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नीट यूजी 2026 के बाद मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने की दौड़ में शामिल छात्रों के लिए सीट मैट्रिक्स सबसे अहम दस्तावेजों में से एक है. इस बार मेडिकल शिक्षा में सीटों का दायरा बढ़ा है और करीब 9,911 नई MBBS सीटें जुड़ने की जानकारी सामने आई है. शुरुआती मैट्रिक्स के मुताबिक कुल MBBS सीटों की संख्या करीब 1.36 लाख तक पहुंची थी.
हालांकि, सीटों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर छात्र को आसानी से सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा. सीट किस राज्य में है, वह सरकारी है या निजी, AIQ में आती है या राज्य कोटे में और कॉलेज की मांग कितनी है, इन सभी बातों से एडमिशन का गणित तय होगा. NMC ने 2026-27 की MBBS सीट मैट्रिक्स जारी की है और MCC की वेबसाइट पर काउंसलिंग से जुड़े अपडेट भी जारी हैं.
कितनी बढ़ीं MBBS सीटें?
2026-27 के लिए उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों में करीब 9,911 नई MBBS सीटें जोड़े जाने की बात सामने आई है. इन सीटों के जुड़ने के पीछे नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी और कुछ मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की अनुमति प्रमुख वजह है. NMC मेडिकल शिक्षा और मेडिकल संस्थानों में सीटों की मान्यता से जुड़ी नियामक संस्था है. NMC ने 14 जुलाई 2026 को 2026-27 के लिए MBBS सीट मैट्रिक्स जारी की थी और बाद में सितंबर में इसका अपडेट भी प्रकाशित किया. इसलिए उम्मीदवारों को पुरानी सीट सूची के बजाय अपने काउंसलिंग राउंड की ताजा मैट्रिक्स देखनी चाहिए.
| श्रेणी | मेडिकल कॉलेजों की संख्या | MBBS सीटें (लगभग) |
|---|---|---|
| सरकारी मेडिकल कॉलेज | 441 | 61,900 |
| प्राइवेट मेडिकल कॉलेज | 382 | 75,039 |
| कुल | 823 | 1,36,939 |
कुल कितनी सीटें हुईं?
दिए गए सीट मैट्रिक्स के अनुसार 2026-27 में MBBS की कुल सीटें करीब 1,36,939 बताई गई थीं. इसमें सरकारी और निजी दोनों मेडिकल कॉलेज शामिल हैं. शुरुआती विवरण के अनुसार करीब 823 मेडिकल कॉलेजों में ये सीटें थीं. हालांकि सीट मैट्रिक्स एक स्थिर आंकड़ा नहीं है. नए कॉलेज, सीट वृद्धि, मान्यता, अपग्रेडेशन या किसी कॉलेज में सीट हटने के कारण काउंसलिंग के अलग-अलग राउंड में सीटों की संख्या बदल सकती है. NMC की वेबसाइट पर 26 अगस्त 2026 तक वैध डेटा और 1 सितंबर 2026 की अलग अपडेटेड मैट्रिक्स भी उपलब्ध है. इसलिए उम्मीदवारों को किसी पुराने आर्टिकल की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय NMC और MCC की ताजा सूची देखनी चाहिए.
सरकारी और प्राइवेट में कितना अंतर?
उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 61,900 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों और लगभग 75,039 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में बताई गई थीं. यानी संख्या के लिहाज से निजी कॉलेजों की सीटें ज्यादा हैं. लेकिन दोनों तरह के कॉलेजों में एडमिशन का खर्च, सीट का कोटा, कटऑफ और काउंसलिंग प्रक्रिया अलग हो सकती है. सरकारी कॉलेजों की फीस आमतौर पर निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होती है, इसलिए सरकारी MBBS सीटों के लिए मुकाबला ज्यादा कड़ा रहता है. सिर्फ कुल सीट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं कि सभी छात्रों के लिए समान अवसर बन गए हैं. असली तस्वीर राज्य, कैटेगरी, कोटा और कॉलेज के हिसाब से सामने आती है.
| S.No. | State | College Name | Quota | EWS | OBC | SC | ST | GEN PwD | EWS PwD | OBC PwD | SC PwD | ST PwD | Total Seats |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Delhi (NCT) | Atal Bihari Vajpayee Institute of Medical Sciences & Dr. RML Hospital, New Delhi | IP University Quota | 8 | 21 | 13 | 6 | 0 | 1 | 1 | 0 | 0 | 82 |
| 2 | Delhi (NCT) | Lady Hardinge Medical College, New Delhi | Delhi University Quota | 16 | 45 | 26 | 12 | 0 | 1 | 3 | 1 | 1 | 105 |
| 3 | Delhi (NCT) | Lady Hardinge Medical College, New Delhi | CW (DU) Quota | 1 | 3 | 1 | 1 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 6 |
| 4 | Delhi (NCT) | Maulana Azad Medical College, New Delhi | Delhi University Quota | 0 | 30 | 29 | 14 | 0 | 0 | 3 | 1 | 1 | 98 |
| 5 | Delhi (NCT) | Maulana Azad Medical College, New Delhi | CW (DU) Quota | 0 | 3 | 1 | 1 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 5 |
| 6 | Delhi (NCT) | University College of Medical Sciences, Dilshad Garden | Delhi University Quota | 9 | 35 | 20 | 10 | 0 | 0 | 2 | 1 | 1 | 78 |
| 7 | Delhi (NCT) | University College of Medical Sciences, Dilshad Garden | CW (DU) Quota | 0 | 2 | 1 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 5 |
| 8 | Delhi (NCT) | Vardhman Mahavir Medical College & Safdarjung Hospital | IP University Quota | 12 | 33 | 18 | 10 | 0 | 0 | 2 | 2 | 1 | 81 |
| 9 | Delhi (NCT) | Vardhman Mahavir Medical College & Safdarjung Hospital | CW (IP) Quota | 1 | 2 | 1 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 6 |
| 10 | Uttar Pradesh | Institute of Medical Sciences, BHU, Varanasi | Open Seat Quota | 9 | 25 | 14 | 8 | 0 | 1 | 2 | 1 | 0 | 60 |
| 11 | Uttar Pradesh | Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh | AMU Quota | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 73 |
| 12 | Uttar Pradesh | Jawaharlal Nehru Medical College, AMU, Aligarh | Open Seat Quota | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 72 |
| Category-wise Total | 55 | 210 | 135 | 75 | 0 | 4 | 13 | 7 | 4 | 512 | |||
किस राज्य को सबसे ज्यादा फायदा?
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | Renewed Seats | बढ़ी हुई सीटें | कुल MBBS सीटें |
|---|---|---|---|
| अरुणाचल प्रदेश | 100 | — | 100 |
| मिजोरम | 100 | — | 100 |
| नागालैंड | 100 | — | 100 |
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 114 | — | 114 |
| दादरा और नगर हवेली | 177 | — | 177 |
| चंडीगढ़ | 150 | 50 | 200 |
| सिक्किम | 100 | 100 | 200 |
| गोवा | 200 | 50 | 250 |
| मेघालय | 250 | — | 250 |
| त्रिपुरा | 450 | 50 | 500 |
| मणिपुर | 525 | 25 | 550 |
| हिमाचल प्रदेश | 870 | — | 871 |
| दिल्ली | 1,415 | — | 1,415 |
| उत्तराखंड | 1,325 | 150 | 1,475 |
| झारखंड | 1,130 | 370 | 1,500 |
| जम्मू और कश्मीर | 1,575 | 100 | 1,675 |
| पुडुचेरी | 1,630 | 150 | 1,780 |
| पंजाब | 1,800 | 50 | 1,850 |
| असम | 1,875 | — | 1,875 |
| छत्तीसगढ़ | 2,300 | 545 | 2,925 |
| ओडिशा | 2,900 | 50 | 2,950 |
| हरियाणा | 2,710 | 250 | 2,960 |
| बिहार | 3,420 | 740 | 4,160 |
| केरल | 5,454 | 250 | 5,704 |
| मध्य प्रदेश | 5,600 | 420 | 6,020 |
| पश्चिम बंगाल | 6,375 | 825 | 7,200 |
| आंध्र प्रदेश | 6,090 | 1,375 | 7,465 |
| गुजरात | 7,550 | 200 | 7,750 |
सीट बढ़ोतरी सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही. दिए गए आंकड़ों में गुजरात में कुल करीब 7,750, आंध्र प्रदेश में 7,465, पश्चिम बंगाल में 7,200, मध्य प्रदेश में 6,020, केरल में 5,704 और बिहार में 4,160 MBBS सीटें बताई गई हैं. सीट बढ़ने के मामले में पश्चिम बंगाल में 825, बिहार में 740, छत्तीसगढ़ में 545, मध्य प्रदेश में 420 और आंध्र प्रदेश में 375 सीटों की बढ़ोतरी बताई गई है. इसका फायदा स्थानीय छात्रों को राज्य कोटे के जरिए मिल सकता है, लेकिन यह फायदा अपने आप सीट मिलने की गारंटी नहीं है. राज्य की मेरिट और लागू आरक्षण नियम भी उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे.
UP में कितनी MBBS सीटें?
उत्तर प्रदेश उन राज्यों में है जहां मेडिकल शिक्षा का बड़ा नेटवर्क है. दिए गए राज्यवार डेटा में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ज्यादा सीट वाले राज्यों में शामिल है, हालांकि आपके उपलब्ध इनपुट की राज्यवार तालिका में UP का कुल सीट आंकड़ा नहीं दिया गया है. इसलिए यहां कोई अनुमानित संख्या देना सही नहीं होगा. उम्मीदवारों को NMC की कॉलेज-वार सीट मैट्रिक्स में उत्तर प्रदेश के प्रत्येक सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज की स्वीकृत सीट देखनी चाहिए. NMC की आधिकारिक College and Course Search में राज्य और कॉलेज के हिसाब से MBBS सीटें देखी जा सकती हैं. इससे उम्मीदवार को यह समझने में आसानी होगी कि कौन-सी सीट किस कॉलेज और किस प्रबंधन के तहत उपलब्ध है.
कहां कितनी सीटें बढ़ीं?
राज्यवार तस्वीर देखें तो गुजरात में 200, आंध्र प्रदेश में 375, पश्चिम बंगाल में 825, मध्य प्रदेश में 420, बिहार में 740 और छत्तीसगढ़ में 545 सीट बढ़ने का आंकड़ा दिया गया है. इसके अलावा झारखंड में 370, हरियाणा में 250, केरल में 250, उत्तराखंड में 150, जम्मू-कश्मीर में 100 और ओडिशा में 50 सीट बढ़ने की जानकारी है. छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कुछ जगह नई सीटें या सीट वृद्धि हुई है. लेकिन यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि 'सीट बढ़ी' और 'किसी छात्र के लिए उपलब्ध सीट' एक ही बात नहीं है. सीट का कोटा और पात्रता भी देखनी होगी.
क्या कम होगा NEET कटऑफ?
सीट बढ़ने से कटऑफ पर नीचे की ओर दबाव पड़ सकता है, लेकिन यह तय नहीं है कि हर कॉलेज और हर कैटेगरी में कटऑफ कम होगी. अगर उपलब्ध सीटें बढ़ती हैं और उम्मीदवारों की संख्या लगभग उसी अनुपात में रहती है, तो कुछ कॉलेजों और राउंड में क्लोजिंग रैंक आगे जा सकती है. लेकिन टॉप सरकारी कॉलेजों में मुकाबला फिर भी बहुत कड़ा रह सकता है. किसी साल की कटऑफ सिर्फ सीटों से तय नहीं होती. उम्मीदवारों की संख्या, NEET स्कोर, पेपर का स्तर, पसंदीदा कॉलेज, राज्य कोटा और कैटेगरी जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं. इसलिए सीट बढ़ने को कटऑफ में बड़ी गिरावट की गारंटी समझना गलत होगा.
टॉप कॉलेजों पर क्या असर?
नई सीटों का सबसे बड़ा असर उन कॉलेजों में दिख सकता है जहां नई सीटें जोड़ी गई हैं या जहां intake बढ़ा है. लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित होने के कारण वहां competition कम होना जरूरी नहीं है. उदाहरण के लिए BHU, AMU और दिल्ली के प्रमुख केंद्रीय संस्थानों की सीटों के लिए अलग-अलग quota और category नियम लागू होते हैं. उपलब्ध मैट्रिक्स में BHU के Institute of Medical Sciences के लिए Open Seat Quota की सीटें भी शामिल हैं. इसलिए टॉप कॉलेज के लिए सिर्फ NEET score देखना पर्याप्त नहीं है. उम्मीदवार को कॉलेज, quota, category और पिछले राउंड की closing rank को साथ देखकर विकल्प बनाना चाहिए.
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
सीट बढ़ने का फायदा सबसे पहले उन उम्मीदवारों को मिल सकता है जो सरकारी कॉलेज की सीमा के आसपास स्कोर कर रहे हैं और जिनके लिए पहले विकल्प कम थे. नई सीटें आने से उन्हें नए कॉलेजों और कुछ राज्यों में अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं. ग्रामीण और टियर-2 शहरों के छात्रों के लिए भी मेडिकल शिक्षा तक पहुंच बढ़ने की संभावना है. हालांकि इसका फायदा तभी मिलेगा जब उम्मीदवार अपनी choice filling समझदारी से करे. केवल बड़े नाम वाले कॉलेज भरने के बजाय अपनी rank, category, domicile, फीस और पिछले admission trends को देखकर विकल्पों की लंबी सूची बनाना ज्यादा सुरक्षित तरीका है.
MCC काउंसलिंग में क्या होगा?
NEET UG में qualifying candidates को मेडिकल सीट देने के लिए काउंसलिंग होती है. MCC मुख्य रूप से 15% All India Quota समेत केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य निर्धारित संस्थानों की UG मेडिकल काउंसलिंग संभालता है. बाकी राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी जिम्मेदार होती है. प्रक्रिया में registration, choice filling, seat allotment और allotted college में reporting जैसे चरण होते हैं. 2026 की MCC काउंसलिंग में Round 1 के बाद Round 2 के परिणाम और नई सीटों से जुड़े अपडेट भी जारी किए जा चुके हैं. MCC की वेबसाइट पर Round 2 की नई जोड़ी गई सीटों की अलग सूची भी उपलब्ध है.
चॉइस फिलिंग में क्या बदलें?
सीटें बढ़ने के बाद choice filling में सबसे बड़ी गलती यह होगी कि उम्मीदवार सिर्फ कुछ टॉप कॉलेज भरकर रुक जाए. पहले अपनी rank और category के हिसाब से realistic colleges की सूची बनाएं. उसके बाद सरकारी और निजी कॉलेजों को फीस और पसंद के आधार पर क्रम दें. जिस कॉलेज में सीट नई जोड़ी गई है, उसे भी विकल्प में शामिल किया जा सकता है, लेकिन सिर्फ सीट बढ़ने के कारण उसे बिना जानकारी के ऊपर रखना सही नहीं होगा. MCC की वेबसाइट पर उपलब्ध seat matrix देखकर हर कॉलेज की सीट, quota और course की जानकारी जांचें. Choice filling को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि rank और उपलब्ध सीटों के हिसाब से रणनीति बनाकर पूरा करना चाहिए.
सीट मैट्रिक्स कैसे चेक करें?
उम्मीदवार सबसे पहले NMC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर MBBS के लिए College and Course Search देख सकते हैं. वहां कॉलेज और राज्य के आधार पर सीटों की जानकारी उपलब्ध है. काउंसलिंग के लिए MCC की वेबसाइट पर UG Counselling 2026 सेक्शन में जाएं. वहां Seat Matrix, participating institutes, counselling schedule और allotment से जुड़े दस्तावेज मिलते हैं. MCC ने 2026 के लिए Candidate User Guide भी जारी किया है. ध्यान रखें कि Round 1, Round 2 और आगे के राउंड में सीटों की स्थिति बदल सकती है. इसलिए choice filling करते समय हमेशा उसी राउंड की latest seat matrix को आधार बनाएं.
आखिर कटऑफ का पूरा गणित क्या है?
सीधी बात यह है कि 9,911 नई सीटें बढ़ना NEET उम्मीदवारों के लिए सकारात्मक खबर है, लेकिन इससे हर छात्र के लिए सरकारी MBBS सीट आसान नहीं हो जाती. कुल सीटों में बढ़ोतरी से कुछ कॉलेजों और राज्यों में closing rank नीचे जा सकती है, लेकिन टॉप संस्थानों में competition बना रह सकता है. संविधान और कानून के तहत मेडिकल एडमिशन में आरक्षण और समान अवसर से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं, जबकि अलग-अलग कोटा और आरक्षण की व्यावहारिक व्यवस्था संबंधित केंद्रीय और राज्य नियमों के अनुसार चलती है. इसलिए उम्मीदवार को अपनी category, domicile और quota के नियम जरूर देखने चाहिए. अंत में सबसे महत्वपूर्ण चीज है ताजा seat matrix + अपनी rank + सही choice filling. यही तीन चीजें इस साल MBBS सीट पाने की संभावना को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगी. NMC और MCC के आधिकारिक अपडेट को ही अंतिम आधार मानना सबसे सुरक्षित है.