)
दिल्ली में भी बाकी राज्यों की तरह मतदाता सूची के शुद्धीकरण यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान चुनाव आयोग के नोटिसों की बाढ़ आ गई है. यहां दिलचस्प बात ये कि राजधानी में थोक के भाव हाईली एजुकेटेड और वीवीआईपी के नाम लगातार सामने आ रहे हैं. इस सूची में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर को एसआईआर के तहत चुनाव आयोग का पर्चा मिला है. यानी इसी के साथ उन चर्चित नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की सूची लंबी हो गई है, जिनके वोटर रिकॉर्ड को सत्यापन के लिए चिह्नित किया गया है.
हालांकि इनमें अधिकांश वो लोग हैं जिनके वोटर आईडी कार्ड बनने के समय बीएलओ समेत चुनाव आयोग के पूरे अमले ने बड़ी सावधानी से नाम और पहचान का एक-एक अक्षर जांच-परख कर लिखा होगा. आम आदमी हो या वीवीआईपी सबके नोटिसों का निपटारा 29 अक्टूबर तक किया जाना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होनी है. इसलिए अगर आपके नाम भी एसआईआर का नोटिस आया है तो पैनिक होने यानी घबराने के बजाए अपना पक्ष सही से रखने की जरूरत है.
आम आदमी खासकर गरीब, अशिक्षित और कम पढ़े-लिखे लोगों के नाम, पिता का नाम, उम्र और नाम के अक्षरों, स्पेलिंग और अंकों की गलती समझी जा सकती है कि उन्होंने शायद फॉर्म भरते समय ध्यान न दिया हो या किसी दूसरे से फॉर्म भरवाया हो. या वोटर आईडी बनवाने के दौरान एंट्री करने वाले शख्स से टाइपो एरर हो गई होगी. लेकिन अपने-अपने क्षेत्र के इन दिग्गजों को कहां ऐसी दिक्कत हो गई कि उनकी मैपिंग नहीं हो पाई.
दरअसल ये सिस्टम से जनरेट हुए नोटिस हैं, जिनका मकसद मतदाता संबंधी जानकारी को दुरुस्त करना है. क्योंकि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किसी का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका देना और उचित आदेश जारी करना जरूरी है. इसीलिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ किया है कि SIR नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटना नहीं है.
जयशंकर के अलावा इस सूची में सीबीआई डायरेक्टर प्रवीण सूद, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई समेत कई लोगों के नाम हैं. वहीं पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के परिवार के कुछ सदस्यों को भी एसआईर का नोटिस मिला है. इसी तरह से कई सेवारत और रिटायर्ड नौकरशाहों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं.
| नाम | वजह |
|---|---|
| एस. जयशंकर और उनकी पत्नी | 'Unmapped with last SIR' |
| CBI निदेशक प्रवीण सूद और उनकी पत्नी | 'Unmapped with last SIR' |
| पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी | 'Unmapped with last SIR' |
| मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी | 'Self-name mismatch' |
| मनीष सिसोदिया का बेटा मीर सिसोदिया | 'Parent-name mismatch' |
| CAG के. संजय मूर्ति | 'Parent-name mismatch' |
unmapped with last SIR कैटेगिरी का मतलब ये है कि उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को पिछली SIR प्रक्रिया में तैयार की गई 2002 की मतदाता सूची से लिंक नहीं किया जा सका.
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी को भी नोटिस मिला है. उनके रिकॉर्ड को 2002 की पिछली SIR वाली मतदाता सूची से लिंक नहीं किया जा सका. हालांकि, आडवाणी के बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड मैपिंग प्रक्रिया में साफ पाया गया.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री, SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के रिकॉर्ड भी पिछली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाए. इसके अलावा मत्स्य सचिव अभिलक्ष लिखी, उनकी पत्नी और पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, उर्वरक सचिव राजत कुमार मिश्रा और भूमि संसाधन सचिव नरेंद्र भूषण के नाम भी सूची में हैं, जबकि ये सभी गणमान्य हस्तियां ये सभी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के तौर पर दर्ज हैं.
चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में ऐसे मामले सामने आने की मुख्य वजह बिहार में SIR के पहले चरण के अनुभव के बाद चुनाव आयोग (EC) द्वारा नियमों में किया गया एक अहम बदलाव है. क्योंकि उस समय नियमों के अनुसार, वोटरों को वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज़ जमा करने होते थे - जन्म, नागरिकता और निवास के प्रमाण के तौर पर एक दर्जन से ज्यादा दस्तावेज स्वीकार्य किए थे. हालांकि, पहले चरण में एसआईआर लागू करने वाले राज्यों के जिन मतदाताओं के पास ये दस्तावेज नहीं थे, उन्हें हुई परेशानी और नाम कट जाने के डर से हुए हंगामे के बाद, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
ऐसी परेशानियां अन्य राज्यों में न सामने आएं इसलिए चुनाव आयोग ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले दूसरे चरण के लिए नियमों में बदलाव किया. जिसमें दस्तावेज जमा करने की जरूरत को खत्म कर दिया गया और इसके बजाय पिछले SIR की वोटर लिस्ट के साथ वोटरों को मैप करने का फैसला किया गया.
अब ये मैपिंग सिस्टम इन-बिल्ट एल्गोरिदम के जरिए तार्किक विसंगतियों (logical discrepancies) का पता लगाता है और उसी के आधार पर ऑटो-जेनरेटेड यानी अपने-आप नोटिस जारी हो जाते हैं.
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि तार्किक विसंगतियों का पता लगाने वाला सॉफ्टवेयर निष्पक्ष है जो आम आदमी और VVIP के बीच कोई फर्क नहीं करता. यही वजह है कि इसका सबूत यह है कि चुनाव आयुक्त एस एस संधू को भी नोटिस मिला, क्योंकि एक जगह उनका नाम एस.एस. संधू और दूसरी जगह सुखबीर सिंह संधू लिखा था.
वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मामला उम्र से जुड़ी विसंगति का था. बूथ लेवल अधिकारी के भौतिक सत्यापन के बाद उनके दस्तावेज और चुनावी रिकॉर्ड सत्यापित कर दिए गए और उनकी एंट्री को मान्य कर दिया गया.
इससे पहले पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पिता गोविंद राम केजरीवाल, मां गीता देवी और बेटे पुलकित केजरीवाल के रिकॉर्ड भी 'unmapped with last SIR' श्रेणी में रखे गए थे.
दिल्ली CEO कार्यालय के मुताबिक, नोटिस मिलने से किसी व्यक्ति को अपने आप अपात्र घोषित नहीं किया जाता और न ही उसका नाम स्वतः वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा. संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद फैसला करेंगे.