मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार से भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? H-1B वीजा और ट्रेड डील पर अब कैसा होगा US का रुख
यूएस के मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिक पार्टी हार गई है. सवाल उठ रहा है कि इस हार के बाद दुनिया को ट्रंप का कैसा रुख देखने को मिलेगा.
ट्रंप अपनी वीटो पावर से हार कर भी जीतना चाहते हैं, यानी बाजीगर बनना चाहते हैं. लेकिन ट्रंप की हार में दुनिया के कई देशों को अपनी जीत भी दिख रही है. आज आपको ट्रंप की हार का भारत और दुनिया पर पड़ने वाले असर के बारे में जानना चाहिए. ट्रंप की हार से जो देश सबसे ज्यादा खुश है, उसका नाम है ईरान.
ईरान में आज बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकले. ईरान में हर साल 4 नवंबर को नेशनल डे ऑफ फाइटिंग ग्लोबल अरोगेंस यानी दुनिया की बड़ी ताकतों के अहंकार के खिलाफ संघर्ष का दिन मनाया जाता है. साल 1979 में ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था. पुरानी सरकार के दौरान मारे गए छात्रों की याद में यह मार्च निकाला जाता है और इसी दिन हुई ट्रंप की हार ने ईरान के लोगों का जोश और बढ़ा दिया. इस रैली में अमेरिका और ट्रंप मुर्दाबाद के नारे लगाए गए.
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप का बहुमत खोना किस बात का संकेत?
ईरानी जनता और नेता, ट्रंप की हार को युद्ध के खिलाफ अमेरिकी जनता का फैसला बता रहे हैं. ईरान को लगता है कि अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप का बहुमत खोना इस बात का संकेत है कि अमेरिकी जनता ईरान से होने वाले संघर्ष के साथ नहीं है. नतीजे के बाद खाड़ी देशों का भी मानना है अब ट्रंप पर शांति समझौता करने का दबाव बढ़ सकता है. इसीलिए ईरान पर किसी बड़े पूर्ण सैन्य हमले की संभावना कम हुई है.
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया है. जनवरी तक का वक्त ईरान के लिए लिए खतरनाक है क्योंकि अमेरिका में नई संसद जनवरी तक काम संभालेगी. इसी बीच ट्रंप, ईरान पर हमला कर सकते हैं. यानी ईरान से अमेरिका के लंबे युद्ध की आशंका घटी है. लेकिन जनवरी तक सीमित हमले का जोखिम बरकरार है. ईरान में लंबे युद्ध की आशंका कम हुई है लेकिन ट्रंप की हार से रूस-यूक्रेन वॉर और भड़क सकती है.
अमेरिकी हथियार मिलने से यूक्रेन-रूस में भड़क सकती है जंग
ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता पर रोक लगा दी थी और रूस से प्रतिबंध हटाए थे. जिससे रिपब्लिकन सांसद भी नाराज हुए थे. अब कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से यूक्रेन के लिए नए सहायता पैकेज का प्रस्ताव लाया जा सकता है. अगर इस प्रस्ताव को नाराज रिपब्लिकन का थोड़ा समर्थन और दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो यह ट्रंप के वीटो को भी पीछे छोड़ सकता है. यूक्रेन को अमेरिकी मदद और हथियार मिले तो रूस से जंग और भड़केगी.
यूरोपीय देश जिन्हें अमेरिका का करीबी माना जाता था, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनसे अमेरिका का रिश्ता खराब हुआ है. मैक्रों और मेलोनी जैसी नेताओं की ट्रंप सार्वजनिक बेइज्जती कर चुके हैं. कनाडा को 51वां राज्य बनने का ऑफर दे चुके हैं. स्पेन जैसे देशों को ट्रंप धमकाते रहते हैं और जर्मनी- ब्रिटेन जैसे देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव डालते हैं. लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को तो ट्रंप ने उनके घर से किडनैप करवा लिया था. माना जा रहा है कि इस हार से व्यक्तिगत बेइज्जती और धमकियों का टोन थोड़ा नरम हो सकता है.
मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
आज आपको ट्रंप की हार के भारत पर पड़ने वाले असर को भी समझना चाहिए. अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स के मजबूत होने से ट्रंप की एकतरफा टैरिफ नीतियों पर लगाम लगेगी, जिससे भारत के लिए बेहतर शर्तों पर व्यापार समझौता करने का अच्छा मौका बनेगा. अमेरिकी संसद की फॉरेन अफेयर्स कमेटी पाकिस्तान के साथ ट्रंप प्रशासन के बढ़ते सामरिक और व्यावसायिक रिश्तों पर कड़ा रुख अपनाएगी. यानी पाकिस्तान को मिलने वाली अनुचित अमेरिकी मदद पर सवाल उठेंगे. इसलिए ये खबर भारत के हित में है.
अमेरिका में ज्यादातर लोगों का मानना है कि युद्ध से महंगाई बढ़ी है. ऐसे में अमेरिकी संसद ईरान युद्ध पर रोक लगाती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.
H-1B वीजा पर मिल सकती है छूट
इसके अलावा, डेमोक्रेटिक सांसद High-skill वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के प्रति नरम रुख रखते हैं. ऐसे में H-1B वीजा पर लगी भारी-भरकम फीस और कठोर नियमों की संसद में समीक्षा होगी, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यानी ट्रंप की हार में भारत के लिए अच्छी खबरें ज्यादा हैं. हालांकि डेमोक्रेट्स के ताकतवर होने से रूस से तेल खरीदने पर भारत के लिए पाबंदी का खतरा बढ़ सकता है.