राजस्थान में सूखे और पेयजल संकट पर गहलोत ने जताई चिंता: बोले- सरकार ने समय पर ठोस कदम नहीं उठाए
जैसलमेर दौरे के दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रेस वार्ता कर राजस्थान में अकाल जैसे हालात, पेयजल संकट और पशुओं के चारे की कमी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने, चारा डिपो खोलने, पानी की व्यवस्था करने और मनरेगा के तहत रोजगार देने की मांग की.
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर दौरे के दूसरे दिन प्रेस वार्ता कर प्रदेश में सूखे और अकाल जैसे हालात, पेयजल संकट, पशुओं के चारे की कमी, ओरण-गोचर भूमि संरक्षण और पंचायतों व निकायों के परिसीमन को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 अगस्त से ही अकाल जैसे हालात बनने लगे थे, लेकिन सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए.
अशोक गहलोत ने ग्रामीण क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने, चारा डिपो खोलने, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने और मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की. गहलोत ने कहा कि सीमावर्ती जिला होने के कारण जैसलमेर के हालात का विशेष महत्व है. इसी वजह से उन्होंने अकाल प्रभावित जिलों के दौरे की शुरुआत जैसलमेर से की है. उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग 1000 से 1500 रुपए खर्च कर पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं. पशुधन को बचाने के लिए चारे की समुचित व्यवस्था करने और जरूरतमंद ग्रामीणों तक राहत पहुंचाने की आवश्यकता है.
कांग्रेस के जीते हुए क्षेत्रों को प्रभावित करने की कोशिश- अशोक गहलोत
पंचायतों और स्थानीय निकायों के परिसीमन पर गहलोत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस के जीते हुए क्षेत्रों और वार्डों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की.
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गौसेवा के मुद्दे पर गहलोत ने पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख
गौसेवा के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने गौशालाओं को 9 महीने तक अनुदान देने की व्यवस्था की थी और प्रति पशु अनुदान राशि 35 रुपए से बढ़ाकर 70 रुपए तक की थी. उन्होंने लंपी बीमारी के दौरान मृत गायों के लिए 40 हजार रुपए प्रति गाय मुआवजा देने का भी जिक्र किया. गहलोत ने कहा कि गायों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके संरक्षण और सेवा के लिए ठोस काम होना चाहिए.
ओरण-गोचर भूमि संरक्षण की उठाई मांग
जैसलमेर में ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण को लेकर गहलोत ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से इन भूमियों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित करते समय ओरण-गोचर भूमि के संरक्षण का ध्यान रखा जाना चाहिए. इन भूमियों को आधिकारिक रूप से चिह्नित कर संरक्षित करने की जरूरत है, ताकि पर्यावरण और पशुधन की रक्षा हो सके.
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EWS सरलीकरण और कानून व्यवस्था पर बोले गहलोत
EWS नियमों के सरलीकरण को लेकर गहलोत ने राजस्थान में अपनी सरकार के दौरान किए गए बदलावों का उल्लेख किया. उन्होंने मांग की है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किए गए सरलीकरण को केंद्र सरकार की नौकरियों में भी लागू किया जाए, ताकि पात्र युवाओं को इसका लाभ मिल सके. वहीं पूर्व विधायक की हत्या की घटना पर दुख जताते हुए उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री व गृह मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग की.
लोकतंत्र और आगामी चुनावों पर कांग्रेस की तैयारी
अशोक गहलोत ने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्ष के आंदोलनों को गलत रूप में पेश कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के साथ जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी. आगामी पंचायतीराज चुनावों की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन सक्रिय है और जिला व ब्लॉक स्तर पर वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं.
प्रेस वार्ता में गहलोत ने अकाल राहत, पेयजल, पशुओं के चारे, ओरण-गोचर भूमि संरक्षण, परिसीमन और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाते हुए राज्य सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की. इस दौरान जैसलमेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर, पूर्व कैबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद, पूर्व विधायक रूपाराम धांधेव और पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल सहित कांग्रेस के अन्य नेता मौजूद रहे.