Zee Special: अल्लाह से तौबा करें सारा अली खान... कर दिया सबसे बड़ा गुनाह, फतवे पर बोले मुस्लिम स्कॉलर
बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान पर केदारनाथ मंदिर में जाने और फतवा जारी होने पर विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर लोग इसे उनकी निजी पसंद बता रहे हैं, वहीं मुस्लिम स्कॉलर ने इसे सबसे बड़ा 'गुनाह' बता दिया है.
केदारनाथ मूवी फेम सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा पर जमकर बहस छिड़ गई है. उत्तर प्रदेश के इस्लामिक मौलवी मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी द्वारा फतवा जारी किए जाने के बाद यह अब धार्मिक विवाद बन गया है. इतना ही नहीं एक और मुस्लिम स्कॉलर नाजिम खान ने इसे सही ठहराते हुए सारा अली खान द्वारा केदारनाथ मंदिर में पूजा करने को सबसे बड़ा गुनाह बताया है. Zee News से Exclusive बातचीत में मुस्लिम स्कॉलर नाजिम खान ने इस मुद्दे पर क्या-क्या कहा, जानिए.
सवाल : क्या सारा का केदारनाथ में पूजा करना शरिया के तहत जायज है?
जवाब: सारा अली खान ने अगर केदारनाथ में पूजा-अर्चना की है तो ये शरिया के मुताबिक बिल्कुल गलत है. शरिया के अंदर अल्लाह के साथ किसी और को शामिल किया जाता है तो यह बहुत बड़ा शिर्क (अल्लाह की सत्ता या उसकी पूजा में किसी अन्य की पूजा करके उसे भागीदार बनाना) माना जाता है. सारा अली खान ने शरिया के खिलाफ जाकर अलग मैसेज देने की बात कही है जिससे करोड़ों लोगों के दिल को ठेस पहुंची है. यह बहुत गलत है.
सवाल : क्या सारा अली खान के खिलाफ फतवा जारी करना सही है?
जवाब : जी फतवा जारी करना सही है. मजहब-ए-इस्लाम को मानने वाला यदि दूसरे धर्म के भगवान की पूजा करे तो उसके पास सिर्फ 2 ही रास्ते हैं, या तो अल्लाह से तौबा कर ले या फिर उसके खिलाफ फतवा दिया जाए. लिहाजा केदारनाथ में सारा अली खान द्वारा पूजा करने पर फतवा जारी करना सही है.
सवाल : तो क्या सारा अली खान को तौबा करना चाहिए?
जवाब : मजहब-ए-इस्लाम में साफ कहा गया है कि आपने अल्लाह के सिवाय किसी और को भगवान माना या उसकी पूजा की तो ये सबसे बड़ा गुनाह है. अल्लाह को शिर्क (अल्लाह की सत्ता या उसकी पूजा में किसी अन्य की पूजा करके उसे भागीदार बनाना) पसंद नहीं है. अल्लाह सिर्फ एक है और हर मुसलमान को सिर्फ उसकी ही इबादत करनी चाहिए. यदि कोई महिला या पुरुष दूसरे धर्म की पूजा पद्धति को अपनाते हैं, अन्य भगवान की इबादत करते हैं तो शरिया उसको बल्किुल स्वीकार नहीं करेगा. शरिया अल्लाह के एक होने की बात कहता है.
सारा अली खान ने मजहब-ए-इस्लाम से अलग हटकर पूजा अर्चना की है और ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है. लेकिन अल्लाह गुनाह माफ करने वाला है, यदि सारा अली खान सच्चे दिल से अल्लाह से तौबा करें तो अल्लाह माफ कर देगा. वह रहम करने वाला है और सभी के गुनाहों को माफ कर देता है. इसलिए सारा अली खान को अपना गुनाह मानते हुए माफी मांगनी चाहिए.
सवाल : यदि शरीयत की रोशनी में वो मुजरिम हैं, गुनहगार हैं तो इस्लाम में इस बारे में क्या कहा गया है?
जवाब : इस्लाम सभी धमों का सम्मान करता है. लेकिन पूजा-पद्धति इस्लाम के लिए एक ही है, अल्लाह एक है. मजहब ए इस्लाम को मानने वाला सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है उसके सिवाय किसी की इबादत नहीं करता है. कोई दूसरे भगवान की इबादत करे तो वो मजहब ऐ इस्लाम में गुनेहगार है.
सवाल: क्या गैर हिंदू किसी भी मंदिर में दर्शन कर सकते हैं?
जवाब: मुस्लिमों की बात करें तो उनको मंदिर में नहीं जाना चाहिए, न वहां के धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लें. आपको शांति-अमन के लिए प्रार्थना करनी है तो आप मस्जिद में जाइए, वो अल्लाह का घर है. आप वहां इबादत कीजिए.
बता दें कि इससे पहले भी सारा अली खान केदारनाथ धाम की यात्रा कर चुकी हैं और वहां पूजा-अर्चना कर चुकी हैं. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं.