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आमेर के मानसिंह महल में मिला 400 साल पुराना वर्षा जल संग्रहण टांका, पहली बार देख सकेंगे पर्यटक

जयपुर के आमेर किले में मानसिंह महल की बारादरी के नीचे करीब 400 साल पुराना वर्षा जल संग्रहण टांका मिला है. संरक्षण कार्य के दौरान सामने आई इस संरचना को अब पर्यटक पहली बार देख सकेंगे. इसमें पानी जमा करने, मिट्टी रोकने और अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था थी.

Reported By Ashish Chauhan
Published: Oct 28, 2026, 05:20 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 05:22 PM IST
Image Credit: Amer Man Singh Mahal
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राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत में पानी बचाने की पुरानी तकनीक का एक खास उदाहरण सामने आया है. आमेर किले में मानसिंह महल की बारादरी के नीचे करीब 400 साल पुराना वर्षा जल संग्रहण टांका मिला है. संरक्षण कार्य के दौरान सामने आई इस संरचना को अब पर्यटक पहली बार देख सकेंगे. इस टांके में बारिश का पानी जमा करने के साथ मिट्टी-कचरा रोकने और अतिरिक्त पानी निकालने की भी व्यवस्था थी.

छतों और गलियारों का पानी होता था जमा
महाराजा मानसिंह प्रथम (1589–1614 ई.) द्वारा बनवाया गया मानसिंह महल, आमेर महल का प्राचीन हिस्सा है. बारादरी के नीचे बने टांके में छतों, खुले गलियारों और चौक का बारिश का पानी इकट्ठा होता था. पूर्व दिशा में ऊपर बनी मोरी के जरिए पानी टांके तक पहुंचता था.

टांके के बीच करीब 4 फीट 3 इंच का वर्गाकार कुंड बना है. इसकी गहराई लगभग 2 फीट 6 इंच है. बारिश के पानी के साथ आने वाली मिट्टी और कचरा इस कुंड में बैठ जाता था, जिससे पानी जमा करने की व्यवस्था बेहतर रहती थी.

सफाई और अतिरिक्त पानी निकालने का इंतजाम
टांके में पानी की सफाई और निकासी के लिए भी अलग व्यवस्था थी. छोटे कुंड के ऊपरी हिस्से में बनी मोरी सफाई के दौरान पानी निकालने के काम आती थी. वहीं, टांके के तल से करीब 6 फीट ऊपर बनी दूसरी मोरी से टांका भरने पर अतिरिक्त पानी बाहर निकाला जाता था.

 

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संरक्षण कार्य के दौरान सामने आया टांका
मानसिंह महल में संरक्षण कार्य के दौरान इस प्राचीन संरचना के बारे में जानकारी मिली. अब तक आमेर आने वाले पर्यटक, गाइड और विशेषज्ञ भी इस टांके से अनजान थे. आमेर महल के अधीक्षक डॉ. राकेश छोलक, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अभियंताओं और संरक्षण कार्य कर रही फर्म मेसर्स विपांशु एंटरप्राइजेज ने इसे सामने लाने में प्रमुख भूमिका निभाई.

पुरानी जल संरक्षण तकनीक की मिसाल
मानसिंह महल का यह टांका बताता है कि उस दौर में भी बारिश के पानी को सहेजने और उसकी बर्बादी रोकने के लिए व्यवस्थित इंतजाम किए जाते थे. पानी की बढ़ती जरूरतों के बीच यह संरचना पारंपरिक जल संरक्षण तकनीक को समझने और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है.h

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आशीष चौहान
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