केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज जोधपुर के सर्किट हाउस में जनसुनवाई की. इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 10 प्रतिशत आरक्षण, राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने और राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव को लेकर अपनी बात रखी.
मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 और 2015 में उन्होंने लोकसभा में इस विषय को लेकर कई बार आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा कि EWS आरक्षण के नियमों में कृषि क्षेत्र से जुड़े परिवारों के साथ न्याय सुनिश्चित होना चाहिए. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले या शहरों में निवास करने के बावजूद खेती को आजीविका का मुख्य साधन मानने वाले परिवारों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है.
शेखावत के अनुसार, इस विषय पर सरकार के स्तर पर चर्चा की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) लंबित होने के कारण निर्णय नहीं हो सका. अब याचिका पर निर्णय होने के बाद केंद्र सरकार इस विषय पर पूरे देश के संदर्भ में विचार कर रही है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर करीब 15 दिन पहले भी बैठक हुई थी और उम्मीद जताई कि जल्द ही कोई रास्ता निकलेगा.
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की बात पर बोले शेखावत
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि वह वर्ष 1990 से इस संघर्ष के साथ खड़े हैं. यह राजस्थान के लोगों की अस्मिता से जुड़ा विषय है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्तर पर 32 से अधिक भाषाओं को मान्यता देने के प्रस्ताव लंबित हैं और गृह मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है. शेखावत ने राजस्थानी भाषा के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि भोजपुरी और भोंटी जैसी भाषाओं को भी विभिन्न देशों में मान्यता मिली हुई है. उनके अनुसार, राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के दावे को इन उदाहरणों से और मजबूती मिलती है. उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर सरकार के स्तर पर विचार-विमर्श जारी है और उन्हें जल्द निर्णय होने की उम्मीद है.
भाजपा का कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होता- शेखावत
आगामी पंचायती राज चुनाव में मुख्यमंत्री के प्रचार और भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होता, बल्कि पूरे पांच साल सामाजिक सरोकारों और संगठन को मजबूत करने के लिए काम करता है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कार्यकर्ता अपनी पूरी ताकत लगाकर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं. भाजपा का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार के साथ तीसरा इंजन जोड़ना है.
गजेंद्र सिंह शेखावत ने हालिया नगर निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राजस्थान में 70 प्रतिशत से अधिक निकायों में भाजपा के बोर्ड बने हैं. उन्होंने पंचायती राज चुनाव में भी इसी तरह के परिणाम आने की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि राजस्थान में पिछले करीब 35 वर्षों के चुनावी इतिहास को देखें, तो भाजपा के सत्ता में रहने के दौरान सामान्यतः 12 से 13 जिलों में भाजपा के जिला प्रमुख बनते रहे हैं, जबकि सत्ता से बाहर रहने पर यह संख्या चार से पांच जिलों तक रहती थी. शेखावत ने आगामी पंचायत चुनाव में भाजपा की स्थिति को लेकर भरोसा जताया.
REPORTER- RAKESH KUMAR BHARDWAJ