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डिजिटल दौर में भी नहीं टूटी परंपरा! दिवाली पर आज भी क्यों पूजते हैं व्यापारी बही-खाते?

डिजिटल युग में कंप्यूटर और लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद व्यापारियों में दीपावली पर बही-खातों की परंपरा आज भी कायम है. त्योहार से पहले बाजारों में नई बहियां खरीदने के लिए व्यापारियों की भीड़ बढ़ रही है. शुभ मुहूर्त में व्यापारी बही-खातों के साथ कांटा-तराजू और अब कंप्यूटर-लैपटॉप का भी पूजन करते हैं. आधुनिकता के साथ परंपरा का यह संगम आज भी भारतीय व्यापारिक संस्कृति की पहचान बना हुआ है.

Written By Sandeep Kedia
Published: Nov 08, 2026, 01:02 PM IST | Updated: Nov 08, 2026, 01:09 PM IST
Image Credit: दिवाली पर बहियों के साथ लैपटॉप की भी पूजा
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डिजिटल युग में भले ही व्यापार का हिसाब-किताब रखने के तरीके बदल गए हों, लेकिन सदियों से चली आ रही बही-खातों की परंपरा आज भी कायम है. कंप्यूटर और लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद व्यापारी अपने लेन-देन का हिसाब रखने के लिए पारंपरिक बही-खातों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

दीपावली पर बाजारों में बढ़ी बही-खातों की मांग 
यही वजह है कि दीपावली के अवसर पर नई बहियां खरीदने और उनका पूजन करने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. दीपावली नजदीक आते ही बाजारों में बही-खातों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है. व्यापारियों की मांग के अनुसार अलग-अलग आकार, डिजाइन और रेंज की बहियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं.

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शुभ मुहूर्त में बहियों के साथ कांटा-तराजू का पूजन 
व्यापारी शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से बही-खातों का पूजन कर नई बहियां शुरू करते हैं. इसके साथ ही कांटा-तराजू और बांट आदि का भी पूजन किया जाता है. समय के साथ व्यापार के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आया है. अब बड़े कारोबारियों से लेकर छोटे व्यापारियों तक कंप्यूटर और लैपटॉप के माध्यम से हिसाब-किताब सुरक्षित रखने लगे हैं.

डिजिटल दौर में भी बरकरार है बही-खातों का महत्व 
इसके बावजूद बही-खातों का महत्व कम नहीं हुआ है. आमजन और व्यापारियों के बीच बही में दर्ज लेन-देन को आज भी पारंपरिक और महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है. बही विक्रेता रमेश गाडिया ने बताया कि समय की बचत और काम में आसानी के चलते व्यापारी वर्ग कंप्यूटर प्रणाली की ओर आकर्षित हुआ है, लेकिन बही-खातों का चलन आज भी बरकरार है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी तक अपने हिसाब-किताब के लिए बहियों का उपयोग करते हैं.

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अब बही-खातों के साथ कंप्यूटर-लैपटॉप का भी पूजन
दीपावली पर नई बही खरीदना और उसका पूजन करना व्यापारियों की पुरानी परंपरा है, जिसे नई पीढ़ी के व्यापारी भी आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब दीपावली पर बही-खातों के साथ कंप्यूटर और लैपटॉप का पूजन भी किया जाने लगा है. आधुनिकता और परंपरा का यह संगम भारतीय व्यापारिक संस्कृति की खास पहचान बना हुआ है.  
 

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About the Author

संदीप केडिया झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे के निवासी और वरिष्ठ पत्रकार हैं. वे पिछले करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा वर्ष 2015 से Zee Media से जुड़े हुए हैं. उन्होंने VMOU Kota से बीजेएमसी और एमजेएमसी की पढ़ाई की है. संदीप केडिया को झुंझुनूं जिले की पत्रकारिता के मजबूत और भरोसेमंद नामों में गिना जाता है. राजस्थान सरकार के अधिस्वीकृत पत्रकारों की सूची में 2013 से शामिल संदीप केडिया को प्रिंट और सोशल मीडिया का भी अच्छा खासा अनुभव है.
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