)
Dausa News: दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा में करीब 122 वर्षों से चली आ रही झूला महोत्सव की परंपरा आज भी पूरी आस्था और उत्साह के साथ निभाई जा रही है. राजा-महाराजाओं के समय से शुरू हुआ यह आयोजन अब क्षेत्र की पहचान बन चुका है. श्रावण माह की एकादशी से शुरू होने वाला झूला महोत्सव रक्षाबंधन के दूसरे दिन शाम के समय संपन्न होता है. इस दौरान जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी हजारों लोग यहां पहुंचते हैं.
श्री राम और सीताराम मंदिर में खास सजावट
झूला महोत्सव का आयोजन रामगढ़ की चौपड़ पर स्थित श्री राम मंदिर और सीताराम मंदिर कमेटी की ओर से किया जाता है. महोत्सव को लेकर दोनों मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. मंदिर परिसर में आकर्षक झांकियां भी तैयार की जाती हैं, जो श्रद्धालुओं और लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती हैं. झांकियों की सजावट और मंदिरों की रोशनी देखते ही बनती है.
रामलीला की जगह अब पद दंगल
कुछ समय पहले तक झूला महोत्सव के दौरान यहां रामलीला का मंचन भी होता था. उस समय बड़ी संख्या में महिलाएं भी आयोजन में शामिल होती थीं. हालांकि बदलते समय के साथ रामलीला का मंचन बंद हो गया. अब इसकी जगह पद दंगल ने ले ली है, जिसमें गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं. रामलीला बंद होने के बाद महोत्सव में महिलाओं की संख्या भी पहले की तुलना में कम हुई है.
रक्षाबंधन पर घर आई बहन-बेटियां भी पहुंचती हैं
रक्षाबंधन के अवसर पर क्षेत्र की बहन-बेटियां अपने मायके आती हैं. ऐसे में वे भी झूला महोत्सव में शामिल होती हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भाईचारे और आपसी मेल-मिलाप का भी प्रतीक है. दूर-दराज से आने वाले लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और खुशी साझा करते हैं.
संस्कृति और परंपरा को सहेजने की कोशिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि 122 साल पुरानी यह परंपरा आज भी क्षेत्र की संस्कृति को जीवित रखने का काम कर रही है. पहले राजा-महाराजा महोत्सव के दौरान बड़े स्तर पर आयोजन करवाते थे, लेकिन अब दोनों मंदिरों की कमेटियां मिलकर पूरे आयोजन की व्यवस्था संभालती हैं.
हजारों की भीड़ के बीच सुरक्षा के इंतजाम
महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए मंदिर कमेटी के सदस्य सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं. इसके अलावा पुलिस का बड़ा जाप्ता भी तैनात रहता है. श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं.