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रील देखकर जयपुर पहुंचे देशभर के कुंवारे: बप्पा की मेहंदी के लिए रात से लगी कतार

Moti Dungri Ganesh Temple: मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारे की मेहंदी लेने के लिए देशभर से श्रद्धालु जयपुर पहुंचे. सोशल मीडिया पर वायरल रीलों के बाद शादी की आस में बड़ी संख्या में कुंवारे युवक-युवतियां और उनके परिजन रात से ही कतार में लग गए. भीड़ बढ़ने पर मेहंदी वितरण शाम 7:30 बजे की जगह करीब 5 बजे शुरू करना पड़ा.

रील देखकर जयपुर पहुंचे देशभर के कुंवारे: बप्पा की मेहंदी के लिए रात से लगी कतार
Image Credit: Moti Dungri Ganesh Temple

Ganesh Chaturthi: जयपुर में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारे की मेहंदी लेने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. सोशल मीडिया पर वायरल रीलों के बाद देशभर से लोग जयपुर पहुंचे. दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों से कुंवारे युवक-युवतियां और उनके परिजन मंदिर पहुंचे. शादी की आस में कई श्रद्धालु शनिवार रात से ही मंदिर के बाहर कतार में लग गए.

रात से लगी कतार, दिन चढ़ने के साथ बढ़ती गई भीड़

सुबह होते-होते मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की कतार लंबी होती चली गई. तख्तेशाही रोड से जेएलएन मार्ग तक लोगों की भीड़ नजर आई. कई श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर मोतीडूंगरी गणेशजी की सिंजारे की मेहंदी से जुड़ी रील देखने के बाद जयपुर आने का फैसला किया. कोई अपने लिए मेहंदी लेने पहुंचा तो कोई बेटे-बेटी, भाई या बहन के विवाह की कामना लेकर कतार में लगा.

भीड़ बढ़ने के बाद कई जगह धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी. गर्मी और भीड़ के बीच महाराष्ट्र से आई एक महिला की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई. पानी पिलाने के बाद उसे अस्पताल भेजा गया.

3500 किलो मेहंदी, फिर भी कम पड़ी

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत पं. कैलाश शर्मा के मुताबिक, सिंजारा पूजन के बाद शाम करीब 7:30 बजे मेहंदी का प्रसाद वितरित किया जाना था. लेकिन देर रात से जुट रही भीड़ और लगातार बढ़ते श्रद्धालुओं को देखते हुए वितरण करीब ढाई घंटे पहले शाम 5 बजे ही शुरू कर दिया गया. इस बार सोजत से करीब 3500 किलो मेहंदी मंगवाई गई थी. पहले गणेशजी का मेहंदी पूजन हुआ और इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में मेहंदी वितरित की गई.

सवा किलो से शुरू हुई परंपरा बनी मेहंदी उत्सव

मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार सिंजारे की मेहंदी की यह परंपरा करीब दो शताब्दी पुरानी है. बताया गया कि इसकी शुरुआत महज सवा किलो मेहंदी से हुई थी, जो अब विशाल ‘मेहंदी उत्सव’ का रूप ले चुकी है. सोशल मीडिया पर इस मेहंदी को लेकर विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता बताने वाली रीलें वायरल होने के बाद इस बार लोगों में उत्साह और बढ़ गया.

सड़कों पर भी दिखा भीड़ का असर

श्रद्धालुओं की भीड़ का असर जयपुर के यातायात पर भी पड़ा. टोंक रोड, जेएलएन मार्ग, तख्तेशाही रोड, एमडी रोड और त्रिमूर्ति सर्किल के आसपास यातायात का दबाव बढ़ गया. शाम करीब 5 बजे गांधी सर्किल से यातायात डायवर्ट करना पड़ा. पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा. गणेश चतुर्थी के मुख्य आयोजन की यातायात व्यवस्था भीड़ के चलते एक दिन पहले ही लागू करनी पड़ी.
 

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