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अधिकारी मान रहे मिक्स होकर ठीक हो जाएगा, लेकिन नसों में घुल रहा 'धीमा जहर'

राजस्थान में बीसलपुर बांध से सप्लाई होने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं. दावा किया जा रहा है कि नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) की लैब रिपोर्ट में पानी में एल्यूमीनियम (Aluminium) की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है. बीसलपुर बांध से जयपुर समेत चार जिलों में पानी की आपूर्ति होती है. ऐसे में इस दावे ने पेयजल की गुणवत्ता और लोगों की सेहत पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ाई है.

Written By Ansh Raj
Published: Oct 14, 2026, 01:33 PM IST | Updated: Oct 14, 2026, 01:36 PM IST
Image Credit: Bisalpur Dam Water
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Bisalpur Dam Water: बीसलपुर बांध के पानी की गुणवत्ता को लेकर एल्यूमीनियम की मात्रा पर सवाल उठे हैं. दावा है कि NEERI की लैब रिपोर्ट में पानी में एल्यूमीनियम तय मानकों से अधिक मिला है. बीसलपुर से जयपुर समेत चार जिलों में पेयजल की आपूर्ति होती है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी से रिपोर्ट के आंकड़ों और स्वास्थ्य पर संभावित असर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती. ऐसे में पानी के नमूनों, जांच के नतीजों और अधिकारियों के जवाब को समझना जरूरी है.

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में लैब रिपोर्ट के आंकड़े, पानी के नमूनों की जांच की तारीख और एल्यूमीनियम की वास्तविक मात्रा का विवरण नहीं है. इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पानी में एल्यूमीनियम किस स्तर पर पाया गया और जांच के निष्कर्ष किन नमूनों पर आधारित हैं.

बीसलपुर के पानी में एल्यूमीनियम को लेकर क्या दावा है?
बीसलपुर बांध राजस्थान के उन प्रमुख जल स्रोतों में शामिल है, जिनसे बड़ी आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी होती हैं. सामने आए दावे के अनुसार, NEERI की प्रयोगशाला में पानी की गुणवत्ता की जांच के दौरान एल्यूमीनियम की मात्रा तय मानकों से ज्यादा मिली है.

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एल्यूमीनियम की मात्रा कितनी पाई गई और इसकी तुलना किस मानक से की गई. इन सवालों का जवाब लैब रिपोर्ट के विस्तृत आंकड़ों से ही मिल सकता है. रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया के बिना पानी की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

क्या एल्यूमीनियम से सेहत को नुकसान हो सकता है?
पानी में एल्यूमीनियम की मौजूदगी को लेकर स्वास्थ्य संबंधी सवाल भी उठ रहे हैं. इस संदर्भ में अल्जाइमर और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा होने जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं. हालांकि, केवल पानी में एल्यूमीनियम मिलने के दावे के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बीसलपुर का पानी पीने से ये बीमारियां हो रही हैं.

इसके लिए एल्यूमीनियम की वास्तविक मात्रा, पानी के सेवन की अवधि, संपर्क का स्तर और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों का आकलन जरूरी है. इसलिए स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं और प्रमाणित वैज्ञानिक निष्कर्षों के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है.

 

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पानी का रंग बदलने की घटनाओं ने भी बढ़ाए सवाल
बीसलपुर के पानी को लेकर पहले भी रंग बदलने की घटनाओं का उल्लेख सामने आया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नौ साल में तीन बार पानी का रंग बदलने की बात कही गई है. जुलाई 2026 में जयपुर में बीसलपुर से सप्लाई हुए पीले पानी को लेकर भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. उस रिपोर्ट में हानिकारक एल्गी को संभावित कारण बताया गया था. हालांकि, पानी के रंग में बदलाव और एल्यूमीनियम की मात्रा बढ़ने को एक ही समस्या मानना सही नहीं होगा. दोनों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक जांच के नतीजे जरूरी हैं.

 

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अधिकारियों और जांच रिपोर्ट से क्या स्पष्ट होना बाकी?
इस पूरे मामले में सबसे जरूरी है कि संबंधित विभाग पानी की गुणवत्ता से जुड़े जांच परिणाम सार्वजनिक करे. एल्यूमीनियम की मात्रा, निर्धारित मानक, नमूनों की जगह और जांच की तारीख जैसी जानकारियां सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है. अधिकारियों के स्तर पर पानी को दूसरे स्रोतों के पानी के साथ मिलाने से समस्या ठीक होने की बात कही जा रही है. लेकिन इस उपाय की प्रभावशीलता को समझने के लिए पानी की सप्लाई से पहले और बाद के नमूनों की जांच के नतीजे जरूरी हैं.

फिलहाल, बीसलपुर के पानी में एल्यूमीनियम की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक मिलने का दावा गंभीर सवाल उठाता है. इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए NEERI की पूरी लैब रिपोर्ट और संबंधित जलापूर्ति विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है.

 

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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