How Xi Jinping Security System Works: जितना बड़ा नाम उतना UR बड़ा खतरा. जितनी बड़ी ताकत, उतने ज्यादा चैलेंज. यही वजह है कि दुनिया के सबसे बड़े पावर सेंटर में जब कोई बड़ा नेता कदम रखता है तो उसके साथ सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं चलता. एक ऐसा सुरक्षा घेरा भी चलता है जिसकी हर परत के पीछे कई एजेंसियों की तैयारी होती है. जमीन से लेकर आसमान तक, सामने से लेकर पर्दे के पीछे तक हर संभावित खतरे का आकलन होता है.
जिन नेताओं का एक फैसला दुनिया की दिशा बदल सकता है. उनके आसपास खतरा भी उतना ही बड़ा होता है. जब बात वर्ल्ड लीडर्स की हो तो सिक्योरिटी का मसला सिर्फ इंसानों और हथियारों की गिनती तक सीमित नहीं रह जाता. इसके पीछे होती है महीनों की प्लानिंग, खुफिया इनपुट, टेक्नोलॉजी और हर सेकेंड बदलती रणनीति. रास्ते से लेकर ठिकाने तक, मंच से लेकर मीटिंग रूम तक माइक्रो डिटेलिंग.
सवाल ये है कि आखिर दुनिया के सबसे ताकतवर चेहरों के लिए ये सुरक्षा कितनी बड़ी और कितनी गहरी होती है. आज की तारीख में खतरा सिर्फ बंदूक लेकर सामने खड़े किसी हमलावर से नहीं होता. आज चुनौती कई गुना बड़ी है. जिनका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. ऐसे में किसी बड़े नेता की सुरक्षा का मतलब सिर्फ उसे घेरकर चलना नहीं बल्कि हर उस खतरे को पहले पहचानना है, जो दिखाई भी नहीं देता. यहीं से शुरू होती है उस सुरक्षा की असली कहानी.
TV पर पहली बार जिनपिंग का 'सिक्योरिटी बबल'! 'शी का 'सुरक्षा कवच'.. जमीन से अंतरिक्ष तक !
— Zee News (@ZeeNews) September 12, 2026
यही वजह है कि जिस शख्स की एक झलक के लिए दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं. उसके एक कदम के साथ सुरक्षा की कई परतें भी चलती हैं. कौन कहां तैनात है. कौन नजर रख रहा है. कौन सा रास्ता सुरक्षित है और किसी भी आपात स्थिति में क्या होगा. इन सवालों के जवाब पहले से तैयार रखे जाते हैं. आज के जी स्पेशल में जानिए, दुनिया के एक बेहद ताकतवर नेता के सुरक्षा घेरे की वो कहानी. जिसे आम तौर पर पर्दे के पीछे ही रखा जाता है.
तारीख 12 सितंबर, दिन शनिवार. मौका था ब्रिक्स समिट का और करीब 7 साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हिंदुस्तान की सरजमीं पर कदम रखना. ये तमाम बातें किसी भी हाई सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को मैक्सिमम VVIP सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में तब्दील करने के लिए काफी हैं.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विमान एयर चाइना Boeing 747-8I दोपहर 11.41 मिनट पर जैसे ही पालम एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. भारतीय एजेसियों के साथ-साथ चीन की प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी टीम भी पूरी तरह अलर्ट हो गईं.
ज़मीन से लेकर आसमान तक जिनपिंग की सुरक्षा का अभेद्य कवच तैयार किया गया है, जिसमें सिर्फ बंदूकधारी कमांडो नहीं बल्कि उनके आसपास एक अदृश्य सुरक्षा का घेरा भी है जिसे भेद पाना लगभग नामुमकिन है.
एक बड़े से बबल के अंदर जिनपिंग सूट पहने खड़े थे. बबल के आसपास बंदूक लिए काले सूट में कई सुरक्षाकर्मी कर्मी तैनात थे. बबल के अंदर खड़े जिनपिंग चलने लगे तो बबल भी घूमता जा रहा था. सुरक्षाकर्मी बबल को घेर कर चल रहे थे.
जिनपिंग जब भी बीजिंग से बाहर निकलते हैं तो किसी भी देश के दौरे में वो अपने इसी अदृश्य सुरक्षा घेरे में रहते हैं, इसे कहा जाता है 'चाइनीज बबल'. ये ऐसा सुरक्षा कवच है जिसके अंदर बाहरी दुनिया का कोई भी तत्व बिना जांच के जिनपिंग के संपर्क में नहीं आ सकता.
इस बबल में सुरक्षा के कई तरह के लेयर हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा में एडवांस सिग्नल जैमर्स सक्रिय रहते हैं. जो निश्चित दायरे में सभी मोबाइल, ड्रोन, सैटेलाइट सिग्नल्स ब्लॉक कर देते हैं. जिससे कोई भी डिजिटल हमला या रिमोट ब्लास्ट असंभव हो जाता है. जिनपिंग के सूट में सीक्रेट बुलेटप्रूफ परत होती है. कपड़ों एंटी केमिकल फैब्रिक होती है.
जिनपिंग सिर्फ अपनी बख्तरबंद कार से चलते हैं. जिस होटल में रुकते हैं वहां हवा और पानी तक सुरक्षा घेरे में होती है. जिनपिंग जिस फ्लोर पर रुकते हैं वहां कोई नहीं जा सकता.
चाहे हवा हो या पानी. जिनपिंग के कमरे में जाने वाली हवा को विशेष चीनी मशीनों से री-फिल्टर किया जाता है. उनके बेडरूम और मीटिंग रूम्स में ऐसे एयर प्यूरीफायर और सेंसर लगाए जाते हैं, जो हवा में मौजूद किसी भी तरह के बारीक से बारीक केमिकल या गैस को सेकंड के सौवें हिस्से में पहचानकर अलर्ट जारी कर देते हैं. यानी, जिनपिंग जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वो भी 100 प्रतिशत सुरक्षा के घेरे में होती है.
बुलबुले की दूसरी और सबसे संवेदनशील परत है खान-पान, भारत के बेहतरीन शेफ जिनपिंग के लिए खाना बना तो सकते हैं, लेकिन उसे सीधे जिनपिंग की टेबल तक नहीं भेजा जा सकता. जिनपिंग के साथ बकायदा 'फूड टेस्टर्स' और शेफ की एक सीक्रेट टीम रहती है, जो होटल की रसोई तक पहुंच रखते हैं ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि भोजन पूरी तरह सुरक्षित और राष्ट्रपति की पसंद के मुताबिक तैयार किया गया है.
नियम के मुताबिक, होटल के जिस हिस्से में जिनपिंग का खाना पकता है, उसे चीनी सुरक्षा दस्ता यानी सेंट्रल गार्ड ब्यूरो अपने नियंत्रण में ले लेता है. भोजन में इस्तेमाल होने वाला पानी, खास तरह के मसाले और यहां तक कि कुछ सामग्रियां भी चीन से ही एयरलिफ्ट की जाती हैं. खाना बनने के बाद, जिनपिंग के खाने से पहले उनके निजी फूड टेस्टर्स उस भोजन को चखते हैं. इसके बाद बकायदा लैबोरेट्री टेस्टिंग के जरिए ये सुनिश्चित किया जाता है कि खाने में कोई धीमा जहर या रेडियोएक्टिव तत्व तो नहीं है. जब ग्रीन सिग्नल मिलता है, तभी भोजन जिनपिंग की थाली तक पहुंचता है.
शी जिनपिंग की सुरक्षा की परतों की ये तो बस शुरुआत है. चीनी राष्ट्रपति के लिए सिर्फ बाहर की सुरक्षा नहीं रहती बल्कि वो अपने शरीर पर भी किला पहने रहते हैं. जिनपिंग के सूट और जैकेट के अंदर हल्की बुलेटप्रूफ लेयर या बैलिस्टिक फैब्रिक लगा होता है. जिससे नजदीकी हमला या गोलीबारी से सुरक्षा मिलती है. कुछ खास कपड़ों पर एंटी-केमिकल कोटिंग भी होती है, जो जैविक या रासायनिक हमले को सोखने नहीं देती.
शी जिनपिंग जो जूता पहनते हैं, वो कोई आम जूता नहीं बल्कि अपने आप में एक जासूस है. जिसमें छिपी एडवांस डिफेंसिव टेक्नोलॉजी की कई खासियत जिनपिंग को प्रोटेक्ट करने वाले स्पेशल शू.
जिसके सोल और अंदरूनी हिस्से में सैन्य-ग्रेड के आर्मर फैब्रिक की परत होती है. जो सुनिश्चित करता है कि उनके पैरों को किसी भी तरह की नुकीली चीजें, कांच के टुकड़े, या छोटे छर्रों के हमलों से बचाया जा सके.
उनके जूते पूरी तरह से कस्टमाइज्ड होते हैं और इनमें एडवांस शॉक-एब्जॉर्बिंग तकनीक होती है. जो इमरजेंसी में बिना किसी शारीरिक खिंचाव या लड़खड़ाहट के तेजी से दौड़ने या सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में मदद करती है.
ऐसा कहा जाता है कि कि उनकी सुरक्षा टीम यानी CGB आपातकालीन स्थिति में उनकी सटीक लोकेशन जानने के लिए जूतों में एक बेहद छोटी, एनक्रिप्टेड लोकेशन ट्रैकर चिप का इस्तेमाल करती है.
चीनी राष्ट्रपति के सुपर स्पेशल सिक्योरिटी के लिए तैयार सिक्योरिटी बबल की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. इस सुरक्षा बुलबुले को टूटने से बचाने की जिम्मेदारी चीन की सबसे वफादार एजेंसी सेंट्रल गार्ड ब्यूरो पर है. ये कोई सामान्य सैनिक नहीं हैं. इन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति पूरी वफादारी के साथ साथ मार्शल आर्ट्स, अचूक निशानेबाजी और मनोवैज्ञानिक युद्ध में महारत के बाद चुना जाता है.
जिनपिंग के चलते समय ये कमांडो उनके बेहद करीब, एक इंसानी दीवार की तरह चलते हैं. इनके हाथों में दिखने वाले साधारण से ब्रीफकेस दरअसल 'बैलिस्टिक शील्ड्स' हैं. जो किसी भी अप्रत्याशित हमले या गोलीबारी के हालातों में एक क्लिक करते ही खुलकर एक बुलेटप्रूफ दीवार बन जाते हैं.
स्पेशल कमांडो के हाथों में मौजूद ये सुपर स्ट्रॉन्ग दीवार जिनपिंग को किसी भी खतरे से तुरंत कवर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा बबल की सिक्योरिटी के लिए तैनात कमांडो का खुद का एक पोर्टेबल कम्यूनिकेशन नेटवर्क होता है. जिसे दुनिया की कोई भी एजेंसी न तो टैप कर सकती है और न ही जैम कर सकती है.
ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए जिनपिंग के साथ 67 लोगों का एक ग्रुप भी है. जिसमें सीनियर सीनियर नेता, राजनयिक, सुरक्षा अधिकारी और मेडिकल स्टाफ शामिल हैं. ऐसे में जिनपिंग के साथ साथ पूरी चाईनीज डेलीगेशन की सिक्योरिटी के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं.
शी जिनपिंग दिल्ली के जिस होटल में रुके हैं उसके ऊपर नो फ्लाई जोन है. जहां केवल सुरक्षा काफिले के ड्रोन्स को ही उड़ने की इजाजत है. होटल में जिनपिंग के आने से पहले एंटी-न्यूक्लियर, एंटी-रेडिएशन और एंटी-बायोकेमिकल खतरों की पूरी जांच की गई है.
यहां तक कि जमीन के नीचे मौजूद पाइपलाइन नेटवर्क को भी स्कैन किया जा चुका है. उनके गुजरने वाले रास्तों पर फेशियल रिकॉग्निशन कैमरे और आधुनिक स्कैनर लगाए गए हैं. जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ सकते हैं.
शी जिनपिंग विदेशी दौरों पर किसी दूसरे देश की गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करते. वो चीन से विशेष विमान के जरिए अपनी खुद की बख्तरबंद सरकारी लिमोजिन साथ लेकर चलते हैं, जो पूरी तरह बुलेटप्रूफ और बम-प्रूफ होती है.
ये सिर्फ एक कार नहीं, बल्कि पहियों पर चलता हुआ एक परमाणु बंकर है. इसकी बॉडी रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और बम धमाकों को आसानी से झेल सकती है. लेकिन इस गाड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसके 'बबल प्रोटोकॉल' से जुड़ी है. अगर गाड़ी के बाहर कोई बड़ा रासायनिक या गैस हमला होता है, तो ये कार पूरी तरह से एयर-टाइट बंद हो जाती है.
इसके अंदर अपनी खुद की ऑक्सीजन सप्लाई प्रणाली है़. जिससे बाहर जहरीली गैस होने के बावजूद अंदर बैठे जिनपिंग आराम से सांस ले सकते हैं.
चीन में कम्यूनिस्ट शासन व्यवस्था है. चीन में आम नागरिकों को वैसे अधिकार नहीं हैं. जैसे किसी लोकतांत्रिक मुल्कों में मिलते है. आम लोगों से लेकर टॉप लेवल पर बैठे लोगों से जुड़ी चीजें भी बेहद सीक्रेट रहती है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ऐसी बेहद गुप्त व्यवस्था के तहत काम करते हैं. जो उनके दौरों, फैसले लेने की प्रक्रिया की जानकारी को जनता से छिपाकर रखती है.
राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था को सबसे रहस्यमयी माना जाता है. जिनपिंग कहीं जाएंगे या नहीं या कहां, कब और कैसे जाएंगे. इसको लेकर छोटी से छोटी बात को भी आखिरी वक्त तक सीक्रेट रखा जाता है. 12 और 13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि भी 48 घंटे पहले यानी 10 सितंबर को की गई. मतलब जिनपिंग के आने को लेकर चीन की तरफ से आखिरी वक्त तक सस्पेंस और सिक्योरिटी मेजर्स का माइंड गेम खेला जाता रहा.
जिनपिंग की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार CGB आखिरी वक्त तक शी के लिए तैयार एक-एक व्यवस्था का जायजा लेती रही. आपको जानकर हैरानी होगी कि शी जिनपिंग के सिक्योरिटी बबल का हिस्सा सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि बादलों के पार भी है.
शी जिनपिंग के सुरक्षा कवच का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा अंतरिक्ष से निगरानी का है. चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से भी उन पर और उनके पूरे रूट पर पैनी नजर रखती है.
चीन अपने विशाल सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल जिनपिंग के सुरक्षा चक्र को मजबूत करने और किसी भी संभावित खतरे को पहले ही भांपने के लिए करता है. चीन का अपना बेइदोउ सैटेलाइट नेटवर्क है, जो अमेरिका के GPS की तरह काम करता है.
जिनपिंग का काफिला जब भी कहीं आगे बढ़ता है, तो उनकी गाड़ियों की रियल-टाइम लोकेशन बीजिंग के कमांड सेंटर तक पहुंच जाती है. इससे विदेशी दौरों पर भी चीन को किसी दूसरे देश के जीपीएस पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
यानी शी जिनपिंग जहां भी जाते हैं. उनके साथ सिर्फ एक काफिला नहीं चलता बल्कि जमीन से आसमान तक फैला एक ऐसा सुरक्षा चक्र चलता है. जिसकी हर परत का मकसद सिर्फ एक होता है खतरे को जिनपिंग तक पहुंचने से पहले ही खत्म कर देना. भारत ने मेहमान नवाज़ी और सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी है. दिल्ली पुलिस, एनएसजी और खुफिया एजेंसियों ने जमीन से लेकर आसमान तक अभूतपूर्व घेरा तैयार किया है. उसके बाद भी शी जिनपिंग की सुरक्षा को उनका ये 'चाइनीज बबल' भी सुनिश्चित करता है.
(ब्यूरो रिपोर्ट, ज़ी मीडिया)