जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है, बिजली का भारी-भरकम बिल टेंशन दे देता है. आमतौर पर एक स्टोरेज गीजर दो हजार से तीन हजार वॉट तक की भारी बिजली खींचता है, जो सीधे तौर पर समर सीजन के एयर कंडीशनर यानी एसी जितना बड़ा लोड डालता है. हालांकि, इस ज्यादा बिजली खपत के पीछे खुद गीजर से ज्यादा हमारी अपनी गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं. अगर आप भी इस विंटर सीजन अपनी जेब ढीली होने से बचाना चाहते हैं, तो गीजर चलाने की कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद असरदार ट्रिक्स को समझकर बिजली का बिल आधा कर सकते हैं.
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सर्दियों में क्यों आता है एसी जैसा भारी बिल
जैसे ही ठंड की दस्तक होती है, सुबह-सुबह ठंडे पानी से नहाना किसी सजा से कम नहीं लगता और ऐसे में गीजर हर घर का सबसे चहेता मेंबर बन जाता है. लेकिन महीने के आखिर में जब बिजली का बिल हाथ में आता है, तो सारा मजा किरकिरा हो जाता है. एक नॉर्मल स्टोरेज गीजर दो हजार से तीन हजार वॉट तक की पावर खींचता है, जो आपके घर के एसी के बराबर करंट लेता है. पर मजे की बात यह है कि गीजर में बिजली की यह भारी खपत मशीन से ज्यादा हमारी लापरवाही की वजह से होती है. अगर हम अपनी कुछ आदतों को थोड़ा सा सुधार लें, तो गीजर चलाने के बाद भी मीटर कछुए की चाल से ही चलेगा.
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पाइप इंसुलेशन और बाल्टी का करें सही इस्तेमाल
पानी को सिर्फ गीजर में गर्म करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस गर्मी को बाथरूम के नल तक सुरक्षित पहुंचाना भी जरूरी है. इसके लिए गीजर को हमेशा बाथरूम के आउटलेट के पास ही इंस्टॉल करवाएं और गर्म पानी वाले पाइपों पर फोम इंसुलेशन जरूर चढ़वाएं ताकि रास्ते में पानी ठंडा न हो. इसके अलावा नहाते वक्त सीधे शावर चलाने के बजाय बाल्टी और मग का इस्तेमाल करें, या फिर लो-फ्लो शॉवरहेड लगवाएं. इससे कम पानी में काम हो जाएगा और गीजर को बार-बार पानी गर्म नहीं करना पड़ेगा, जिससे आपका विंटर सीजन का बिल बिल्कुल कंट्रोल में रहेगा.
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खारे पानी और लीकेज से गीजर को बचाएं
भारत के कई बड़े शहरों में हार्ड वाटर यानी खारा पानी आता है, जो गीजर के हीटिंग एलिमेंट पर सफेद परत जमा देता है. इससे गीजर धीरे-धीरे काम करने लगता है और पानी गर्म करने में दोगुनी बिजली खींचता है. इसलिए साल में एक बार गीजर के टैंक की सफाई यानी डीस्केलिंग जरूर करवाएं. इसके साथ ही अगर आपके बाथरूम या किचन का गर्म पानी वाला नल थोड़ा सा भी टपक रहा है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं. टपकती हुई हर एक बूंद टैंक में से गर्म पानी बाहर निकालती है और उसकी जगह आए ठंडे पानी को गीजर बार-बार गर्म करता रहता है.
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सही साइज और 5-स्टार मॉडल ही चुनें
अगर आपका गीजर काफी पुराना हो चुका है और आप नया खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो हमेशा ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी यानी बीईई की फाइव-स्टार रेटिंग वाला मॉडल ही खरीदें. फाइव-स्टार गीजर बंद होने के बाद भी पानी की गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखते हैं. इसके अलावा अपनी फैमिली की जरूरत के हिसाब से ही गीजर का साइज चुनें. एक या दो लोगों के लिए पंद्रह लीटर का टैंक काफी होता है, जबकि चार लोगों के परिवार के लिए पच्चीस लीटर का गीजर एकदम परफेक्ट रहता है. वहीं किचन के बर्तनों के लिए एक से तीन लीटर का इंस्टेंट गीजर सबसे स्मार्ट चॉइस माना जाता है.
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टाइमर और स्मार्ट प्लग का लें सहारा
ज्यादातर लोगों की यह आदत होती है कि वे सुबह उठकर गीजर का स्विच ऑन करके भूल जाते हैं और वह घंटों तक चलता रहता है. इससे होता यह है कि टैंक में रखा पानी जब ठंडा होता है, तो गीजर उसे दोबारा गर्म करने में अपनी पूरी ताकत लगा देता है. इसका सबसे बेस्ट सॉल्यूशन यह है कि आप नहाने से केवल पंद्रह से बीस मिनट पहले ही गीजर चालू करें और पानी गर्म होते ही बंद कर दें. आज के टाइम में बाजार में सोलह एम्पीयर के टाइमर और स्मार्ट प्लग्स मिलते हैं, जिन्हें आप अपने फोन से कनेक्ट करके ऑटोमैटिक शेड्यूल सेट कर सकते हैं जिससे समय और बिजली दोनों बचती है.
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सही तापमान सेट करना है सबसे बड़ा खेल
जब हम बाजार से नया गीजर लाते हैं या घर में पुराना गीजर इस्तेमाल करते हैं, तो उसका थर्मोस्टेट पचहत्तर डिग्री सेल्सियस तक सेट रहता है. इतनी ज्यादा गर्मी में पानी गर्म करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती क्योंकि बाद में नहाते वक्त उसमें ढेर सारा ठंडा पानी मिलाना पड़ता है. अगर आप गीजर का तापमान बदलकर पैंतालीस से पचास डिग्री सेल्सियस के बीच सेट कर देते हैं, तो गीजर बहुत जल्दी ऑटो-कट हो जाता है. इससे गीजर को बार-बार पानी गर्म नहीं करना पड़ता और बिजली की खपत तुरंत आधी हो जाती है.