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अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन ने ग्लोबल पॉलिटिक्स में एक नया इतिहास रच दिया है. इस बार के चुनावी नतीजे न केवल अमेरिकी राजनीति की दिशा तय कर रहे हैं, बल्कि भारतीय समुदाय और मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी बेहद खास साबित हुए हैं. सबसे बड़ा और चौंकाने वाला परिणाम इलिनॉय राज्य से आया है, जहां महज 23 वर्ष की उम्र में इतिहास रचने वाली भारतीय मूल की नबीला सैयद ने रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ को ढहाकर अपनी जीत का परचम लहरा दिया.
इलिनॉय स्टेट असेंबली के चुनावों में यह सीट लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही थी. यहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी का दबदबा था. लेकिन नबीला सैयद ने इस कठिन चुनौती को स्वीकार किया और जमीनी स्तर पर मतदाताओं से सीधे संवाद की रणनीति अपनाई. उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, स्थानीय करों में राहत और नागरिक अधिकारों जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया. मतदाताओं के साथ उनके जुड़ाव और जमीनी अभियान का ही परिणाम था कि रिपब्लिकन के मजबूत वोट बैंक में बड़ी सेंध लगी और नबीला ने एक ऐतिहसिक जीत दर्ज की.
महज 23 वर्ष की उम्र में चुनाव जीतकर नबीला सैयद ने इलिनॉय स्टेट असेंबली के इतिहास में एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया है. वे इस राज्य विधायिका में चुनी जाने वाली अब तक की सबसे कम उम्र की जनप्रतिनिधि बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में उम्र से अधिक दृष्टि, नीतियां और जनता से जुड़ाव मायने रखता है. एक युवा भारतीय-अमेरिकी महिला का इतनी कम उम्र में विधायी संस्था तक पहुंचना नए दौर की राजनीतिक सोच को दर्शाता है.
नबीला सैयद का संबंध भारत के हैदराबाद शहर से है, जहां से उनके माता-पिता अमेरिका जाकर बस गए थे. अमेरिका में ही पली-बढ़ीं नबीला ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. उनकी इस सफलता पर न केवल इलिनॉय के निवासी, बल्कि भारत और दुनिया भर में मौजूद भारतीय समुदाय गर्व महसूस कर रहा है. उनकी जीत यह भी दिखाती है कि भारतीय मूल के लोग अब अमेरिका की राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति में नीति-निर्माता के रूप में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.
इस बार के यूएस मिडटर्म इलेक्शन की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी रहा है. इन चुनावों में रिकॉर्ड तोड़ 82 मुस्लिम उम्मीदवार विभिन्न स्थानीय, राज्य और संघीय पदों पर निर्वाचित हुए हैं. यह आंकड़ा अमेरिकी इतिहास में मुस्लिम समुदाय के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है. इतनी बड़ी संख्या में विविध पृष्ठभूमि के मुस्लिम प्रतिनिधियों का चुना जाना अमेरिका के बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य और लोकतांत्रिक परिवेश का प्रमाण है.
नबीला सैयद की जीत और मुस्लिम उम्मीदवारों की यह सर्वकालिक रिकॉर्ड सफलता अमेरिकी राजनीति में विविधता, समावेशिता और युवा नेतृत्व की बढ़ती मांग को रेखांकित करती है. 23 वर्षीय नबीला ने यह दिखा दिया है कि यदि आपके पास स्पष्ट विजन और जनता की सेवा करने का इरादा हो, तो किसी भी बड़े राजनीतिक गढ़ को चुनौती दी जा सकती है. उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा दुनिया भर के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो राजनीति के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं.