)
'हम दोजख में ही रह रहे हैं, जहां न बिजली है न पानी, न खाने को रोटी. लोग लड़ रहे हैं, मर रहे हैं. अब इससे बड़ी दोजख क्या होगी?' पाकिस्तान की जमीनी हकीकत पर बात करते हुए PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा ने यह बात कही. उनका दावा है कि पाकिस्तान आर्थिक संकट, बेरोजगारी और अंदरूनी संघर्षों में बुरी तरह फंस चुका है. इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक दावा किया कि पाकिस्तानी सेना के हजारों अधिकारियों के इस्तीफे GHQ में लंबित हैं और कई जवान बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में ऑपरेशन करने से इनकार करने के बाद जेलों में कैद हैं. यहां पढ़ें अमजद अयूब मिर्जा से की गई पूरी बातचीत.
एंकर श्रद्धा जैन: आप लंबे समय से पाकिस्तान के हालात को बहुत करीब से देख रहे हैं. वहां की ऐसी कौन सी सच्चाई है, जो दुनिया आज भी नहीं जानती है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा : सबसे बड़ी चीज जो लोग नहीं समझ रहे हैं वो ये है कि पाकिस्तान अंदर से टूट चुका है. पाकिस्तान नाम की कोई चीज ही नहीं रही अब पाकिस्तान में. ना ही पाकिस्तान का एक यूनिफार्म पब्लिक नैरेटिव रहा है. पाकिस्तान के हर राज्य की अवाम (जनता) का रुख अलग-अलग है. हां, केवल कुछ ही चीजें ऐसी हैं जिन पर अधिकांश पाकिस्तानी एकमत हैं. मिसाल के तौर पर सभी लोग पाकिस्तानी फौज और मौजूदा सरकार के खिलाफ हैं. यहां की हिप्पोक्रेसी के खिलाफ हैं.
एंकर श्रद्धा जैन: तो क्या यह कह सकते हैं कि पाकिस्तान टुकड़े-टुकड़े हो गया है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा : जी, बिल्कुल पाकिस्तान टुकड़े-टुकड़े हो चुका है. इसमें दरारें तो पहले ही पड़ चुकी थीं. फिर चाहे भाषा, बुनियादी चीजों के हवाले से बात करें या आर्थिक शोषण की बात करें. ये दरारें इतनी फैलती गईं कि मुल्क अंदर से टूट गया है.
एंकर श्रद्धा जैन: हाल ही में Pew Survey की रिपोर्ट आई है, उसमें सामने आया है कि पाकिस्तान की 91 फीसदी आबादी आज भी भारत से नफरत करती है. पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बेहद खराब हैं, वो दुनिया के सामने भीख मांग रहा है. महंगाई, बेरोजगारी से जनता की हालत खराब है. फिर भी क्या लोग नफरत करने में समय और ऊर्जा बर्बाद करना अफोर्ड कर सकते हैं?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा : मैं इन आंकड़ों को नहीं मानता हूं. 10 हजार लोगों पर सर्वे करके आप यह नहीं कह सकते कि पाकिस्तानी भारत से नफरत करते हैं. अलग-अलग राज्यों में रहने वालों की राय अलग-अलग है. सिंध, खैबर पख्तूनवा और बलूचिस्तान जैसे कुछ राज्यों के लोग हिंदुस्तान से नफरत नहीं करते, बल्कि वे तो मुश्किल में हिंदुस्तान को ही पुकारते हैं. हां, पंजाब के जो सुन्नी हैं वे भारत के खिलाफ हैं. नफरत शब्द का इस्तेमाल तो मैं उनके लिए भी नहीं करूंगा.
इसके अलावा मदरसे के 30-40 लाख बच्चे हैं, उन्हें इन लोगों में शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा वो बिजनेसमेन हैं जो रुलिंग पार्टी के साथ जुड़कर कारोबार कर रहे हैं. इन लोगों के इंट्रेस्ट भारत के खिलाफ रहने में ही हैं, तो वे हैं. जिन लागों का 80 साल से ब्रेनवॉश किया गया है. जिन्हें यह बताया गया है कि फौज चली गई तो उनका बजट कम कर दिया जाएगा और हिंदुस्तान आपको खा जाएगा. फिर मजहब की बुनियाद पर उनमें छोटी सोच पैदा की गई है कि आपको दुनिया को इसी चश्मे से देखना है. इन कारणों से वो भारत के खिलाफ हैं. ऐसे में ये कहना कि 91 फीसदी पाकिस्तानी लोग भारत के खिलाफ हैं, ये एग्जेजेरेटेड फिगर है.
एंकर श्रद्धा जैन: अभी पूरी दुनिया में Gen Z का जलवा है. पाकिस्तान के Gen Z के पास सोशल मीडिया के जरिए जो चीजें आ रही हैं, उससे उन लोगों की भारत को लेकर क्या आम राय बन रही है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: इस मामले में भी ऐसा ही है कि अलग-अलग राज्यों के युवा भारत को लेकर बंटे हुए हैं. बलूचिस्तान का जो Gen Z जो है, वो आजादी चाहता है. वे भारत को बहुत पसंद करते हैं और कभी भी आप उनको भारत के खिलाफ कुछ भी गलत कहते हुए नहीं सुनेंगे. बल्कि वे तो कहते हैं कि जब हम आजाद होंगे तो हम भारत के साथ अच्छे ताल्लुकात रखेंगे. ऐसा ही सिंध के युवाओं के साथ है.
एंकर श्रद्धा जैन: भारत और पाकिस्तान के बिगड़े संबंधों के पीछे पाकिस्तान ही वजह रहा है. फिर चाहे वो 26/11 का हमला हो, पठानकोट का आतंकी हमला हो या पिछले साल पहलगाम में हुआ हमला हो. इसके बारे में पाकिस्तान के लोग क्या राय रखते हैं?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: उनकी राय है कि पाकिस्तान की सरकार असफल है. वे बुनियादी मसलों से ही निपटने में नाकाम हैं. वे लोगों से कह रहे हैं कि उन्हें मरने के बाद दोजख मिलेगी. तब लोग कहते हैं कि हम दोजख में ही तो रह रहे हैं तो अब और कौन सी दोजख हो सकती है.
ना पानी है, ना रोटी है. दिन ब दिन महंगाई बढ़ती जा रही है. नौकरियां नहीं हैं. बहुत बड़े पैमाने पर लेऑफ हो रहे हैं. यहां तक कि पाकिस्तानी आर्मी के अंदर लोग बड़े पैमाने पर रिजाइन कर रहे हैं. वे लोग मिलिट्री ऑपरेशंस और युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं.
एंकर श्रद्धा जैन: ये तो चिंताजनक बात है कि पाकिस्तान आर्मी के ऑफिसर्स इस्तीफे दे रहे हैं. क्या आप इससे जुड़ा डेटा बता सकते हैं, उनके इस्तीफों की वजहें क्या हैं?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: मेरे पास फिक्स डेटा तो नहीं हैं, क्योंकि फौज ने डेटा जारी नहीं किया है. लेकिन फौज के अंदर जो लोग हैं, वो ये बताते हैं कि कम से कम 2,500 से 3,000 इस्तीफे आर्मी अधिकारियों के पाकिस्तान के General Headquarters (GHQ) में पेंडिंग पड़े हैं. इसके अलावा बेशुमार लोग हैं जो मेडिकल लीव या अन्य किसी बहाने से लंबी छुट्टी पर हैं. पाक आर्मी के सिपाहियों का भी यही हाल है.
इस वक्त पाकिस्तान की जेलें ऐसे पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों से और नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स से भरी हुई हैं, जिन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लड़ने से इनकार कर दिया है. उनको अरेस्ट करके जेलों में डाला हुआ है.
एंकर श्रद्धा जैन: पाकिस्तान में आर्मी में नौकरी करने वालों को प्रीमियम क्लास में गिना जाता है, जब लोग उसमें भी काम नहीं करना चाहते हैं तो फिर वे अपना भविष्य कहां देख रहे हैं? आज की युवा पीढ़ी को क्या लगता है कि पाकिस्तान में उनका भविष्य है या उनका सपना सिर्फ यही रह गया है कि वे देश छोड़कर बाहर जाएं और वहां कुछ करें?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: पाकिस्तान में बहुत महंगाई और गरीबी है. वे जीने के लिए बुनियादी चीजें नहीं जुटा पा रहे हैं. मैं कई ऐसे लोगों को मैं जानता हूं जो कंजर्वेटिव मुस्लिम फैमिली थीं, लेकिन अब वे भी मजबूर हो गए हैं और अपनी औरतों से कह रहे हैं कि चादर और चारदीवारी छोड़ो, बाहर जाकर जॉब करो. क्योंकि घर का खर्च ही नहीं चल पा रहा है.
बहुत बुरी सूरत-ए-हाल है. आलम ये है कि एक वक्त के खाने के लिए औरतें अपनी इज्जत नीलाम करने पर तैयार हैं. ये स्थिति कई जगहों की है- फिर चाहे वो लाहौर हो या रावलपिंडी या मुल्तान और फैसलाबाद.
एंकर श्रद्धा जैन: इसका सॉल्यूशन क्या है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: इसका एक ही सॉल्यूशन है कि पाकिस्तान के अंदर कोई एक ऐसा रीवॉल्यूशन आए जिसमें ये पूरा सिस्टम ही उलट दिया जाए. फौज को तोड़कर नए सिरे से बनाएं. सारे इंस्टीट्यूशन पर जो लोगों ने कब्जा कर रखा है, उनको रीफॉर्म करें. लेकिन ये सब सिर्फ ख्वाब में हो सकता है, हकीकत में नहीं. क्योंकि पाकिस्तान उस स्थिति से बहुत आगे निकल चुका है, जहां ऐसे बड़े बदलाव किए जा सकें.
एंकर श्रद्धा जैन: पाकिस्तान के पास चीन और रूस हैं, जिन्हें वह अपना बहुत अच्छा दोस्त मानता है, तो क्या वो मदद नहीं कर रहे हैं? उनकी मदद का स्तर क्या है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: 1949 में जब से चीन आजाद हुआ है, उसका इतिहास उठाकर देख लें. वो हमेशा से हिप्पोक्रिटिकल रहे हैं. उसमें उनके दोस्त केवल वही रहते हैं, जिनसे उनको फायदा हुआ है. ये फायदा भी दो किस्म का है. एक स्ट्रेटेजिक डेप्थ का फायदा और दूसरा आर्थिक विस्तार को बढ़ावा. यानी कि वो दुश्मन पर नजर रख सके, उस पर हमला कर सके और अपनी आर्थिक स्थिति दिनोंदिन मजबूत कर सकें.
असल हालात की बात करें तो चीन, पाकिस्तान को निचोड़ रहा है. चीन ने पाकिस्तान को इतना कर्ज दे दिया है खासतौर पर CPEC (चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर) के हवाले से कि पाकिस्तान जरा सा इधर-उधर होता है तो वो उसकी गर्दन पर अंगूठा रख देते हैं कि कर्ज वापस करो. ये नहीं माने तो चीन की आर्मी पाकिस्तान को रौंदते हुए आ जाएगी. पहले ही चीन की फौज PoJK में, बलूचिस्तान में मौजूद है. वे टेक्निीशियन, इंजीनियर्स आदि के भेष में यहां मौजूद हैं और चीन PoJK से भारत पर नजर रख रहा है.
एंकर श्रद्धा जैन: पाकिस्तान की जमीनी हकीकत आज के समय में क्या है, जो पाकिस्तान छुपा रहा है और दुनिया जानना चाहती है?
PoK एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा: पाकिस्तान की दो ही जमीनी हकीकत हैं. एक तो मरने की और एक मारने की. यानी कि हर रोज पाकिस्तानी फौजी बलूचिस्तान में दर्जनों की तादाद में मारे जा रहे हैं. अभी दो दिन पहले ही BLA की रिपोर्ट आई है कि उन्होंने 33 पाकिस्तानी फौजी मारे हैं. ऐसा वहां रोज हो रहा है. दूसरा PoJK में पाकिस्तानी फौजें शांति से विरोध कर रहे लोगों पर निशाने लगा रही हैं. पिछले 2 महीनों में यहां 100 से ज्यादा लोगों को मारा गया है. इसी तरह खैबर पख्तूनख्वा में लोगों को मार रहे हैं. तो पाकिस्तान की जमीनी हकीकत ये है कि पाकिस्तान के अंदर एक हाइब्रिड सिविल वॉर चल रही है. हर तरफ कुश्त-ओ-खून (कत्लेआम) का बाजार गर्म है और उसको पाकिस्तान की रियासत एड्रेस ही नहीं कर रही है. वो ईरान और अमेरिका के सुलह कराने के लिए निकले हुए हैं. अपने घर में आग लगी हुई है और दूसरे का घर बुझाने जा रहे हैं. इसकी वजह से भी युवाओं का मोहभंग हुआ है.