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शेषाचलम के सर्प रक्षक: ‘स्नेक नायडू’ की अनोखी सेवा, 30 हजार सांपों की बचाई जान; टीटीडी ने दिया सम्मान

भास्कर नायडू की कहानी सिर्फ सांपों को बचाने की नहीं, बल्कि उनके जुनून, हिम्मत, सेवा और समर्पण की वो मिसाल है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे. जिस जहरीले सांप के डसने से उनकी जान पर बन आई, फिर भी उन्होंने अपना रास्ता नहीं बदला. तीन दशक में करीब 30 हजार सापों को बचा चुके नायडू के सेवा भाव को पहचान कर टीटीडी ने उनका सम्मान किया है.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 24, 2026, 01:32 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 02:21 PM IST
Image Credit: टीटीडी अधिकारी के साथ 'स्नेक नायडू' (Zee Media)
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ज्यादातर लोगों को लिए सांप का दिख जाना, उनके डर जाने के लिए काफी होता है. लेकिन तिरुमाला की पवित्र पहाड़ियों में एक शख्स ऐसा भी है, जिसके लिए हर सांप की जान बचाना मायने रखता है. आइए आपको मिलवाते हैं भास्कर नायडू से, जिन्हें लोग प्यार से ‘स्नेक नायडू’ कहकर बुलाते हैं. नायडू निडर होकर सांपों को बचाने वाले ऐसे रेस्क्यूअर हैं, जिन्होंने कथित तौर पर बीते तीस सालों में 30 हजार से ज्यादा सांपों की जान बचाई है. भास्कर पहले टीटीडी के वन विभाग में कर्मचारी थे. आगे चलकर उन्होंने अपना पूरा जीवन तिरुमाला और तिरुपति के आसपास सांपों को बचाने और लोगों की सुरक्षा करने के लिए समर्पित कर दिया.

डर से शुरू हुआ असाधारण सफर

भास्कर नायडू के लिए सांपों को बचाना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भगवान वेंकटेश्वर की सेवा हैं. भास्कर का यह असाधारण सफर साल 1995 में शुरू हुआ, जब उनका सामना 15 फुट लंबे एक विशाल अजगर से हुआ. शुरुआत में जिस चीज ने उनके मन में डर पैदा किया, वही धीरे-धीरे साहस, करुणा और वन्यजीव संरक्षण के मिशन में बदल गई. समय बीतने के साथ भास्कर ऐसे शख्स बन गए, जिनसे लोग तब संपर्क करते हैं, जब कोई सांप उनके घर, बगीचे या किसी सार्वजनिक जगह पर दिखाई देता है.

मौत को करीब से देखा, फिर भी नहीं डिगे कदम

सांप नुकसान न पहुंचाने वाला हो या बेहद जहरीला, भास्कर हर रेस्क्यू के दौरान गजब के दृढ़ संकल्प के साथ काम करते हैं. सांप की जान बचाना, इंसानों की सुरक्षा करना और बचाए गए सांप को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ना ही उनकी जिंदगी का एक मात्र मिशन है. अपने इसी मिशन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की 2022 में उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी.

ड्यूटी के दौरान उन्हें बेहद जहरीले रसेल वाइपर सांप ने काट लिया था, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई थी. तब उन्हें लगातार 11 दिन गहन चिकित्सा निगरानी कक्ष यानी आईसीयू में रहना पड़ा था. ऐसे खौफनाक अनुभव के बाद बहुत से लोग शायद सांपों की सेवा का यह सफर खत्म कर देते. लेकिन भास्कर का हौसला नहीं टूटा. वह स्वस्थ हुए और फिर उसी मिशन में लौट आए, जिसमें उनकी जान तक जाते-जाते बची थी.

जी मीडिया एक्सक्लूसिव

जी मीडिया से खास बातचीत में भास्कर नायडू ने सांपों को बचाने के लिए जीवन समर्पित करने के पीछे की प्रेरणादायक कहानी साझा की.

जी मीडिया ने उनके असाधारण सेवाभाव को करीब से देखते समझते हुए अपने कैमरे में भी कैद किया. काम के प्रति उनके समर्पण को देखकर ये पता चलता है कि ऐसा करना हर किसी के बस की बात नहीं है.

उनके हर रेस्क्यू के पीछे एक गहरा विश्वास छिपा है. भास्कर मानते हैं कि उनकी ये सेवा भगवान तिरुपति बालाजी के आशीर्वाद से ही संभव हो पाती है.

नायडू का मानना है कि शेषाचलम के जंगलों में सांपों की रक्षा करना और तिरुमाला आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा करना, दोनों ही यहां के अधिष्ठाता भगवान की सेवा के रूप हैं.

'आखिरी सांस तक भगवान बालाजी की सेवा करता रहूंगा'

भास्कर नायडू के लिए तिरुमाला की पवित्र पहाड़ियां सिर्फ काम करने की जगह नहीं हैं. इसलिए वह अपने काम को एक आध्यात्मिक जिम्मेदारी समझकर पूरा करते हैं.

उनके लिए हर सफल रेस्क्यू भगवान वेंकटेश्वर की सेवा करने का एक अवसर है. उनका विश्वास है कि सांप के जानलेवा हमले का सामना करने के बाद भी काम जारी रखने की ताकत उन्हें भगवान के आशीर्वाद से ही मिलती है.

उनका संदेश है कि सांप भी हमारे इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें मारने के बजाय संरक्षण दिया जाना चाहिए.

भास्कर नायडू ने कहा, 'मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, वो भगवान बालाजी के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है. इसलिए आखिरी सांस तक भगवान बालाजी की इसी तरह सेवा करता रहूंगा.'

टीटीडी ने किया सम्मानित

भास्कर नायडू के लिए ये सिर्फ उनकी जिंदगी के उस सफर को बयां करने के लिए काफी हैं, जो दूसरों की जान बचाने के लिए समर्पित रही है. भगवान वेंकटेश्वर की धरती जिसे भूलोक का बैकुंठ कहा जाता है. लाखों लोग उनका आशीर्वाद लेने जहां पहुंचते हैं, वहीं एक शख्स अपनी तरह से अनोखी भक्तिभाव में डूबकर काम कर रहा है. नायडू उस जीव को जीने का मौका दे रहे हैं, जिनसे इंसान सबसे ज्यादा डरते हैं.

टीटीडी के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी वेंकैया चौधरी ने नायडू की कड़ी मेहनत को पहचाना. इसके बाद उन्हें टीटीडी की ओर से नियमित वेतन और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं दी गईं. तिरुपति में आने वाले श्रद्धालु हो यां तिरुमाला के निवासी, सभी नायडू के सेवा भाव की सराहना कर रहे हैं.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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