SNA-SPARSH: राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत अटके प्रोजेक्ट्स के बजट भुगतान की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी है. जी मीडिया की खबर के बाद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में SNA-SPARSH पोर्टल से जुड़ी वित्तीय प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है. वन टाइम माइनर प्रोजेक्ट (OTMP) और क्वांटिटी एंड वॉटर क्वालिटी (Q&Q) के भुगतान में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए बदलावों पर विचार किया जा रहा है. इससे करीब 2 हजार करोड़ रुपये के अटके भुगतान का रास्ता खुलने की उम्मीद है.
SPARSH की प्रक्रिया में कहां फंस रहा बजट?
जल जीवन मिशन के तहत योजनाओं का भुगतान SNA-SPARSH व्यवस्था के जरिए किया जाता है. इसका उद्देश्य सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी, पारदर्शिता और खर्च का डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना है. हालांकि, राजस्थान में पुराने खर्चों का लेखा-जोखा केंद्र की निर्धारित शर्तों के अनुरूप दर्ज करने और वाउचर टैग करने में आ रही दिक्कतों के कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
OTMP के 1,300 करोड़ रुपये अटके
OTMP के तहत बजट जारी करने की मौजूदा प्रक्रिया काफी लंबी है. अभी फाइल एक्सईएन से शुरू होकर अधीक्षण अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता और मुख्य अभियंता सहित विभिन्न स्तरों से गुजरती है. इसके बाद JJM वित्तीय व्यवस्था और साइबर ट्रेजरी के जरिए भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया को सरल बनाने पर विचार किया जा रहा है. प्रस्ताव के तहत फाइल एक्सईएन से सीधे फाइनेंस एडवाइजर (FA) तक पहुंचेगी. इसके बाद साइबर ट्रेजरी के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा. OTMP के करीब 1,300 करोड़ रुपये के भुगतान अटके होने की जानकारी सामने आई है.
Q&Q के 567 करोड़ रुपये पर भी मंथन
क्वांटिटी एंड वॉटर क्वालिटी यानी Q&Q के तहत भी करीब 567 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है. इसके लिए संचालन पोर्टल के माध्यम से भुगतान शुरू करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है. इस संबंध में अगले सात दिनों में नेशनल जल जीवन मिशन (NJJM) से चर्चा किए जाने की बात सामने आई है. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भुगतान की प्रक्रिया आसान हो सकती है.
केंद्र की मंजूरी अहम
प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने इस विषय पर अधिकारियों के साथ चर्चा की है. हालांकि, प्रस्तावित बदलाव अभी विचार के स्तर पर हैं और इन्हें लागू करने के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी हो सकती है.
प्रक्रिया सरल होने से अटके भुगतान जारी करने में मदद मिल सकती है. इससे जल आपूर्ति परियोजनाओं का काम आगे बढ़ने और हर घर तक पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है.