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अजमेर की 100 साल पुरानी दुकान, नाम है 'चोर बनिये की दुकान'... जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

अजमेर की करीब 100 साल पुरानी 'चोर बनिये की दुकान' आज भी लोगों के बीच मशहूर है. एक पाई के सामान से शुरू हुआ इसका सफर अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है. जानिए इस अनोखे नाम के पीछे की कहानी और दुकान की खासियत.

Written By Ansh Raj
Published: Oct 29, 2026, 02:09 PM IST | Updated: Oct 29, 2026, 02:10 PM IST
Image Credit: Chor Baniye Ki Dukaan
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अजमेर के पुराने शहर की तंग गलियों में एक ऐसी दुकान है, जिसका नाम सुनकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. नाम है 'चोर बनिये की दुकान'. करीब 100 साल पुरानी यह दुकान आज भी चल रही है. खास बात यह है कि इतने साल बाद भी यहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और ऑनलाइन खरीदारी के दौर में भी इस दुकान ने अपनी पहचान बनाए रखी है.

एक पाई में मिलता था सामान
बुजुर्गों के मुताबिक, जब यह दुकान शुरू हुई थी, तब यहां एक पाई में सुई और एक पैसे में नमक-मिर्च तक मिल जाते थे. उस दौर में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह दुकान काफी मददगार थी. जब गरीब परिवारों के पास छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, तब यहां कम कीमत में सामान मिल जाता था.

तेल-मसालों से लेकर जड़ी-बूटियों तक
इस दुकान की खासियत यहां मिलने वाला सामान है. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए तेल, मसाले, दाल और चावल के साथ यहां कई तरह की जड़ी-बूटियां भी मिलती हैं. अश्वगंधा, मुलेठी, गिलोय, नीम और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियां आज भी बोरियों और कांच के मर्तबानों में रखी नजर आती हैं. पहले जब डॉक्टर और दवाइयां गरीब लोगों की पहुंच से बाहर थीं, तब लोग यहां से जड़ी-बूटियां खरीदकर घरेलू उपचार करते थे. कम कीमत में जड़ी-बूटियां मिलना इस दुकान की खास पहचान रही है.

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ऐसे पड़ा 'चोर बनिये की दुकान' नाम
इस दुकान के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. ग्राहकों की भीड़ इतनी रहती थी कि दुकानदार कई बार भूल जाता था कि किसने पैसे दिए हैं और किसने नहीं. ऐसे में वह कभी-कभी पैसे दे चुके ग्राहक से दोबारा पैसे मांग लेता था. इस पर ग्राहक मजाक में कहते, 'अरे, ये तो चोर बनिया है.' धीरे-धीरे यही मजाक दुकान की पहचान बन गया. यहां 'चोर' शब्द बेईमानी के लिए नहीं, बल्कि अपनेपन के साथ लिया जाने लगा.

पांचवीं पीढ़ी संभाल रही विरासत
समय के साथ दुकान की छत और बनावट बदली, लेकिन कारोबार और ईमानदारी की परंपरा कायम रही. आज इसकी पांचवीं पीढ़ी दुकान संभाल रही है. दुकानदार के मुताबिक, उनके दादा ने ईमानदारी से काम शुरू किया था और परिवार आज भी उसी परंपरा को निभा रहा है. यही वजह है कि 'चोर बनिये की दुकान' अजमेर की एक खास विरासत बनी हुई है.

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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