SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

हादसा, हाहाकार और हलचल...ब्लडी हैंड्स के नारों से कांप रहा 'सिंहासन', क्या सर्बिया के शासन पर लगेगा ग्रहण?

साल 2024 में सर्बिया के नोवी साद स्टेशन पर छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे देश में स्टूडेंट्स और अवाम के विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जो अब तक जारी हैं. इस बीच देश में संसदीय चुनाव हो रहे हैं.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 24, 2026, 10:27 AM IST | Updated: Oct 24, 2026, 02:34 PM IST
Image Credit: सर्बिया में इस बार चुनाव दिलचस्प रहने वाले हैं.
Join

मध्य यूरोप यानी बाल्कन इलाके में बसा है सर्बिया, जहां चुनाव में कुछ घंटे बचे हैं. 25 अक्टूबर को संसदीय चुनाव में 250 सीटों के लिए वोट डाले जाने हैं. जीत के लिए जादुई आंकड़ा 126 है. इन चुनावों से सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के 12 साल के शासन पर खतरा मंडरा रहा है.

रोमानिया, बुल्गारिया, हंगरी से घिरे हुए इस देश में पिछले एक साल 11 महीने से छात्र-विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उसकी वजह है एक हादसा. 1 नवंबर 2024 को मुल्क के दूसरे सबसे बड़े शहर नोवी साद में रेलवे स्टेशन के बाहर कंक्रीट की छत गिर गई थी, जिसमें 16 लोग मारे गए थे. खराब कंस्ट्रक्शन क्वॉलिटी, लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण लोगों का गुस्सा भड़क उठा.

हादसे से राष्ट्रीय आंदोलन तक

शुरुआत हुई बेलग्रेड की यूनिवर्सिटी से, जहां छात्रों ने इसका जमकर विरोध किया. यह चिंगारी फिर बाकी यूनिवर्सिटीज में भी फैली और देखते ही देखते यह जनता की एक मुहिम बन गई. इस हादसे के बाद मंत्री को पद से इस्तीफा देना पड़ा और 12 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया. उस वक्त  अलेक्जेंडर वुसिक राष्ट्रपति थे.

चूंकि, यह हादसा सुबह 11.52 मिनट पर हुआ था. इसलिए हर रोज लोग उसी वक्त वहां जमा होते हैं और राजधानी बेलग्रेड, नोवी साद और निस के मेन चौराहों पर अपनी गाड़ियां रोककर चक्का जाम कर देते हैं. उस हादसे को याद करते हुए प्रदर्शनकारी 15 मिनट का मौन रखते हैं. इस दौरान प्रदर्शनकारी 'ब्लडी हैंड्स' (लाल रंग से सने हुए दस्ताने) के साथ नजर आते हैं, जो अब इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीर बन चुके हैं.

यह तो हुआ बैकग्राउंड. अब आते हैं आज के दिन पर. मुल्क में चुनाव हैं. जनता में भरपूर गुस्सा है. सर्बिया में समय से पहले हो रहे चुनावों से ठीक पहले देश भर में प्रचार रैलियां आयोजित की गईं. इन चुनावों को देश के भविष्य पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है.

बीबीसी के मुताबिक, सर्बिया की राजनीति में अलेक्जेंडर वुसिक के दबदबे के लिए सबसे बड़ी चुनौती दो साल पुराना छात्र आंदोलन है, लेकिन मतदान कितना निष्पक्ष रहेगा, इसे लेकर भी चिंता जताई जा रही है.

यह चुनाव क्यों जरूरी है?

दरअसल, यह चुनाव देश में जनता के भारी गुस्से के बीच हो रहा है. इस आंदोलन का कोई नेता नहीं है. इनको सियायत का क, ख, ग भी नहीं आता. लेकिन स्टूडेंट लिस्ट-स्टूडेंट्स विन आंदोलन ने पूरे सर्बिया में सरकार-विरोधी वोटर्स का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.'स्टूडेंट लिस्ट' सर्बियाई समाज के अलग-अलग वर्गों से उम्मीदवार उतार रही है. बेलग्रेड की ओर मार्च कर रहे छात्रों के साथ शामिल होते हुए, मुख्य उम्मीदवार और कार्डियोलॉजिस्ट इलिया सर्डानोविच ने कहा कि इतिहास फिर से लिखा जा रहा है, 'यह एनर्जी रुकने वाली नहीं है.'

जो आंदोलन यूनिवर्सिटी कैंपस और शहर की सड़कों पर न्याय की मांग को लेकर वीकली बेसिस पर शुरू हुआ था, वह आज राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो गया. लोकल लेवल पर चले इस आंदोलन में सर्बियाई समाज के कई अन्य वर्ग भी शामिल हो गए, जिनमें किसान, कलाकार और जज तक शामिल थे.

प्रदर्शन से हिल गई वुसिक की पार्टी

इस आंदोलन से मौजूदा वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) हिल गई और कुछ ही हफ्तों के भीतर प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया. वुसिक ने भी कुछ वक्त पहले राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया और अब वह इस चुनाव में पीएम पद के उम्मीदवार हैं. मार्च 2025 में बेलग्रेड में अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन हुए. बिना किसी एक नेता वाले इस छात्र आंदोलन ने अपनी ताकत बढ़ाई और स्टूडेंट असेंबली या 'प्लेनम' के जरिए खुद को एकजुट किया.

2023 के पिछले चुनावों में, वुसिक की SNS को EU-समर्थक पार्टियों के एक ढीले-ढाले गठबंधन से चुनौती मिली थी, जो बाद में टूट गया. इस बार उनके सामने एक छात्र आंदोलन से कहीं ज्यादा बड़ा खतरा है, जिसने विपक्षी पार्टियों से पूरी तरह दूरी बना ली है.

वुसिक कौन हैं और उनकी कितनी लोकप्रियता है?

राष्ट्रपति के तौर पर वुसिक के दो कार्यकाल पूरे हो चुके हैं. लिहाजा वह तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते. इसलिए, वह पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे हैं. साल 2017 में उन्होंने पीएम का पद छोड़ा था.

वुसिक दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोकप्रिय नेता हैं.  उन्होंने अपने विरोधियों पर कई आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनके विरोधी केवल स्टूडेंट्स और प्रोफेसर नहीं हैं, बल्कि 'बहुत बड़ी ताकतें' हैं जो सर्बिया की सरकार को गिराना चाहती हैं. उन्होंने स्कूलों और यूनिवर्सिटीज के 'राजनीतिकरण' को खत्म करने का भी वादा किया है.

वुसिक ने पश्चिमी देशों के साथ बहुत संभलकर काम किया है. एक तरफ वह यूरोपीय संघ में सर्बिया की सदस्यता का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्होंने यूक्रेन युद्ध में रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है.

विदेश नीति पर काम करने वाली संस्था हेनरी जैक्सन सोसाइटी की हेलेना इवानोव का कहना है कि छात्र आम लोगों को उस तरह से एकजुट करने में सफल रहे हैं, जो मुल्क के विपक्षी दल नहीं कर पाए. सत्ता में आने के बाद से वुसिक के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है.

बेलग्रेड से बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा,'सर्बिया में जब से बहु-दलीय चुनाव प्रणाली लागू हुई है, तब से वुसिक हर चुनाव में खड़े हुए हैं. इसलिए उन्हें हराना आसान नहीं होगा, लेकिन इस बार  वुसिक के लिए भी चीजें आसान नहीं रहने वाली हैं.'

सर्बिया में चुनाव कैसे होते हैं?

सर्बिया की संसद में 250 सीटें हैं और प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के तहत पूरा देश एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है.
25 अक्टूबर को सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू होगी और 8 बजे खत्म हो जाएगी. यहां 64.5 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स हैं. 18 वर्ष से ज्यादा उम्र का कोई भी शख्स वोट डाल सकता है.

रविवार के चुनाव में 18 लिस्ट (पार्टियों/गठबंधनों के उम्मीदवारों की सूची) मैदान में हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 7 सूचियों में पूरे 250 उम्मीदवार शामिल हैं.अगर किसी लिस्ट को कुल वोटों का 3% से ज्यादा हिस्सा मिलता है, तो उसे मिलने वाले समर्थन के आधार पर सांसद चुने जाते हैं. कई विपक्षी दलों ने स्टूडेंट लिस्ट के समर्थन में चुनाव से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं.

स्टूडेंट लीडर कौन हैं?

इन उम्मीदवारों में कोई स्टूडेंट्स नहीं बल्कि टीचर्स, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, एक्टर्स, डॉक्टर, किसान और वैज्ञानिक शामिल हैं. इनका कोई नेता नहीं है, लेकिन प्रमुख उम्मीदवार इलिजा सर्डानोविच नोवी साद में कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर हैं. अन्य उम्मीदवारों में पूर्व बास्केटबॉल स्टार देजान बोदिरोगा, मशहूर अभिनेता तिहोमीर स्टानिक और सर्बिया के नेशनल बैंक के पूर्व गवर्नर देजान सोस्कीच शामिल हैं.

मांगें क्या हैं?

 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES