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EPFO की सैलरी लिमिट बढ़ने से आपकी सेविंग पर क्या असर होगा? इन हैंड सैलरी घटेगी या बढ़ेगी; समझिए पूरी कैलकुलेशन

EPFO New Rule Explained: EPFO की सैलरी लिमिट बढ़ने का आपकी इन-हैंड सैलरी, मंथली पीएफ कटौती और रिटायरमेंट सेविंग्स पर क्या असर पड़ेगा? आपकी इन हैंड सैलरी घटेगी या बढ़ेगी, ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलेंगे.

EPFO की सैलरी लिमिट बढ़ने से आपकी सेविंग पर क्या असर होगा? इन हैंड सैलरी घटेगी या बढ़ेगी; समझिए पूरी कैलकुलेशन

EPFO Salary Limit Hike: मोदी कैबिनेट ने करोड़ों सैलरीड क्लास को राहत देने के लिए बुधवार को बड़ा कदम उठाया. कैबिनेट के इस कदम के तहत ईपीएफ (EPF) और ईपीएस (EPS) के तहत मंथली सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है. नई सैलरी लिमिट को आज से लागू कर दिया गया है. 15,000 रुपये की लिमिट सितंबर 2014 से लागू थी. सरकार के अनुसार नए नियम का फायदा एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा. सरकार की तरफ से ऐलान किये जाने के बाद कुछ लोगों के मन में यही आया कि अब उनकी इनहैंड सैलरी बढ़ जाएगी. लेकिन ऐसा है नहीं, इसके तहत अब पीएफ का पैसा ज्यादा कटेगा और इससे इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी.

नई सैलरी लिमिट के लिए यदि कॉन्ट्रीब्यूशन (25,000 रुपये के लिये) 12 फीसदी के हिसाब से किया जाता है तो कर्मचारी का मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो सकता है. यानी कर्मचारी की सैलरी से पहले के मुकाबले 1,200 रुपये ज्यादा पीएफ में जा सकते हैं. हालांकि, सैलरी में होने वाला चेंज हर कर्मचारी के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.

EPFO की सैलरी लिमिट क्या है?

EPFO की वेज सीलिंग को आसान भाषा में समझें तो यह वह लिमिट है, जिसके बेस पर जरूरी पीएफ कवरेज और कॉन्ट्रीब्यूशन की कैलकुलेशन की जाती है. सितंबर 2014 से यह लिमिट 15,000 रुपये महीने की थी. अब केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया है. यानी ऐसे कर्मचारी जिनका सैलरी स्ट्रक्चर इस नई लिमिट के दायरे में आती है, उनके लिए ईपीएफओ (EPFO) कवरेज का दायरा बढ़ सकता है. इस फैसले का मकसद ज्यादा कर्मचारियों को ईपीएफ, ईपीएस (EPS) और EDLI जैसी सोशल सिक्योरिटी प्लान के दायरे में लाना है.

15000 से 25000 रुपये की लिमिट पर क्या बदलेगा?

EPFO की वेज सीलिंग पिछले करीब 12 साल से 15,000 रुपये पर फिक्स थी. सरकार ने अब इसे 10,000 रुपये बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. यानी नई लिमिट पुरानी लिमिट से करीब 66.7 फीसदी ज्यादा है. इस बदलाव के बाद 51 लाख से ज्यादा कर्मचारी जरूरी EPFO कवरेज में आ सकते हैं. सरकार की तरफ से इस फैसले के लिए सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये के एक्स्ट्रा खर्च का अनुमान लगाया है.

सबसे बड़ा सवाल, PF कितना कटेगा?

12 फीसदी कॉन्ट्रीब्यूश्यन के बेस पर पुरानी और नई वेज सीलिंग पर कर्मचारी का योगदान-

  • पुरानी वेज सीलिंग: ₹15,000 × 12 फीसदी = ₹1,800
  • नई वेज सीलिंग: ₹25,000 × 12 फीसदी = ₹3,000
  • कर्मचारी का PF कॉन्ट्रीब्यूशन ₹1,800 से ₹3,000 हो जाएगा.
  • दोनों के बीच का अंतर: ₹3,000-₹1,800=₹1,200 महीना
  • सालाना आधार पर यह कैलकुलेशन ₹14,400 महीना होती है.
  • यानी इतनी रकम अतिरिक्त रूप से PF सेविंग में जा सकती है.

(असल सैलरी कर्मचारी के सैलरी स्ट्रक्चर और अंतिम रूप से लागू नियमों पर निर्भर करेगा.)

बढ़ सकता है एम्पलॉयर का कॉन्ट्रीब्यूशन

PF में केवल कर्मचारी ही योगदान नहीं करता. एम्पलॉयर यानी कंपनी की तरफ से भी कॉन्ट्रीब्यूशन किया जाता है. यदि नई 25,000 रुपये की लिमिट पर 12 प्रतिशत की कैलकुलेशन लागू होती है तो एम्पलॉयर कॉन्ट्रीब्यूशन 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो सकता है.

क्या आपकी इनहैंड सैलरी ₹1,200 घटेगी?

मान लीजिए किसी कर्मचारी के लिए PF कॉन्ट्रीब्यूशन अभी ₹1,800 है. नई सिस्टम में उस कर्मचारी का कॉन्ट्रीब्यूशन ₹3,000 हो जाता है. तो कर्मचारी के हिस्से से अतिरिक्त ₹1,200 पीएम में जाएगा. ऐसे में यदि बाकी सभी सैलरी कम्पोनेंट बिल्कुल पहले जैसे रहे तो टेक होम सैलरी में करीब ₹1,200 महीने की कमी आ सकती है. उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी की कैश सैलरी पीएफ कटने के बाद ₹50,000 आती है तो बाकी सभी चीजें समान रहने पर नई पीएफ कटौती के कारण यह रकम करीब ₹48,800 हो सकती है. लेकिन जरूरी बात यह है कि ₹1,200 गायब नहीं हुए आपके PF अकाउंट में जमा होंगे.

₹2,400 तक घट जाएगा सैलरी

नए नियम के तहत एम्पलॉयी कॉन्ट्रीब्यूशन 1800 रुपये से बढ़कर 3000 रुपये हो जाएगा. प्राइवेट सेक्टर में अधिकतर कंपनी कॉस्ट टू कंपनी (CTC) स्ट्रक्चर पर काम कर रही हैं. नए सिस्टम के तहत दोनों (एम्पलॉयी और एम्पलॉयर) तरफ का कॉन्ट्रीब्यूशन मिलाकर 2400 रुपये हो जाएगा. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर कर्मचारी की टेक होम सैलरी 2,400 रुपये घट जाएगी. जानकारों ने यह भी बताया कि इस मामले में CTC और लागू कानूनी प्रावधान अहम होंगे.

CTC में क्या बदलाव होगा?

अब इसे सीटीसी (CTC) के आधार पर समझते हैं. उदाहरण के लिए किसी मंथली सीटीसी एक लाख रुपये है. इसमें दोनों तरफ का कॉन्ट्रीब्यूशन शामिल होता है. यदि एम्पलॉयर कॉन्ट्रीब्यूशन 1800 रुपये से बढ़कर ₹3,000 होता है तो कंपनी का पीएफ खर्च 1,200 बढ़ता है. यदि कंपनी CTC को उसी रेश्यो में बढ़ाती है तो कर्मचारी की कुल CTC बढ़ सकती है.लेकिन यदि CTC को पुराने वाले लेवल पर ही रखा जाता है तो सैलरी के दूसरे कम्पोनेंट में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए सिर्फ पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन के बेस पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर कर्मचारी की टेक होम सैलरी एक समान रकम से घटेगी.

PF ज्यादा कटने से नुकसान या फायदा

पीएफ का पैसा ज्यादा कटने से शॉर्ट-टर्म में टेक होम सैलरी कम हो जाती है. लेकिन इसका लॉन्ग-टर्म में बड़ा फायदा है. इससे आपको रिटायरमेंट फंड और सोशल सिक्योरिटी मिलती है. पीएफ में ज्यादा पैसा जमा होने से कम्पाउंडिंग इंटरेस्ट (compound interest) के साथ आने वाले समय के लिए बड़ा फंड तैयार होता है.  पीएफ पर मिलने वाला ब्याज कई दूसरे सुरक्षित निवेश विकल्प से बेहतर होता है. इस पर सरकार की तरफ से 80सी के तहत टैक्स छूट भी दी जाती है. इसका नुकसान यह है कि हर महीने कटौती बढ़ने से इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी और आपका बजट प्रभावित हो सकता है.

क्या अभी से ₹3,000 कटना शुरू हो जाएगा?

यहां यह समझना जरूरी है कि कैबिनेट अप्रूवल और पेरोल में असल बदलाव के बीच कुछ समय लगता सकता है. केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को वेज सीलिंग ₹15,000 से ₹25,000 करने को मंजूरी दे दी है. लागू होने पर इसका असर सैलरी स्लिप में दिखाई देगा. इसे लागू होने में कुछ समय लगेगा. जानकारों की तरफ से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बदलाव का असर सितंबर महीने की सैलरी स्लिप में दिखाई न देकर अक्टूबर की सैलरी स्लिप में दिखाई दे.

आपकी जेब पर क्या असर होगा?

आसान भाषा में समझें तो EPFO की सैलरी लिमिट बढ़ने का असर दो तरफ दिखाई दे सकता है. एक तरफ आपकी इन हैंड सैलरी कम हो सकती है, क्योंकि पीएफ का कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़ सकता है. दूसरी तरफ इसका फायदा आपके रिटायरमेंट कॉपर्स पर भी पड़ेगा. क्योंकि अब हर महीने ज्यादा पैसा पीएफ और ईपीएस में जाएंगे. यदि ₹15,000 की पुरानी लिमिट पर ₹1,800 पीएफ कट रहा है तो नई ₹25,000 लिमिट पर ₹3,000 का कॉन्ट्रीब्यूशन लागू होगा. इससे कर्मचारी के हिस्से से ₹1,200 ज्यादा पीएफ में आएगा. दोनों तरफ का मिलाकर यह 2400 रुपये हो जाएगा.

फैसले से किन कर्मचारियों को फायदा होगा?

इस बदलाव के बाद ऐसे कर्मचारियों को फायदा होगा जिनकी बेसिक सैलरी 15000 रुपये से 25000 रुपये तक है. ऐसे कर्मचारी मौजूदा लिमिट के कारण जरूरी पीएफ कवरेज से बाहर हैं, उनके लिए बदलाव अहम होगा. नई सैलरी लिमिट में 25,000 रुपये तक की सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए कंपनियों को अपनी जेब से ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन देना होगा. इससे उनकी सोशल सिक्योरिटी बढ़ जाएगी.

पीएफ जमा पर डबल फायदा

पीएफ में जमा होने वाली राशि पर आपको दो तरह से फायदा मिलता है. पहला ईपीएफ जमा पर हर वित्त वर्ष में 8.25% सालाना का ब्याज मिलता है. यह सरकार की सभी शॉर्ट सेविंग स्कीम में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा ईपीएफ में जमा राशि पर आपको टैक्स बेरिफिट भी मिलता है. ओल्ड टैक्स रिजीम में सेक्शन 80सी के तहत पीएफ समेत कुछ तय निवेश और भुगतान पर आपको डेढ़ लाख तक का फायदा मिलता है.

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Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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