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Bikaner Mayor Election : बीकानेर के मेयर चुनाव में कहानी सिर्फ नामांकन वापसी तक खत्म नहीं होती. डागा के नामांकन भरने के बाद कांग्रेस के भीतर शुरू हुई हलचल पर अब पार्टी की ओर से सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है. नवरतन डागा की पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात भी हुई. मुलाकात के बाद डागा ने खुद को कांग्रेस का सिपाही बताते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ अपना विरोध दर्ज कराया था और अब सब कुछ ठीक है. वहीं कांग्रेस जिला अध्यक्ष मदन मेघवाल ने भी दावा किया कि, पार्टी के भीतर जो मनमुटाव था वो खत्म हो चुका है और कांग्रेस मेयर बनाने जा रही है. उनके मुताबिक डागा ने अपनी एक बात पार्टी के सामने रखी थी जिस पर पार्टी और पदाधिकारियों के बीच सहमति बन गई है.
बीकानेर मेयर मुकाबले की तस्वीर साफ
मेयर चुनाव में कांग्रेस के भीतर शुरू हुआ सियासी घटनाक्रम अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. नवरतन डागा ने अपना नामांकन वापस लेकर मुकाबले की तस्वीर साफ कर दी है. डागा के नामांकन दाखिल करने के बाद कांग्रेस के भीतर दावेदारी और सहमति को लेकर चर्चाएं तेज थी. लेकिन अब डागा ने नामांकन वापस ले लिया है. डागा का कहना है कि वे कांग्रेस के सिपाही हैं और उनका मकसद पार्टी के खिलाफ जाना नहीं था.उन्होंने सिर्फ अपना विरोध दर्ज कराया था. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात के बाद डागा ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर अब स्थिति सामान्य है.
कांग्रेस में हो गया डैमेज कंट्रोल
डागा के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस की ओर से भी डैमेज कंट्रोल की तस्वीर सामने रखी जा रही है, जिला अध्यक्ष मदन मेघवाल का कहना है कि पार्टी के भीतर जो बात या मनमुटाव था,वो अब खत्म हो गया है, उनके मुताबिक नवरतन डागा ने अपनी बात पार्टी के सामने रखी थी और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उस पर सहमति बन गई. यानी कांग्रेस अब एकजुट होकर मेयर चुनाव में उतरने का दावा कर रही है. दूसरी तरफ नगर निगम में कांग्रेस के बहुमत के बीच अब पार्टी का पूरा फोकस अपने उम्मीदवार अनिल कल्ला के पक्ष में रणनीति पर है. लेकिन बी.डी.कल्ला के आरोपों से नया सियासी मोर्चा खुला गया है. जहां कांग्रेस के भीतर सुलह और सहमति के दावों के बीच पूर्व मंत्री डॉ.बी.डी कल्ला ने अलग ही मुद्दा उठा दिया है.
चुनाव लड़ने का अधिकार सबको है- बीडी कल्ला
कल्ला ने आरोप लगाया कि मेयर चुनाव के दौरान पार्षदों के घर पुलिस भेजकर पूछताछ की गई. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान प्रशासन और पुलिस का इस तरह हस्तक्षेप लोकतंत्र में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. बी.डी. कल्ला ने फोन टैपिंग मामले पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय का फोन टैपिंग मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते. साथ ही उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इस तरह से काम करने की ट्रेनिंग नहीं होती. परिवारवाद के आरोपों पर कल्ला ने कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है और किसी को चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जा सकता. वहीं मेयर चुनाव के आंकड़ों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपना वोट बनाएगी,लेकिन कितने वोट मिलेंगे,ये वह नहीं कह सकते.
नवरतन डागा के नामांकन वापस लेने के बाद अब मेयर पद का चुनाव सीधे कांग्रेस के अनिल कल्ला और बीजेपी के सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच ह.। एक तरफ कांग्रेस अपने भीतर सब कुछ ठीक होने और पार्षदों के साथ सहमति का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ बी.डी. कल्ला के आरोपों ने चुनावी घटनाक्रम में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है, अब निगाहें 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर हैं. इसी दिन साफ होगा कि बीकानेर नगर निगम की मेयर की कुर्सी पर कांग्रेस के अनिल कल्ला पहुंचते हैं या बीजेपी के सुरेंद्र सिंह शेखावत बाजी अपने नाम करते हैं.