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धरती से अंतरिक्ष तक नोबेल की रेस: ट्रंप, ISS और कई बड़े नामों पर टिकी नजर; 9 अक्टूबर को खुलेगा सबसे बड़ा राज

नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता का ऐलान 9 अक्टूबर को ओस्लो में होगा. पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को होगा. नोबेल कमिटी नामांकन को 50 साल तक गोपनीय रखती है और किसी व्यक्ति के नामांकित होने की पुष्टि नहीं करती. 2026 में कौन-कौन सी दिग्गज हस्तियां एक्सपर्ट्स और नोबेल पुरस्कार की भविष्यवाणी करने वालों की चर्चा में जगह बनाए हुए हैं, आइए जानते हैं.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 03, 2026, 07:45 AM IST | Updated: Oct 03, 2026, 08:55 AM IST
Image Credit: (nobelprize.org) AI
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नोबेल कमेटी 9 अक्टूबर को नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता के नाम का ऐलान करेगी. इस बार कमेटी को 287 नामांकन मिले हैं. ट्रंप खुद को इस सम्मान का स्वयंभू दावेदार और विजेता मानते हैं. उनकी ख्वाहिश से इतर कुल 208 लोग और 79 संगठन मैदान में हैं. माना जा रहा है इस बार आईएसएस (ISS) बाजी मार सकता है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल कमिटी किसी ऐसे नाम को चुन सकती है जिसे लेकर ज्यादा विवाद न हो.                                                             

हालांकि, विजेता का अनुमान लगाना स्वभाव से ही अटकलों पर आधारित है, क्योंकि कमेटी पहले भी में कई ऐसे फैसले भी ले चुकी है, जिन्होंने लोगों को चौंकाया और विवाद भी खड़े किए थे.

न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से सामने आए पूर्वानुमानों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए एक सबसे चौंकाने वाला नाम हो सकता है. इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, सूडान की इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीमें, यूक्रेन में बच्चों के लिए काम करने वाले वालंटियर्स और दो अंतरराष्ट्रीय अदालतों के नाम भी चर्चा में सबसे आगे हैं.

नोबेल शांति पुरस्कार के ऊपर पूरी दुनिया की दिलचस्पी होने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी हैं, जो खुद को इस इनाम को दिलवाने के लिए अजीबो-गरीब फैसले ले रहे हैं.

चौंकाने वाला नाम: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA, रूस की स्पेस एजेंसी Roscosmos, यूरोप की स्पेस एजेंसी ESA, जापानी स्पेस एजेंसी JAXA और कनाडा की CSA के सहयोग से बना है. गाहे-बगाहे भारत समेत कई अन्य देशों के नागरिक भी इसके मिशन का हिस्सा बनते रहते हैं.

पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के मुताबिक आईएसएस की स्थापना से लेकर अब तक का उसका इतिहास यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी किसी साझा और शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए साथ काम कर सकते हैं. रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भी अमेरिकी और रूसी साझेदार अंतरिक्ष स्टेशन पर साथ काम करते रहे हैं.

कार्यवाहक निदेशक हाकोन गेरलॉव के नेतृत्व वाले PRIO ने इस साल ISS को अपनी शॉर्टलिस्ट में शामिल किया है. संस्थान ने इसे 'वैश्विक सहयोग का दुर्लभ प्रतीक' यानी रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मामला बताया है. नवंबर 2000 से अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल का पुरस्कार ऐसे समय में दिया जा रहा है जब दुनिया पिछले कई दशकों की तुलना में ज्यादा युद्ध और संघर्ष देख रही है. इनमें सूडान, यूक्रेन, यमन, ईरान और व्यापक पश्चिम एशिया के संघर्ष शामिल हैं.

ICJ और ICC

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने वाली संस्थाओं के तौर पर एक साथ चर्चा में रखा गया है. 

9 अक्टूबर को किस बिनाह पर होगा ऐलान?

इस साल के फैसले में छह चीजों पर खास नजर रहेगी.

शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति को मिलता है या संगठन को यह देखना भी दिलचस्प होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि कमिटी आमतौर पर यह देखती है कि शांति कितने समय तक टिकती है, किसी काम से देशों के बीच रिश्ते मजबूत होते हैं या नहीं और संस्थाओं के जरिए पर्दे के पीछे होने वाला शांतिपूर्ण काम कितना मजबूत होता है.

कांटों से भरी ट्रंप की राह!

नोबेल कमेटी और नॉर्वे से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक इस बार भी 8-8 युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप का सपना अधूरा रह सकता है, क्योंकि शांति का ये सबसे बड़ा सम्मान वैश्विक शांति और खुशहाली के लिए शुरू किए गए आईएसएस को मिल सकता है, जहां कट्टर विरोधी और प्रतिद्वंदी देश आपसी संघर्ष और युद्ध का इतिहास भुलाकर लंबे समय से एक साथ काम  कर रहे हैं.

सुपरपावर अमेरिका की 'दुनिया के दारोगा' वाली छवि अभी खत्म नहीं हुई है. उस पर ट्रंप की आक्रामक छवि इस अवार्ड के बाकी दावेदारों से मैच नहीं खाती. संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक, जलवायु संगठन जैसे संगठनों को वो अपने आगे कुछ नहीं समझते. वो बस अपने अंदाज में दुनिया को हांकना चाहते हैं. 

'शांति के लिए युद्ध' को बनाया ढाल!

'हुड़-हुड़ दबंग' छवि वाले ट्रंप 'शांति के लिए युद्ध' की टैगलाइन का मनमाफिक इस्तेमाल करते हुए कभी मिडिल ईस्ट में ईरान पर बम बरसाने का ऑर्डर देते हैं. कभी मन किया तो किसी अन्य देश के राष्ट्रपति को अपने सीक्रेट एजेंट्स और सेना भेजकर अगवा करा लेते हैं, उस पर उनका तुर्रा ये होता है कि व्हाइट हाउस प्रशासन ये न करता तो वो फलाना-ढ़िकाना शख्स यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और उसके महान लोगों के लिए खतरा बन जाता. इससे भी आगे उनका मन किया तो वो कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बताने लगते हैं तो कभी ग्रीनलैंड पर दावा ठोक देते हैं.

'टैरिफ बम' फोड़ने वाली छवि आ सकती है आड़े

ईरान में जंग छेड़कर बिना वजह होर्मुज चोक होने और बाब अल-मंदेब जैसे समुद्री रास्तों के प्रभावित होने से तेल-गैस के दाम बढ़ने और ईंधन की किल्लत होने का ठीकरा भी कई लोग डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर ही फोड़ते हैं. 

इसके इतर 'टैरिफ बम' फोड़कर किसी देश की इकोनॉमी हिलाकर उसकी सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद महंगाई बढ़ने का जिम्मेदार भी उनकी आक्रामक नीतियों का माना जा सकता है.

2001 से 2025 तक नोबेल शांति पुरस्कार 25 बार दिया गया, लेकिन इसमें 24 व्यक्ति और कई संगठन शामिल हैं. 

21वीं सदी के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता

सालनामदेश
2001कोफी अन्नानघाना
2002जिमी कार्टरअमेरिका
2003शिरीन एबादीईरान
2004वांगारी मथाईकेन्या
2005मोहम्मद अलबरदेईमिस्र
2006मुहम्मद यूनुसबांग्लादेश
2007अल गोरअमेरिका
2008मार्टी आहतिसारीफिनलैंड
2009बराक ओबामाअमेरिका
2010लियू शियाओबोचीन
2011एलेन जॉनसन सरलीफलाइबेरिया
2011लेयमाह गबोवीलाइबेरिया
2011तवक्कोल करमानयमन
2014कैलाश सत्यार्थीभारत
2014मलाला यूसुफजईपाकिस्तान
2016जुआन मैनुअल सांतोसकोलंबिया
2018डेनिस मुकवेगेकांगो
2018नादिया मुरादइराक
2019अबी अहमद अलीइथियोपिया
2021मारिया रेसाफिलीपींस
2021दिमित्री मुरातोवरूस
2022एलेस बियालियात्स्कीबेलारूस
2023नरगिस मोहम्मदीईरान
2025मारिया कोरीना मचाडोवेनेजुएला
स्रोत: NobelPrize.org. नोट: 2001–2025 के बीच कुछ वर्षों में नोबेल शांति पुरस्कार व्यक्तियों के बजाय संगठनों को भी दिया गया.

महिलाओं में कौन से नाम आगे?

1997 में International Campaign to Ban Landmines के साथ नोबेल शांति पुरस्कार साझा करने वाली जोडी विलियम्स ने इस बार ज्यादा महिलाओं को पुरस्कार मिलने की उम्मीद जताई है.

इस साल प्रेडिक्शन मार्केट्स में जिन महिलाओं के नाम दिखाई दे रहे हैं, उनमें गाजा की सर्जन सारा अल-सक्का और रूसी विपक्षी नेता तथा एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया शामिल हैं.

नोबेल शांति पुरस्कार के कुल 125 साल के इतिहास में अब तक 112 व्यक्तिगत विजेताओं में महज 20 महिलाएं रही हैं. बीते 15 सालों में आठ महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से यह अवार्ड मिला, जबकि छह पुरुष विजेता रहे हैं.

नोबेल अवार्ड वीक और धनराशि

नोबेल अवार्ड सप्ताह 5 अक्टूबर यानी अगले सोमवार को चिकित्सा के पुरस्कार के साथ शुरू होगा. मंगलवार को भौतिकी, बुधवार को रसायन विज्ञान और गुरुवार को साहित्य का पुरस्कार घोषित किया जाएगा. शुक्रवार को शांति पुरस्कार का ऐलान होगा. इसके बाद 12 अक्टूबर को अर्थशास्त्र का पुरस्कार घोषित किया जाएगा.

नोबेल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर है. यह राशि भारतीय मुद्रा में 11.5 करोड़ रुपये बैठती है. एक व्यक्ति, छोटे समूह या किसी संगठन को पुरस्कार दिए जाने की स्थिति में भी इतनी ही रहती है.

इस तरह नोबल शांति पुरस्कार का ऐलान होने में 6 दिन बाकी हैं. इसकी हर कैटेगिरी पर दुनिया की नजर रहती है. पीस प्राइस को लेकर सबसे ज्यादा बज दिखता है. इसकी वजह है शायद ही दुनिया का कोई कोना ऐसा हो, जहां कोई संघर्ष, हिंसा या जंग जैसे हालात न हों. ऐसी खबरों के बीच शांति की बात दिल-दिमाग को सुकून देती है.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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