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अमेरिका में सार्वजनिक फांसी का आखिरी मामला, 1936 में क्या हुआ था?

Rainey Bethea Execution Case: अमेरिका में फांसी के दो मामलों को लेकर जोर-शोर से चर्चाएं जारी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वहां पर पहले सबके सामने सार्वजनिक फांसी दी जाती थी, जिसे 1936 के बाद बंद कर दिया गया. आखिर उसकी वजह क्या थी?

अमेरिका में सार्वजनिक फांसी का आखिरी मामला, 1936 में क्या हुआ था?

What was Rainey Bethea Execution Case? अमेरिका में इन दिनों मौत की सजा दिए जाने का मामला काफी चर्चा में हैं. असल में मर्डर के आरोप में टेनेसी राज्य में क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी गई लेकिन वह बच गई. जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. वहीं अमेरिकन आर्मी में मेजर रहे निदाल हसन ने एक सैन्य बेस पर तैनाती के दौरान अंधाधुंध गोलीबारी कर 13 लोगों को मार दिया था. इस मामले में भी उसे फांसी की सजा का एलान हुआ है. सुप्रीम कोर्ट से माफी की अर्जी खारिज होने के बाद अमेरिकी सेना ने घोषणा की है कि फायरिंग स्कवाड के सामने खड़ा कर निदाल हसन को मौत की सजा दी जाएगी.

इन दोनों मामलों के बाद यूएस में इन दिनों मौत की सजा पर बहस जोरों पर जारी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक जमाने में अमेरिका में सार्वजनिक स्थान पर फांसी पर लटकाकर मौत की सजा दी जाती थी. उसी दौरान एक ऐसी घटना हुई कि उसके बाद से सार्वजनिक फांसी पर हमेशा के लिए रोक लगा दी गई. आखिर वह घटना क्या थी, जिसने अमेरिकी सरकार को हिलाकर रख दिया. आइए, आज आपको अमेरिका के उस अनसुने किस्से के बारे में विस्तार से बताते हैं.

बात 14 अगस्त 1936 की है, जब अमेरिका के केंटकी राज्य के ओवेन्सबोरो में रैनी बेथिया नाम के आरोपी को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी. इसे अमेरिका में सार्वजनिक रूप से दी गई आखिरी फांसी माना जाता है. इस घटना को देखने के लिए करीब 20 हजार लोगों की भीड़ जुटी थी. अब समझते हैं कि यह मामला क्या था और इस घटना के बाद सार्वजनिक फांसी की परंपरा क्यों बंद हो गई?

1. रैनी बेथिया कौन था और उस पर क्या आरोप लगे थे?

रिपोर्ट के मुताबिक, रैनी बेथिया एक अफ्रीकी-अमेरिकी नस्ल का युवक था. उस पर आरोप था कि उसने 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला लिशिया एडवर्ड्स के घर में घुसकर उनके साथ बलात्कार किया और फिर सबूत मिटाने के लिए बेरहमी से उनका मर्डर कर दिया. इस वारदात के सामने आने के बाद स्थानीय लोग भड़क उठे और कार्रवाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए. जिसके बाद पुलिस और प्रशासन पर तुरंत कार्रवाई का दबाव बढ़ गया.

2. 70 साल की लिशिया एडवर्ड्स की हत्या कैसे हुई और पुलिस की जांच में क्या सामने आया?

लिशिया एडवर्ड्स ओवेन्सबोरो की एक जानी-मानी और सम्मानित बुजुर्ग महिला थीं. वे अपने घर में अकेली रहती थीं. पुलिस के मुताबिक,  रैनी बेथिया चोरी के इरादे से एक रात उनके घर में दाखिल हुआ था. लेकिन आवाज होने पर लिशिया एडवर्ड्स की नींद अचानक खुल गई. उन्होंने चोर को पहचान लिया, जिससे वह घबरा गया. बेथिया को चुप कराने के लिए उसने उन पर हमला कर दिया. बाद में उसने उनकी हत्या कर दी. पुलिस जांच से पता चला कि बुजुर्ग महिला के साथ शारीरिक उत्पीड़न करने के बाद गला घोंटकर उनकी हत्या की गई थी. मौके से मिले सुरागों और अपने मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने जल्द ही रैनी बेथिया को धर दबोचा.

3. मुकदमे में कौन से सबूत पेश किए गए और बेथिया को मौत की सजा कैसे सुनाई गई?

अरेस्टिंग के बाद पुलिस ने कोर्ट में बेथिया के खिलाफ मुकदमा चलाया. इस दौरान अभियोजन पक्ष ने मृतका के घर से मिली बेथिया की एक अंगूठी और चुराए गए दूसरे सामान पेश किए. उन पर बेथिया के फिंगर प्रिंट दर्ज थे. पुलिस ने बेथिया का इकबालिया बयान भी अदालत के सामने पेश किया, जो उसने पुलिस में दर्ज करवाया था. चूंकि अमेरिका में उस दौर में नस्लभेद चरम पर था. इसलिए पुलिस-प्रशासन ने कोर्ट में अश्वेत बेथिया के खिलाफ मुकदमा तेजी से चलाया. कुछ ही दिनों की सुनवाई में कोर्ट में उसे दोषी करार देकर फांसी की सजा सुना दी.

4. 14 अगस्त 1936 को फांसी के दिन क्या हुआ था? इतनी बड़ी संख्या में लोग इसे देखने क्यों पहुंचे थे?

बेथिया को 14 अगस्त 1936 की सुबह सबके सामने खुले में फांसी पर लटकाया गया था. जिस दिन उसे फांसी दी जानी थी, तब ओवेन्सबोरो में एक खौफनाक और मेले जैसा माहौल बन गया था. उस फांसी को देखने के लिए अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से करीब 20 हजार लोग सड़क मार्ग से ओवेन्सबोरो उमड़ पड़े थे. इतने लोगों की आमद को देखते हुए शहर में जगह-जगह खाने-पीने की अस्थायी दुकानें खुल गई थीं. लोगों के लिए वह मौका किसी तमाशे की तरह था, जहां पर एक आदमी को तड़पते हुए मरते देखने में अपना एक रोमांच था. अचानक उमड़ी इतनी भारी भीड़ को संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए थे.

5. अमेरिका में सार्वजनिक रूप से फांसी देने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? क्या इसके पीछे अपराध रोकने की सोच थी?

अमेरिका में सार्वजनिक फांसी की परंपरा उसे ब्रिटेन से विरासत में मिली थी. असल में अमेरिका भी भारत की तरह ब्रिटेन का ही एक उपनिवेश था. लोगों में भय पैदा करने और ब्रिटिश कानूनों का दृढ़ता से पालन करवाने के लिए ब्रिटिश अधिकारी सरेआम सबके सामने आरोपियों को फांसी पर लटकाया करते थे. उनका मानना था कि ऐसा करने से लोग अपराध करने से डरेंगे और कानून व्यवस्था बनी रहेगी. ब्रिटेन से आजाद होने के बाद अमेरिका ने भी इस व्यवस्था को बनाए रखा था.

6. रैनी बेथिया की फांसी के बाद अमेरिका में सार्वजनिक फांसी बंद करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

अमेरिका के इतिहास में रैनी बेथिया को हुई फांसी सार्वजनिक फांसी का आखिरी उदाहरण था. इसके बाद इसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ गया. इसकी वजह ये थी कि उस दिन लोगों ने अश्वेत आरोपी को फांसी पर लटकाए जाने के बाद जश्न के रूप में जमकर हुड़दंग मचाया था. वे किसी यादगार के रूप में फंदे का टुकड़ा हासिल करने के लिए टूट पड़े थे. देश-विदेश के अखबारों की कवरेज में इस तमाशे की कड़ी आलोचना हुई थी, जिससे अमेरिकी की वैश्विक छवि को धब्बा लगा. इसने सार्वजनिक फांसी के खौफनाक और अमानवीय चेहरे को देश के सामने लाकर रख दिया. जिसके बाद केंटकी समेत अमेरिका के कई राज्यों ने अपने कानूनों में संशोधन कर तय किया कि अब भविष्य में फांसी की सजा जेल की चारदीवारी में दी जाएंगी.

7. क्या इसके बाद भी अमेरिका में मौत की सजा दी जाती रही? सार्वजनिक फांसी और जेल के भीतर दी जाने वाली फांसी में क्या अंतर है?

रैनी बेथिया को फांसी के बाद भी अमेरिका में मौत की सजा देने का प्रावधान बंद नहीं हुआ. हालांकि, इतना फर्क जरूर आया कि उसके बाद यह सजा सार्वजनिक रूप के बजाय जेल के अंदर दी जाने लगी. मौत की सजा के लिए फांसी के अलावा जहरीला इंजेक्शन लगाने और फायरिंग स्कवाड के सामने खड़े करने जैसे विकल्प भी ईजाद किए गए. इसकी वजह ये थी कि लोगों में अपराध के बाद सजा दिए जाने का डर तो बना रहे लेकिन उस सजा को लेकर तमाशा न बने. ऐसा करने से न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली बल्कि तनाव भड़कने का खतरा भी टल गया. 
 

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About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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