पूरा करने वाली पंचायतों में प्रशासक लगाने के आदेश जारी किए गए थे, हालांकि प्रशासकों के लिए राहत यह है कि स्वेच्छा से इस्तीफा देने के मामलों को लेकर सरकार पहले ही प्रक्रिया स्पष्ट कर चुकी है.

31 अगस्त 2026 के विभागीय आदेश के अनुसार प्रशासक के स्वैच्छिक इस्तीफे के मामलों में संबंधित जिला कलेक्टर त्यागपत्र स्वीकार कर पदमुक्त करने का आदेश अपने स्तर पर जारी कर सकता है. अब सरकार के स्तर पर ग्राम पंचायतों में लगी मौजूदा प्रशासकीय व्यवस्था को लेकर भी मंथन चल रहा है.

चुनाव लड़ने वालों को छोड़नी होगी कुर्सी

बहरहाल पंचायत चुनाव नजदीक आने के साथ सवाल यह है कि प्रशासकों को एक साथ हटाया जाएगा या चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी. इस पर अंतिम फैसले का इंतजार है. प्रशासकों में ऐसे पूर्व जनप्रतिनिधि भी हो सकते हैं, जो फिर चुनाव मैदान में उतरना चाहते हों. ऐसे लोगों के लिए चुनावी तैयारी का पहला कदम प्रचार नहीं, बल्कि प्रशासक की कुर्सी छोड़ना होगा. साफ शब्दों में पहले पद से मुक्ति, उसके बाद ही चुनावी मैदान में एंट्री होगी.

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