Bollywood Tragedy Queen: हिंदी सिनेमा की 'ट्रेजेडी क्वीन' मीना कुमारी ने अपनी शानदार एक्टिंग से हर किसी के दिलों में राज किया था. हसीना के पर्दे पर आते ही वह अपनी एक्टिंग से समां बांध देती थीं. लेकिन किसी को इस बात का अहसास नहीं था कि उनकी असल जिंदगी में काफी दर्द था. उन्होंने महज 4 साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था. इतना ही नहीं, हसीना का अंत बेहद दर्दनाक हुआ था. बताया जाता है कि उनका आखिरी समय तो बहुत ज्यादा मुश्किलों में बीता था और उनके पास अस्पताल का बिल भरने तक के पैसे नहीं थे.
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स्टारडम मिला, लेकिन जिंदगी में सुकून नहीं आया
बॉलीवुड एक्ट्रेस मीना कुमारी ने अपने करियर में एक से एक हिट फिल्में दीं, जो सुपर डुपर हिट साबित हुईं. उन्होंने अपने किरदारों को तो अमर बना दिया था, लेकिन आखिरी समय में उनके परिवार के पास अस्पताल का बिल भरने तक के पैसे नहीं थे. फिल्म 'पाकीजा' में हसीना ने अपने किरदार में जान फूंक दी थी और बेहद खूबसूरत लग रही थीं. हसीना की एक्टिंग को देख लोग मुरीद हो जाते थे. महज 4 साल की उम्र में हसीना एक्टिंग में आ गई थीं.
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25 रुपये फीस से शुरू हुआ करियर
वहीं, बहुत छोटी उम्र से ही अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठा रही थीं. अच्छा-खासा स्टारडम पाने के बाद भी हसीना को जिंदगी में सुख नहीं मिल पाया. बहुत कम लोग इस बारे में जानते हैं कि मीना कुमारी का असली नाम महजबीन बानो था. साल 1939 में हसीना ने विजय भट्ट की फिल्म 'लेदरफेस' में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू कर दिया था. इस फिल्म के लिए उन्हें केवल 25 रुपये फीस मिली थी. छोटी उम्र से ही फिल्मों में काम करने की वजह से उनका स्कूल भी छूट गया था.
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गुपचुप रचाई थी शादी
मीना कुमारी को परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार फिल्मों में काम करना पड़ा. उनकी कमाई से ही घर चलता था. उनके और उनके पिता के रिश्ते हमेशा से काफी मुश्किलों से भरे रहे थे. दरअसल, विनोद मेहरा की जीवनी के मुताबिक, मीना कुमारी ने फिल्ममेकर कमाल अमरोही संग पिता के डर की वजह से गुपचुप शादी रचा ली थी. उन्हें बचपन में पढ़ाई से ज्यादा काम पर ध्यान देना पड़ा था. करीब 6-7 साल की उम्र से ही उन्हें एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो के चक्कर लगाने पड़ते थे.
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कई हिट फिल्मों में किया काम
जैसा कि आप जानते हैं कि मीना कुमारी को साल 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' से पहचान मिली थी. इस फिल्म के बाद वे उस दौर की जानी-मानी हसीनाओं में शामिल हो गई थीं. अपने करियर में उन्होंने 'परिणीता', 'आजाद', 'शारदा', 'मिस मैरी' और 'दिल अपना और प्रीत पराई' जैसी जबरदस्त फिल्मों में काम किया था. उनके किरदारों को हर फिल्म में दर्शकों ने काफी पसंद किया था.
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आखिरी वक्त में अस्पताल का बिल भी नहीं चुका पाया था परिवार
फिल्ममेकर बिमल रॉय की बेटी रिंकी राय भट्टाचार्य ने साल 2014 में रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि 31 मार्च 1972 को जब मीना कुमारी का निधन हुआ था, तब उनके परिवार के पास अस्पताल से उनका शव छुड़ाने तक के पैसे नहीं थे. उनके शव को छुड़ाने के लिए परिवार को 3 हजार 500 रुपये देने थे, वो भी उनके पास नहीं थे. फिल्म इंडस्ट्री में इतना अच्छा स्टारडम होने के बावजूद मीना कुमारी को आखिरी समय में काफी दर्दनाक अंत देखना पड़ा था.