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Gangster Shahzad Bhatti's criminal history: पाकिस्तान में पैदा हुआ एक गैंगस्टर भारत की आतंकी लिस्ट में शामिल हो चुका है. आतंकियों की पौध को पेड़ बनाने वाले पाकिस्तान से एक और आतंकी चेहरा शहजाद भट्टी हिंदुस्तान की लिस्ट में शामिल हो चुका है. भारत की तरफ से जारी पाकिस्तानी आतंकियों की लिस्ट में शहजाद भट्टी नेटवर्क का नंबर 46 है. इस नंबर के साथ ही अब शहजाद भट्टी का हश्र भी पाकिस्तान के आतंकियों की तरह होना तय हो चुका है.
गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी नेटवर्क यानी SBN को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. UAPA की धारा 35 के तहत नेटवर्क को कानून की पहली अनुसूची में शामिल किया गया है. गृह मंत्रालय के मुताबिक शहजाद भट्टी नेटवर्क सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और ड्रग्स की तस्करी में शामिल रहा है.
साथ ही युवाओं और छोटे अपराधियों को आतंक की तरफ धकेलने का भी आरोप है. पाकिस्तान के इस गैंग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसा कंटेंट भी फैलाया, जिसे सरकार ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा बताया.
एक ऐसा गैंगस्टर जो खुद हिंदुस्तान की जमीन पर नहीं है. लेकिन उसके साजिशों की गूंज हिंदुस्तान के कई शहरों तक सुनाई देती है. एक ऐसा क्रिमिनल, जिसका नेटवर्क पाकिस्तान से शुरू होकर दुबई तक पहुंचता है और फिर सोशल मीडिया के रास्ते भारत में दाखिल होता है. उसका नाम है शहजाद भट्टी.
हर बड़े अपराधी की कहानी एक बड़े अपराध से शुरू नहीं होती. कई बार शुरुआत बहुत छोटी होती है. एक छोटी चोरी और एक छोटी वारदात. फिर धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में बढ़ते कदम. शहजाद भट्टी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
आतंकियों के मुल्क में शहजाद भट्टी ने अपने गुनाहों की शुरूआत चोरी और डकैती जैसे अपराधों से की. शुरुआत स्थानीय अपराध से हुई. लेकिन वक्त के साथ भट्टी का दायरा बढ़ता गया. अपराध बढ़ा, संपर्क बढ़े और शहजाद भट्टी इंटरनेशनल अपराधी बन गया.
जिस चेहरे की पहचान कभी पाकिस्तान के एक छुटभैय्या अपराधी के तौर पर थी. वही चेहरा कुछ साल बाद सीमा पार बैठे नेटवर्क का हिस्सा बनता दिखाई दिया. 2015 में उसके दुबई जाने की बात सामने आती है.
दुबई में कारोबार, नए संपर्क और अपराध की दुनिया में बढ़ती पकड़ उसका नाम चर्चित कर देती है. यहीं से भट्टी की कहानी में एक नया चैप्टर जुड़ता है सोशल मीडिया. भट्टी ने सिर्फ अपराधियों के बीच अपनी पहचान नहीं बनाई बल्कि उसने इंटरनेट पर भी अपना एक चेहरा तैयार किया.
शहजाद भट्टी ने सोशल मीडिया को अपनी ताकत बना लिया था. उसके धमकी भरे वीडियो और विवादित मुद्दों पर उसकी टिप्पणियां सामने आने लगीं. धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उसकी पहचान बढ़ती चली गई और भट्टी का एक डिजिटल नाम भी चर्चा में आया यानि ट्रिपल थ्री.
पुराने जमाने का गैंगस्टर अपने इलाके में रहता था. उसके आदमी उसके आसपास रहते थे. वारदात के बाद पुलिस उसी इलाके में पहुंचती थी. लेकिन डिजिटल दौर के गैंगस्टर का तरीका अलग है. जांच एजेंसियों के मुताबिक भट्टी नेटवर्क पर भी युवाओं और स्थानीय अपराधियों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ने के आरोप हैं. किसी को पैसे का लालच, किसी को हथियार, किसी को पहचान और किसी को सिर्फ एक टारगेट. सवाल ये है कि शहजाद भट्टी का ये नेटवर्क भारत तक पहुंचा कैसे? इसका एक जवाब मिलता है पंजाब के जालंधर से.
मार्च 2025 में जालंधर में एक यूट्यूबर के घर के पास ग्रेनेड जैसी चीज मिलने से हड़कंप मच गया. पुलिस और बम डिस्पोजल टीम तुरंत मौके पर पहुंची और विदेशी लाइव हैंड ग्रेनेड को निष्क्रिय किया गया. जब इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो नाम सामने आया शहजाद भट्टी का.
इस केस ने पहली बार ये सवाल खड़ा किया कि पाकिस्तान में बैठा एक गैंगस्टर भारत में बैठे किसी शख्स को टारगेट कैसे कर सकता है? हथियार कहां से आया? ऑर्डर किसने दिए? अगर भट्टी इस नेटवर्क के पीछे था तो भारत में उसके लिए काम करने वाले लोग कौन थे?
इन्हीं सवाल का जवाब तलाशते हुए जांच एजेंसियां पहुंचीं भारत के सबसे चर्चित गैंगस्टर नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग तक. एजेंसियों को साल 2024 का एक वीडियो मिला, जिसमें जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और शहजाद भट्टी बातचीत करते दिखाई दिए. दो अलग देशों में बैठे दो कुख्यात गैंगस्टर एक वीडियो कॉल पर बात कर रहे थे.
अपराध की दुनिया में ये कनेक्शन इसलिए अहम था क्योंकि एक तरफ भारत का बड़ा गैंगस्टर नेटवर्क और दूसरी तरफ पाकिस्तान में बैठा शहजाद भट्टी. बाद में दोनों के रिश्तों में तनाव की खबरें भी सामने आईं.
लॉरेंस और भट्टी की दुश्मनी तब सामने आई जब लॉरेंस ने अप्रैल 2025 में एक पोस्ट जारी कर पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन टीआरएफ के सरगना हाफिज सईद को पाकिस्तान में घुस कर मारने की धमकी दी. उसने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि तुमने नाजायज तरीके से हमारे बंदों को मारा है, हम तुम्हारे एक ही जायज बंदा मारेंगे जो एक लाख के बराबर होगा.
इसके बाद भट्टी ने एक वीडियो जारी कर जवाबी धमकी दी. उसने कहा, 'बर्दाश्त नहीं करूंगा दोबारा कि मेरे किसी भी मुसलमान के लिए तुम एक लफ़्ज भी निकालो. सब कुछ खत्म ये दोस्तियां सब बाद में है. सबसे पहले इस्लाम है. नेक्स्ट टाइम मैं ना सुनूं कि किसी मुसलमान के लिए या पाकिस्तान के लिए या फौज के लिए तुमने ये मैसेज दिया है.'
दरअसल भट्टी अब सिर्फ गैंगस्टर नहीं रहना चाहता था. वो धार्मिक कार्ड खेलकर कट्टरपंथियों का मसीहा बनना चाहता था. वो यह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर कर रहा था, जिसकी वजह से उसे अपने मुल्क में सुरक्षा कवच मिला हुआ है. वही आईएसआई जिसने हाफिज सईद को भी अपना संरक्षण दिया हुआ है.
इन सबके के बीच भट्टी का नाम भारत में हुए कई हाई-प्रोफाइल क्राइम केसिज की जांच में सामने आता रहा. इनमें सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का नाम भी शामिल है. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद भारत के गैंगस्टर नेटवर्क की परतें जिस तरह खुलीं. उनमें कई ऐसे नाम सामने आए जो देश से बाहर बैठकर कथित तौर पर नेटवर्क को हैंडल कर रहे थे. शहजाद भट्टी का नाम भी इसी जांच की कड़ियों में सामने आया.
आरोपों के मुताबिक हथियारों की सप्लाई से लेकर नेटवर्किंग तक उसकी भूमिका की जांच हुई. यानी भट्टी के लिए अपराध का मतलब सिर्फ खुद वारदात करना नहीं था. वह अपराधियों को जोड़कर, मदद कराकर और बॉर्डर पार से नेटवर्क को चलाकर क्राइम मॉड्यूल चला रहा था.
कहानी यहीं खत्म नहीं होती. साल 2024 में मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या हुई. इस केस की जांच में भी शहजाद भट्टी का नाम सामने आया. अब तस्वीर में एक और किरदार जुड़ता है—जीशान अख्तर. जांच एजेंसियों के मुताबिक भट्टी पर जीशान अख्तर को भारत से बाहर निकलने में मदद करने का आरोप है. यानी वारदात के बाद सिर्फ गोली चलाने वाला ही अहम नहीं था बल्कि उसके बाद रास्ता कौन तैयार कर रहा था. ये भी जांच का हिस्सा बन गया. शहजाद भट्टी की कहानी में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात भी यही है कि उसकी ताकत उसके हाथ में मौजूद हथियारों से ज्यादा उसके नेटवर्क में दिखाई देती है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक भट्टी नेटवर्क ने युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ एक गैंगस्टर को पकड़ने की नहीं है बल्कि उसके पूरे डिजिटल और क्रिमिनल चेन को तोड़ने की है. जिसमें एक मोबाइल फोन से शुरू हुआ संपर्क आखिरकार हथियार और हिंसा तक पहुंच सकता है.
पाकिस्तान में स्थित गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी का नेटवर्क भारत के 14 से अधिक राज्यों में फैला हुआ था. इनमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक, बिहार, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और केरल शामिल हैं. लेकिन मोदी सरकार ने एक ही रात में शहजाद भट्टी के इस पूरे टेरर नेटवर्क को तहस नहस कर दिया.
सुरक्षा एजेंसीज़ ने भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देश के तमाम राज्यों में एक साथ कार्रवाई की.रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑपरेशन चलाया गया. इस अभियान में 253 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई. 80 से ज्यादा FIR दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्ट हुई. जांच एजेंसियों के मुताबिक नेटवर्क से जुड़े लोगों पर रेकी, हथियारों की व्यवस्था, निगरानी और दूसरी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं.
इन राज्यों में भी शहजाद भट्टी और पाकिस्तान स्थित उसके आकाओं के इशारे पर स्लीपर सेल तैयार करने, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और स्थानीय स्तर पर रेकी करने के इनपुट मिले थे. जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों के साथ राज्य पुलिस के संयुक्त अभियानों में पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया गया.
शहजाद भट्टी की कहानी का सबसे खतरनाक पहलू शायद यही है कि वो खुद हर वारदात में मौजूद नहीं होता. वह पाकिस्तान में रहकर फोन या मैसेज के जरिए युवाओं से अपराध करवाता था. इसके लिए किसी को पैसे दिए गए तो किसी को हथियार उपलब्ध कराए गए.
इस कहानी ने 16 सितंबर 2026 को नया मोड़ लिया, जब शहजाद भट्टी नेटवर्क को भारत सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया. इन सबके बावजूद सवाल ये नहीं कि शहजाद भट्टी कितना बड़ा गैंगस्टर है. सवाल ये है कि उसके नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक है? कितने चेहरे इस नेटवर्क का हिस्सा हैं? फंडिंग का सोर्स कहां कहां से जुड़ा है?
सबसे बड़ा सवाल, क्या गैंगस्टर की दुनिया और आतंक की दुनिया के बीच की दूरी खत्म हो चुकी है? शहजाद भट्टी की कहानी का ये आखिरी पन्ना नहीं है. एक गैंगस्टर का नाम अब एक आतंकवादी संगठन के नाम के साथ जुड़ चुका है. जब तक इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी सामने नहीं आती, तब तक कहानी जारी रहेगी.