जिसे मृत समझकर ले गए, वह निकली दूसरे मरीज की डेडबॉडी, आंच हॉस्पिटल पर सवाल
Aanch Hospital: जयपुर के आंच हॉस्पिटल में दो मृत मरीजों की डेडबॉडी की अदला-बदली का आरोप सामने आया है. परिजनों के अनुसार एक परिवार को दूसरे मरीज की डेडबॉडी सौंप दी गई, जिसे वे करीब 20 किलोमीटर दूर ले गए.
Dead Body Mix-Up in Aanch Hospital: जयपुर के जवाहर सर्किल थाना क्षेत्र स्थित आंच हॉस्पिटल में डेडबॉडी की अदला-बदली से जुड़ा कथित मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. हालांकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. आंच हॉस्पिटल दुर्गापुरा में SL मार्ग पर स्थित है.
दूसरे मरीज की डेडबॉडी सौंपने का आरोप
परिजनों के मुताबिक अस्पताल में दो मरीजों की मौत के बाद डेडबॉडी हैंडओवर करने के दौरान कथित तौर पर गलती हुई. आरोप है कि बानसूर निवासी घेसाराम की डेडबॉडी नावां निवासी गिरधारी के परिजनों को सौंप दी गई. परिजन डेडबॉडी लेकर अस्पताल से करीब 20 किलोमीटर दूर निकल गए.
रास्ते में जब परिजनों ने डेडबॉडी को देखा तो उन्हें शक हुआ. पहचान करने पर सामने आया कि डेडबॉडी गिरधारी की नहीं थी.
अस्पताल पहुंचे तो सामने आया दूसरा दावा
मामला सामने आने के बाद घेसाराम के परिजन भी अस्पताल पहुंचे. उनका दावा था कि जो डेडबॉडी बाहर भेजी गई है, वह घेसाराम की है, जबकि घेसाराम को अस्पताल के ICU में भर्ती बताया जा रहा था. इस दावे के बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया. घटना ने मरीजों की पहचान, अस्पताल रिकॉर्ड और डेडबॉडी सौंपने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए.
पुलिस मौके पर पहुंची
हंगामे की सूचना मिलने पर जवाहर सर्किल थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. अस्पताल के मालिक डॉ. एमके गुप्ता के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है. फिलहाल पुलिस ने डेडबॉडी को जयपुरिया अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. मामले में पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है.
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
गिरधारी के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर डेडबॉडी बदलने के साथ-साथ इलाज और पैसे से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए हैं. परिजनों की ओर से अस्पताल के बाहर कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की मांग को लेकर धरना दिए जाने की बात सामने आई है. दूसरी तरफ, निजी अस्पताल संगठन की ओर से मामले को मानवीय भूल बताते हुए माफी मांगने की बात कही गई है. यानी अस्पताल पक्ष और परिजनों के आरोपों के बीच वास्तविक घटनाक्रम जांच का विषय बना हुआ है.
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों मरीजों की पहचान में कथित तौर पर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? डेडबॉडी सौंपने से पहले मरीज और परिजनों के दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ? ICU में भर्ती बताए जा रहे मरीज की वास्तविक स्थिति क्या थी? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे. फिलहाल डेडबॉडी की पहचान और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है.