पाली में बजरी खनन लीज पर हाईकोर्ट सख्त, खान विभाग से मांगा जवाब, भूजल संकट की आशंका
पाली जिले के बूसी गांव में सुकड़ी नदी के किनारे बजरी खनन लीज को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने खान विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2023 में पिछली लीज प्रभावी रहने की अवधि समाप्त होने के बाद पांच साल पूरे होने से पहले ही उसी नदी में दूसरी लीज दे दी गई, जबकि बजरी के प्राकृतिक पुनर्भरण की ठोस योजना नहीं बनाई गई. ग्रामीणों के करीब 400 सिंचाई कुओं और पेयजल स्रोतों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.
राजस्थान के पाली जिले के बूसी गांव में बजरी खनन लीज को लेकर विवाद राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है. सुकड़ी नदी में खनन की अनुमति को नियमों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है. इस मामले में हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने खान विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि एक ही नदी में पिछली लीज की अवधि समाप्त होने के पांच साल पूरे होने से पहले ही दूसरी लीज दे दी गई. साथ ही, बजरी के पुनर्भरण की ठोस योजना नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है.
एक ही नदी में दोबारा लीज देने पर उठाए सवाल
बूसी गांव निवासी धनराज सोलंकी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में बजरी खनन की अनुमति को चुनौती देते हुए लीज निरस्त करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2022 में चांडक एसोसिएट को बूसी गांव की नदी में बजरी खनन की अनुमति मिली थी, जो वर्ष 2023 तक प्रभावी रही. आरोप है कि इसके पांच साल पूरे होने से पहले ही मैसर्स थार माइंस एंड केमिकल्स को उसी नदी में फिर से खनन की लीज दे दी गई. याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बजरी खनन से पहले उसके प्राकृतिक पुनर्भरण की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. उनका दावा है कि इस मामले में पुनर्भरण की ठोस योजना नहीं बनाई गई.
400 सिंचाई कुएं नदी के भूजल पर निर्भर
याचिका में बूसी गांव की आबादी 9 हजार से अधिक बताई गई है. ग्रामीणों के करीब 400 सिंचाई कुएं नदी से होने वाले भूजल पुनर्भरण पर निर्भर बताए गए हैं. ऐसे में नदी से बड़े स्तर पर बजरी हटाने का असर आसपास के भूजल स्तर पर पड़ने की आशंका जताई गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि नदी में बजरी का पर्याप्त पुनर्भरण नहीं हुआ और लगातार खनन जारी रहा, तो आसपास के कुओं में पानी का स्तर नीचे जा सकता है. इससे खेती के लिए सिंचाई और ग्रामीणों की पेयजल जरूरतें प्रभावित होने की आशंका है.
एनीकट के कारण पुनर्भरण प्रभावित होने का दावा
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुकड़ी नदी के ऊपरी हिस्से में टेवाली और कोलार एनीकट बने हुए हैं. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इनके कारण नदी में बजरी का प्राकृतिक पुनर्भरण प्रभावित हो रहा है. उन्होंने आशंका जताई है कि लगातार बजरी हटाने से भूजल स्तर गिर सकता है और 40 फीट से नीचे मिलने वाला पानी खारा हो सकता है. हालांकि, भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता पर वास्तविक प्रभाव का आकलन संबंधित तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही किया जा सकता है.
हाईकोर्ट में अब खान विभाग के जवाब पर नजर
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से रानी के अधिवक्ता कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने खान विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब मामले में विभाग का पक्ष और लीज देने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होंगे. अदालत में उठाए गए आरोपों पर विभाग का जवाब आने के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल, हाईकोर्ट द्वारा जवाब मांगा जाना मामले की सुनवाई का हिस्सा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लीज निरस्त करने को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है.